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Tariffs: ट्रंप टैरिफ से मंदी का खतरा बढ़ा, अमेरिकी शेयर बाजार को दो खरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान
Fri, 04 Apr 2025 08:17 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 04 Apr 2025 08:17 AM IST
सार
अमेरिका में आर्थिक गतिविधि का 70 प्रतिशत हिस्सा उपभोक्ता खर्च से ही आता है। फिच रेटिंग्स में अमेरिकी अर्थव्यवस्था रिसर्च के प्रमुख ओलु सोनोला का कहना है कि इससे न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।
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Donald Trump
- फोटो : PTI
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को विभिन्न देशों पर टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है। हालांकि इन टैरिफ से फिलहाल सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिका को ही उठाना पड़ रहा है। विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं कि इन टैरिफ की वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है। टैरिफ के एलान के बाद एक ही दिन में अमेरिकी शेयर बाजार को दो खरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा।
वस्तुओं के दाम बढ़ने से उपभोक्ता खर्च में कटौती कर सकते हैं
अमेरिकी वित्तीय बाजार में लगभग हर क्षेत्र को नुकसान उठाना पड़ा है और यह नुकसान इतना बड़ा है कि कोरोना महामारी के करीब पांच साल बाद एक दिन में अमेरिकी कंपनियों को खरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। बैंक, खुदरा विक्रेता, कपड़े, एयरलाइंस और प्रौद्योगिकी कंपनियां इस नुकसान से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। माना जा रहा है कि टैरिफ के चलते अमेरिकी बाजार में वस्तुओं और सेवाओं के दाम बढ़ जाएंगे, जिससे उपभोक्ता अपने खर्च में कटौती करेंगे।
अमेरिका के साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था भी होगी प्रभावित
कई अर्थशास्त्रियों ने टैरिफ को उम्मीद से ज्यादा खराब बताया है। टैरिफ लगने के बाद बड़ी संख्या में निवेशकों ने उन कंपनियों के शेयर बेचे, जिन्हें लेकर आशंका है कि टैरिफ लागू होने के बाद वे कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैरिफ का असर सबसे ज्यादा उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और अगर उपभोक्ता अपने खर्च में कटौती करते हैं तो कंपनियां कम सामान का उत्पादन करेंगी और इससे आर्थिक विकास या तो रुक सकता है या सिकुड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका में आर्थिक गतिविधि का 70 प्रतिशत हिस्सा उपभोक्ता खर्च से ही आता है। फिच रेटिंग्स में अमेरिकी अर्थव्यवस्था रिसर्च के प्रमुख ओलु सोनोला का कहना है कि इससे न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।
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ये भी पढ़ें- US Tariff : भारत पर कब से लागू होगा ट्रंप का टैरिफ और क्या होगा असर? जानें इससे जुड़े हर सवाल का जवाब
जानिए कौन कौन से सेक्टर टैरिफ प्लान से हुए प्रभावित
एयरलाइंस
माना जा रहा है कि वस्तुओं के महंगी होने से अमेरिकी लोग अपने खर्च में कटौती करेंगे और इसके चलते वे हवाई यात्राओं में कटौती कर सकते हैं। यही वजह रही कि गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार में अमेरिकी एयरलाइंस के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
कपड़े और जूते
अमेरिका में अधिकतर कपडे़ और जूतों के ब्रांड देश के बाहर उत्पादन करते हैं। ऐसे में अब उन्हें अमेरिका में भारी टैरिफ देना होगा। इससे कपड़े और जूते महंगे होंगे और उनकी बिक्री पर असर आना तय है। यही वजह रही कि नाइकी, राल्फ लॉरेन आदि कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट आई।
ये भी पढ़ें- US: भारतवंशी सांसदों ने ट्रंप के टैरिफ लगाने के फैसले को बताया आत्मघाती, बोले- अमेरिकी अर्थव्यवस्था को खतरा
खुदरा कंपनियां
