फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   coronavirus news update India: assocham and ficci urged to govt to help MSME sector

Coronavirus: औद्योगिक संगठन बोले, केंद्र ने मध्यम-लघु उद्योगों को न बचाया तो अर्थव्यवस्था तबाही की ओर

Wed, 25 Mar 2020 03:17 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 25 Mar 2020 03:17 PM IST
सार

  • MSME क्षेत्र की मांगः बैंकों से कर्ज मिलना आसान करे सरकार
  • कमजोरी से करोड़ों नौकरियों पर लटकी तलवार
  • शुरुआती दौर में ही 34.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर के नुकसान की आशंका
  • कोरोना लंबा खिंचा तो कोई भी उद्योग नुकसान झेल नहीं पाएगा
  • फरवरी से अप्रैल के बीच निर्यात के कैंसिल हुए आर्डर से आठ से दस हजार करोड़ रुपये का सीधा नुकसान

विज्ञापन
coronavirus news update India: assocham and ficci urged to govt to help MSME sector
MSME Sector - फोटो : Social Media

विस्तार

नोटबंदी, फिर जीएसटी और अब कोविड-19 का कहर; देश का मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्योग लगातार एक के बाद एक कठिन चुनौतियों से जूझ रहा है। कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन होने से इस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।

विज्ञापन


एक औद्योगिक संगठन ने 23 मार्च 2020 को जारी अपनी रिपोर्ट में अंकटाड रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि कोरोना के कारण चीन के निर्माण क्षेत्र की बंदी से भारतीय व्यापार क्षेत्र को शुरुआती दौर में 34.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान हो सकता है।
विज्ञापन


अगर कोरोना का असर लंबा खिंचता है तो यह नुकसान भयावह रूप से और अधिक बढ़ सकता है। इससे एक साथ करोड़ों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। यह क्षेत्र देश को सबसे ज्यादा नौकरियां भी उपलब्ध करवाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


औद्योगिक संगठनों की राय है कि केंद्र सरकार इस क्षेत्र को तत्काल राहत पहुंचाने की पहल करे अन्यथा देश की अर्थव्यवस्था पर इसका भारी नकारात्मक असर पड़ेगा और देश की जीडीपी में भारी गिरावट आ सकती है

कितने नुकसान की आशंका

औद्योगिक संगठन एसोचैम के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने अमर उजाला से कहा कि अभी उन्हें भी इसका ठीक-ठीक अंदाजा नहीं है कि कोरोना वायरस का कितना असर लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्योगों पर पड़ सकता है ।

लेकिन यह तय है कि पहले ही अनेक फैसलों के कारण मुश्किल दौर से गुजर रहे इस उद्योग क्षेत्र के लिए यह नुकसान इसकी कमर तोड़ देने वाला है साबित हो सकता है। कोरोना की वजह से कितनी नौकरियां खतरे में हैं, इसका अभी आकलन किया जा रहा है।

कोरोना की सबसे पहली और सीधी मार दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ी है। निर्माण क्षेत्र पर पाबंदी लगने से अकेले मुंबई में ही लगभग 25 लाख दिहाड़ी मजदूरों को रोजगार खोना पड़ा है। अगर सरकार इस क्षेत्र को बचाने के लिए ठोस आर्थिक उपायों की जल्द घोषणा नहीं करती है तो देश की अर्थ व्यवस्था पर तीखी चोट पड़ सकती है।

सरकार से मांग

कोरोना के असर को लेकर एसोचैम के शीर्ष अधिकारियों ने केंद्र के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और क्षेत्र की स्थिति की जानकारी दी। संगठन ने सरकार से मांग की है कि इस क्षेत्र को कोरोना के कहर से बचाने के लिए कर्ज वापसी के लिए उसे दो से तीन वर्ष का फ्लेक्सिबल अतिरिक्त समय दिया जाए।

इसके आलावा जीएसटी और इनकम टैक्स देने की समय सीमा को भी लचीला बनाया जाना चाहिए, जिससे तत्काल नुकसान की आशंका को कम किया जा सके।

नौकरियों को कितना नुकसान

प्रधानमंत्री ने औद्योगिक निकायों से अपील की है कि वे अपने कर्मचारियों को नौकरी से न निकालें। इतना ही नहीं वे उनके वेतन में कटौती भी न करें। यह मुश्किल समय है और उन्हें सबका साथ देने की जरूरत है।

लेकिन एक औद्योगिक संगठन के शीर्ष पदाधिकारी का कहना है कि अगर कोरोना के कारण बंदी एक या दो महीने तक चलती है, तो वे कुछ इसका कुछ न कुछ नुकसान सह लेंगे। लेकिन विदेश के कई देशों की तरह अगर यह लंबा खिंचता है तो इसका नुकसान बर्दाश्त करना किसी भी उद्योग के लिए संभव नहीं होगा।

इस स्थिति में नुकसान की कल्पना भी भयावह हो सकती है।

फिक्की ने सरकार को दी सलाह

औद्योगिक संगठन फिक्की का आकलन है कि चीन की बंदी के कारण इलेक्ट्रोनिक्स, सी फ़ूड, पेट्रोकेमिकल्स और आभूषण उद्योग को सीधा नुक्सान हुआ है। निर्यात में कमी के कारण अकेले मछली पालन उद्योग को 1,300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

भारत अपने हीरा उद्योग के कुल उत्पादन का लगभग 36 फीसदी केवल चीन को निर्यात करता है। इसी प्रकार पेट्रो केमिकल्स का लगभग 34 फीसदी उत्पाद चीन को निर्यात किया जाता है।



लेकिन कोरोना के कारण यह निर्यात पूरी तरह से ठप है। अकेले फरवरी से अप्रैल के बीच कैंसिल हुए आर्डर से आठ से दस हजार करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ है।
 
निर्माण, पर्यटन, हस्तशिल्प उत्पाद, कृषि उत्पादों से संबंधित क्षेत्र और केमिकल्स सेक्टर में अभी मंदी और अधिक गहराने के आसार हैं। इसी समय में दवा क्षेत्र, मेडिकल इक्विपमेंट बनाने वाले क्षेत्र और केमिकल मेडिसिनल सेक्टर में कोरोना के कारण कुछ बढ़ोतरी होने की भी उम्मीद है, लेकिन यह बढ़ोतरी पूरे नुकसान की अंश मात्र भी न होने से इसका पूरी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ना तय माना जा रहा है।   

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed