2019 से पहले कांग्रेस पर छाया नकदी का संकट, ये वजह आई सामने
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देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस इस वक्त वित्तीय तौर पर बड़े ही बुरे दौर से गुजर रही है। राहुल गांधी की अध्यक्षता में पार्टी के पास नकदी का संकट इतना गहराया गया है कि उसे अपने कई खर्चों में कटौती करनी पड़ी है। इसके साथ ही पार्टी के पास 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए क्राउड फंडिंग का सहारा ले रही है।
पांच महीनों से लगा रखी है रोक
पार्टी ने अपने खर्चों में कटौती करने के लिए पिछले पांच महीनों से देश के विभिन्न राज्यों में भेजे जाने वाले फंड पर रोक लगा रखी है, जिसका उपयोग रोजाना के खर्चों को पूरा करने में किया जाता है। अब पार्टी ने अपने सभी सदस्यों से कहा है कि वो खर्चों में कटौती करें और सदस्यों से ज्यादा से ज्यादा दान लें।
इसलिए हुई समस्या
बड़ी कंपनियां और इनके मालिक सभी पार्टियों को अपनी तरफ से पैसा चंदे के तौर पर देते थे। केंद्र और देश के 20 राज्यों में भाजपा/एनडीए की सरकार बनने के बाद से कांग्रेस को कंपनियों की तरफ से मिलने वाला चंदा आना बंद हो गया है।
नहीं है हमारे पास पैसा
कांग्रेस की सोशल मीडिया डिपार्टमेंट की प्रमुख दिव्या स्पंदना ने कहा कि उनके पास पैसा नहीं है। इसलिए अब ऑनलाइन डोनेशन व क्राउड सोर्सिंग के जरिए पैसा इकठ्ठा किया जाएगा। पार्टी के पास केवल दो बड़े राज्यों में सरकारें है, जो कि 2013 में 15 राज्यों में थी।
बड़े उद्योगपतियों ने किया किनारा
कांग्रेस की राज्यों में सरकार नहीं होने के कारण अब बड़े उद्योगपतियों ने भी पार्टी से किनारा कर लिया है। कांग्रेस के पास उतना भी पैसा नहीं बचा है, जितना अन्य दलों के पास है, जिनकी कुछ राज्यों में सरकारें हैं।
भाजपा के पास है एडवॉन्टेज
भाजपा के पास चार राज्यों में विधानसभा चुनाव और 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए वित्तीय तौर पर काफी एडवॉन्टेज है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि नोटबंदी के साल में भारतीय जनता पार्टी ने 1034 करोड़ रुपये और कांग्रेस ने 225 करोड़ रुपये कमाए थे। रिपोर्ट में यह भी कहा कि दोनों प्रमुख पार्टियों ने इस दौरान विज्ञापनों पर भी काफी खर्च किया था।
भाजपा की कमाई में हुई 81.18 फीसदी की बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2015-16 और 2016-17 में भाजपा की कमाई में 81.18 फीसदी (463.41 करोड़ रुपये) की बढ़ोतरी देखने को मिली थी। गौरतलब है कि 8 नवंबर 2016 को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का अभूतपूर्व फैसला लिया था, जिसका दूरगामी असर बाद में इकोनॉमी पर देखने को मिला था।