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CRISIL: ज्यादा फल-सब्जी खाने के कारण बढ़ रहीं हैं कीमतें, बेमौसम बारिश से फसलों को नुकसान

Tue, 24 Oct 2023 06:17 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 24 Oct 2023 06:17 AM IST
सार

सब्जियों की कीमतों में वृद्धि का एक बड़ा कारण मांग-आपूर्ति का बेमेल है। वित्त वर्ष 2003-23 के बीच सब्जी उत्पादन 2.5 गुना बढ़ गया। फिर भी, प्रति व्यक्ति सब्जी उत्पादन 2 गुना से भी कम बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सब्जियां पूरे वर्ष उगाई जाती हैं।

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Crisil report says Prices increasing due to consumption of fruits and vegetables
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

लोग सब्जियों और फलों को अब ज्यादा खाने लगे हैं। इसलिए, इनकी कीमतों में तेजी आ रही है। क्रिसिल रिपोर्ट के अनुसार, अब लोग मांस, दालें, फल और सब्जियों जैसे गैर-अनाज उत्पादों को ज्यादा पसंद करते हैं। इससे आपूर्ति की तुलना में सब्जियों की मांग बढ़ी है।

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रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादन में अस्थिरता और कीमतों की आपूर्ति-मांग में भारी अंतर से सब्जियों की कीमतों में मौसमी वृद्धि आम हो गई है। खाद्य सूचकांक में सब्जियों का वजन 15.5% है, जो अनाज व दूध के बाद सर्वाधिक है। मौसम के असंतुलन से प्याज और टमाटर जैसी अक्सर उपयोग होने वाली सब्जियों की कीमतें बढ़ जाती हैं। इससे खाद्य महंगाई भी बढ़ती है। जून में मानसून देरी से आया। जुलाई में भारी बारिश हुई। अगस्त में कम फिर सितंबर में भारी बारिश हुई। इससे फसलों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा।

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2016-19 में सब्जियों की महंगाई शून्य फीसदी रही, 2020-23 में 5.7 फीसदी
वित्त वर्ष 2016-19 में सब्जियों की महंगाई औसतन 0 फीसदी थी। वित्त वर्ष 2020-23 के बीच बढ़कर 5.7% हो गई। 100 महीनों में सीपीआई में सब्जी महंगाई 49 महीने तक औसत 3.8% से ऊपर थी। 35 महीनों में 7% से ऊपर, 30 महीनों में 10% से ऊपर और 13 महीनों में 20% से ऊपर थी। तीन वित्त वर्ष में भी सब्जी की महंगाई में अस्थिरता देखी गई है।

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उत्पादन में ढाई गुना की बढ़त लेकिन मांग उससे ज्यादा
सब्जियों की कीमतों में वृद्धि का एक बड़ा कारण मांग-आपूर्ति का बेमेल है। वित्त वर्ष 2003-23 के बीच सब्जी उत्पादन 2.5 गुना बढ़ गया। फिर भी, प्रति व्यक्ति सब्जी उत्पादन 2 गुना से भी कम बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सब्जियां पूरे वर्ष उगाई जाती हैं। इनमें कोई मूल्य संकेत तंत्र जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य या सरकार की ओर से सुनिश्चित खरीदारी नहीं होती है। चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

व्यवस्था नहीं होने से होता है नुकसान
भले ही सब्जियों के रकबे और उत्पादन में वृद्धि हुई है। लेकिन कटाई, पैकेजिंग, परिवहन, भंडारण और वितरण में इसका बहुत नुकसान होता है।आलू जैसी सब्जियों को कम नुकसान हो सकता था, बशर्ते देश में कोल्ड स्टोरेज बढ़ा होता। सब्जियों की कीमतों में अचानक उछाल का सभी तरह के ग्राहकों पर ज्यादा असर पड़ता है।

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