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फिच का अनुमान, इस वित्त वर्ष -9.4 फीसदी घट सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था
Tue, 08 Dec 2020 11:16 AM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Tue, 08 Dec 2020 11:16 AM IST
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- फोटो : pixabay
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रेटिंग एजेंसी फिच ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के वृद्धि दर के अनुमान को संशोधित कर -9.4 फीसदी किया है। इससे पहले फिच ने भारतीय अर्थव्यवस्था में 10.5 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया था। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में उम्मीद से बेहतर सुधार के मद्देनजर रेटिंग एजेंसी ने अपने अनुमान में संशोधन किया है।
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फिच ने मंगलवार को जारी अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य अनुमान में कहा कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से पैदा हुई मंदी से देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत को अपने बहीखाते को दुरस्त करने और दीर्घावधि की योजना को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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फिच ने कहा, 'अब हमारा अनुमान है कि 2020-21 में भारत के जीडीपी में 9.4 फीसदी की गिरावट आएगी।' इससे पहले फिच ने भारतीय अर्थव्यवस्था में 10.5 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया था। फिच ने कहा कि आगे के वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था 11 फीसदी से अधिक (कोई बदलाव नहीं) और 6.3 फीसदी (0.3 फीसदी अधिक) की दर से वृद्धि दर्ज करेगी।'
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अप्रैल-जून में आई थी 23.9 फीसदी की बड़ी गिरावट
कोरोना वायरस महामारी और उसकी रोकथाम के लिए लगाए गए 'लॉकडाउन' के कारण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल-जून में अर्थव्यवस्था में 23.9 फीसदी की बड़ी गिरावट आई थी। यह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट के सबसे ऊंचे आंकड़ों में से है। दरअसल, पहली तिमाही के पहले दो महीनों अप्रैल और मई में देश में पूरी तरह से लॉकडाउन था।
नीति आयोग का दावा
मालूम हो कि नीति आयोग ने वित्त वर्ष 2021-22 के अंत यानी मार्च 2022 तक देश की आर्थिक वृद्धि दर कोविड-19 (कोरोना वायरस) महामारी से पहले के स्तर पर ही पहुंच जाने की संभावना जताई है।
तेजी से रिकवरी कर रही है अर्थव्यवस्था- आरबीआई
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी चालू वित्त वर्ष (2020-21) के संशोधित पूर्वानुमान में आर्थिक वृद्धि दर के माइनस 7.5 फीसदी रहने की संभावना जाहिर की है, जबकि पहले इसके पहले माइनस 9.5 फीसदी रहने का पूर्वानुमान जताया गया था। भारतीय अर्थव्यवस्था सितंबर तिमाही में लगाए गए अनुमान के मुकाबले ज्यादा तेजी से रिकवरी कर रही है। इसका एक कारण विनिर्माण के क्षेत्र में उछाल आना है, जो जीडीपी को 7.5 फीसदी के कम सिकुड़न वाले स्तर पर पहुंचने में मदद कर रहा है और आगे बेहतर उपभोक्ता मांग के लिए उम्मीदें पैदा कर रहा है।