अमेरिका में ऑनलाइन खुदरा कंपनियां अपनी इन्वेंट्री का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करती हैं। यही वजह रही कि अमेजन, बेस्ट बाय, डॉलर ट्री जैसी खुदरा कंपनियों के शेयरों में गुरुवार को दहाई के अंकों में गिरावट दर्ज की गई।
प्रौद्योगिकी सेक्टर
कंप्यूटर, स्मार्टफोन और लैपटॉप बेचने वाली प्रौद्योगिकी कंपनियां भी अपने अधिकतर उत्पाद अमेरिका से बाहर बनाती हैं। ऐसे में उन्हें भी अब अपने उत्पादों पर टैरिफ देना होगा। यही वजह रही कि एपल, एचपी, डेल, एनवीडिया जैसी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। इनके अलावा बैंकों, रेस्तरां और कार निर्माता कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आई है।
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वस्तुओं के दाम बढ़ने से उपभोक्ता खर्च में कटौती कर सकते हैं
अमेरिकी वित्तीय बाजार में लगभग हर क्षेत्र को नुकसान उठाना पड़ा है और यह नुकसान इतना बड़ा है कि कोरोना महामारी के करीब पांच साल बाद एक दिन में अमेरिकी कंपनियों को खरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। बैंक, खुदरा विक्रेता, कपड़े, एयरलाइंस और प्रौद्योगिकी कंपनियां इस नुकसान से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। माना जा रहा है कि टैरिफ के चलते अमेरिकी बाजार में वस्तुओं और सेवाओं के दाम बढ़ जाएंगे, जिससे उपभोक्ता अपने खर्च में कटौती करेंगे।
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अमेरिका के साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था भी होगी प्रभावित
कई अर्थशास्त्रियों ने टैरिफ को उम्मीद से ज्यादा खराब बताया है। टैरिफ लगने के बाद बड़ी संख्या में निवेशकों ने उन कंपनियों के शेयर बेचे, जिन्हें लेकर आशंका है कि टैरिफ लागू होने के बाद वे कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैरिफ का असर सबसे ज्यादा उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और अगर उपभोक्ता अपने खर्च में कटौती करते हैं तो कंपनियां कम सामान का उत्पादन करेंगी और इससे आर्थिक विकास या तो रुक सकता है या सिकुड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका में आर्थिक गतिविधि का 70 प्रतिशत हिस्सा उपभोक्ता खर्च से ही आता है। फिच रेटिंग्स में अमेरिकी अर्थव्यवस्था रिसर्च के प्रमुख ओलु सोनोला का कहना है कि इससे न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।
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जानिए कौन कौन से सेक्टर टैरिफ प्लान से हुए प्रभावित
एयरलाइंस
माना जा रहा है कि वस्तुओं के महंगी होने से अमेरिकी लोग अपने खर्च में कटौती करेंगे और इसके चलते वे हवाई यात्राओं में कटौती कर सकते हैं। यही वजह रही कि गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार में अमेरिकी एयरलाइंस के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
कपड़े और जूते
अमेरिका में अधिकतर कपडे़ और जूतों के ब्रांड देश के बाहर उत्पादन करते हैं। ऐसे में अब उन्हें अमेरिका में भारी टैरिफ देना होगा। इससे कपड़े और जूते महंगे होंगे और उनकी बिक्री पर असर आना तय है। यही वजह रही कि नाइकी, राल्फ लॉरेन आदि कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट आई।
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खुदरा कंपनियां
अमेरिका में ऑनलाइन खुदरा कंपनियां अपनी इन्वेंट्री का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करती हैं। यही वजह रही कि अमेजन, बेस्ट बाय, डॉलर ट्री जैसी खुदरा कंपनियों के शेयरों में गुरुवार को दहाई के अंकों में गिरावट दर्ज की गई।
प्रौद्योगिकी सेक्टर
कंप्यूटर, स्मार्टफोन और लैपटॉप बेचने वाली प्रौद्योगिकी कंपनियां भी अपने अधिकतर उत्पाद अमेरिका से बाहर बनाती हैं। ऐसे में उन्हें भी अब अपने उत्पादों पर टैरिफ देना होगा। यही वजह रही कि एपल, एचपी, डेल, एनवीडिया जैसी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। इनके अलावा बैंकों, रेस्तरां और कार निर्माता कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आई है।