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Sri Lanka Seeks Loan: श्रीलंका में आवश्यक वस्तुओं का संकट, भारत से मांगा 1 अरब डॉलर का कर्ज
Wed, 12 Jan 2022 06:15 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Wed, 12 Jan 2022 06:15 PM IST
सार
चीन के कर्ज के जाल में फंसकर दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुके श्रीलंका में लगभग सभी आवश्यक वस्तुओं का संकट पैदा हो गया है। इस संकट से उबरने के लिए अब यह द्वीपीय देश अपने पड़ोसी देशों से कर्ज की आस लगा रहा है। इसीके तहत श्रीलंका ने भारत से वस्तुओं के आयात के लिए एक अरब डॉलर का कर्ज मांगा है।
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श्रीलंका
- फोटो : social media
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विस्तार
चीन के कर्ज के जाल में फंसकर दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुके श्रीलंका में लगभग सभी आवश्यक वस्तुओं का संकट पैदा हो गया है। इस संकट से उबरने के लिए अब यह द्वीपीय देश अपने पड़ोसी देशों से कर्ज की आस लगा रहा है। इसीके तहत श्रीलंका ने भारत से वस्तुओं के आयात के लिए एक अरब डॉलर का कर्ज मांगा है।
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भारत से कर्ज के लिए बातचीत जारी
श्रीलंका के केंद्रीय बैंक के गवर्नर अजित निवार्ड कैब्राल ने कहा कि श्रीलंका सामान आयात करने के लिए भारत के साथ एक अरब डॉलर के ऋण को लेकर बातचीत कर रहा है। इससे श्रीलंका को अपने ऋण भुगतान में मदद मिलने के साथ दोनों देशों के व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत से एक अरब डॉलर का ऋण खाद्य आयात तक ही सीमित रहेगा। बता दें आयात के भुगतान के लिए डॉलर की कमी के कारण श्रीलंका वर्तमान में लगभग सभी आवश्यक वस्तुओं की कमी का सामना कर रहा है।
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श्रीलंका कर रहा ऋण पनर्गठन का प्रयास
कैब्राल ने बुधवार को कहा कि श्रीलंका अपने ऋण भुगतान के पुनर्गठन के प्रयास के तहत चीन से एक और कर्ज के लिए बातचीत कर रहा है। हालांकि, कर्ज की रकम तय नहीं की गई है। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते, राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से कहा था कि अगर कर्ज का पुनर्गठन किया जा सकता है तो श्रीलंका को मदद मिलेगी।
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देश पर गहराता जा रहा वित्तीय संकट
श्रीलंका गहराते वित्तीय और मानवीय संकट की खाई में डूबता जा रहा है। मुद्रास्फीति का रिकॉर्ड स्तर, खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल और कोरोना महामारी से पैदा हुई परेशानियों के कारण देश के खजाने सूख रहे हैं। हालात यहां तक खराब हो चुके हैं कि इस देश के इस साल दिवालिया होने की आशंका है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश को अगले 12 महीनों में घरेलू और विदेशी ऋणों में अनुमानित 7.3 अरब डॉलर चुकाने की जरूरत है।
खाद्य मुद्रास्फीति 22.1 फीसदी पर
देश के केंद्रीय बैंक की ओर से की गई घोषणा के अनुसार, दिसंबर खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति एक महीने पहले 17.5 प्रतिशत से बढ़कर 22.1 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा कोरोना संकट के कारण देश का टूरिज्म सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ। साथ ही सरकारी खर्च में बढ़ोतरी और टैक्स में कटौती ने हालात को और बदतर बना दिया। वहीं चीन का कर्ज चुकाते-चुकाते श्रीलंका की कमर टूट चुकी है। इन बड़ी परेशानियों ने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के सामने देश में आर्थिक मंदी के खतरे को और भी बढ़ा दिया है। दूसरे शब्दों में कहें तो कर्ज के जाल में फंसकर श्रीलंका दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुका है।
देश के 5 लाख लोग गरीबी में फंसे
विश्व बैंक के अनुमानों के मुताबिक महामारी के शुरू होने के बाद से देश में 500,000 लोग गरीबी के जाल में फंस गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जो परिवार पहले संपन्न माने जाते थे, उनके लिए भी दो जून की रोटी जुटानी मुश्किल पड़ रही है। देश के अधिकांश परिवारों के लिए अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने लाले पड़े हैं। देश में आर्थिक आपातकाल की स्थिति के बीच यात्रा और पर्यटन क्षेत्र में ही करीब दो लाख से ज्यादा लोगों का रोजगार खत्म हो चुका है और यही हालात दूसरे क्षेत्रों में बने हुए हैं।