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अब इस तरह होगा ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ शिकायत का निपटारा
amarujala.com {Presented by: पवन नाहर}
Updated Tue, 07 Mar 2017 04:04 AM IST
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अगर आपने ई-कॉमर्स कंपनियों से कोई सामान खरीदा है और वह सामान खरीदारी के दौरान ऑनलाइन दिखने वाले सामान की तरह नहीं है या फिर आपको दी गई जानकारी से खरीदा जाने वाला सामान मेल नहीं खा रहा है या ऑनलाइन खरीदे गए सामान को वापस करने में दिक्कत हो रही है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आपकी समस्या का निवारण महज 100 रुपये में हो जाएगा। कानून के बड़े-बड़े जानकार ई-कामर्स कंपनियों से सुलह कराने में आपकी मदद करेंगे।
भारत सरकार के उपभोक्ता मामले मंत्रालय व बंगलूरू स्थित नेशनल लॉ स्कूल के सहयोग से उपभोक्ताओं की शिकायत पर ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ मध्यस्थता का काम शुरू कर दिया गया है। मंत्रालय के मुताबिक, मध्यस्थता का यह काम ऑनलाइन किया जा रहा है। उपभोक्ता भी फिलहाल ऑनलाइन ही अपनी शिकायत कर सकते हैं, जिसके आधार पर उनकी शिकायत का निपटान किया जा रहा है।
ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ शिकायत करने के लिए उपभोक्ताओं को सिर्फ ऑनलाइन कंज्यूमर मेडिएशन सेंटर (ओसीएमसी) की साइट पर जाकर अपना खाता खोलना होगा, जिसके लिए कोई शुल्क नहीं देना है। शिकायत की मध्यस्थता के लिए 100 रुपये शुल्क लिया जाता है।
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भारत सरकार के उपभोक्ता मामले मंत्रालय व बंगलूरू स्थित नेशनल लॉ स्कूल के सहयोग से उपभोक्ताओं की शिकायत पर ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ मध्यस्थता का काम शुरू कर दिया गया है। मंत्रालय के मुताबिक, मध्यस्थता का यह काम ऑनलाइन किया जा रहा है। उपभोक्ता भी फिलहाल ऑनलाइन ही अपनी शिकायत कर सकते हैं, जिसके आधार पर उनकी शिकायत का निपटान किया जा रहा है।
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ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ शिकायत करने के लिए उपभोक्ताओं को सिर्फ ऑनलाइन कंज्यूमर मेडिएशन सेंटर (ओसीएमसी) की साइट पर जाकर अपना खाता खोलना होगा, जिसके लिए कोई शुल्क नहीं देना है। शिकायत की मध्यस्थता के लिए 100 रुपये शुल्क लिया जाता है।
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नहीं हैं कोई अलग कानून
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45 दिनों में शिकायत का निपटान करा देते हैं मध्यस्थ
नियम के मुताबिक, कोई उपभोक्ता चाहे तो इस प्लेटफॉर्म के जरिए ई-कामर्स कंपनियों से खुद ही अपनी शिकायत का हल निकाल सकता है। ऐसा संभव नहीं होने पर उपभोक्ता मध्यस्थता की मांग करता है और फिर उसे प्रशिक्षित मध्यस्थ दिए जाते हैं, जो अधिकतम 45 दिनों के अंदर उस शिकायत का निपटान करा देते हैं। मध्यस्थता का यह काम सरकार के उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत किया जाता है। मध्यस्थता के काम के लिए एक पैनल बनाया गया है, जिसमें कानून के जानकारों को प्रशिक्षण के बाद शामिल किया जाता है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, ऑनलाइन सेंटर में शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
ई-कॉमर्स कंपनियों को लेकर नहीं है अलग से कानून
ऑनलाइन कंपनियों के कारोबार में पिछले 4-5 सालों से 50-100 फीसदी तक की बढ़ोतरी चल रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं की शिकायतें भी बढ़ती जा रही हैं। फिलहाल ई-कामर्स कंपनियों को लेकर सरकार की तरफ से अलग से कोई कानून नहीं बनाया गया है, जिसके तहत उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हो सके। ऐसे में ऑनलाइन मध्यस्थता सेंटर काफी उपयोगी साबित हो रहा है।
नियम के मुताबिक, कोई उपभोक्ता चाहे तो इस प्लेटफॉर्म के जरिए ई-कामर्स कंपनियों से खुद ही अपनी शिकायत का हल निकाल सकता है। ऐसा संभव नहीं होने पर उपभोक्ता मध्यस्थता की मांग करता है और फिर उसे प्रशिक्षित मध्यस्थ दिए जाते हैं, जो अधिकतम 45 दिनों के अंदर उस शिकायत का निपटान करा देते हैं। मध्यस्थता का यह काम सरकार के उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत किया जाता है। मध्यस्थता के काम के लिए एक पैनल बनाया गया है, जिसमें कानून के जानकारों को प्रशिक्षण के बाद शामिल किया जाता है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, ऑनलाइन सेंटर में शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
ई-कॉमर्स कंपनियों को लेकर नहीं है अलग से कानून
ऑनलाइन कंपनियों के कारोबार में पिछले 4-5 सालों से 50-100 फीसदी तक की बढ़ोतरी चल रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं की शिकायतें भी बढ़ती जा रही हैं। फिलहाल ई-कामर्स कंपनियों को लेकर सरकार की तरफ से अलग से कोई कानून नहीं बनाया गया है, जिसके तहत उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हो सके। ऐसे में ऑनलाइन मध्यस्थता सेंटर काफी उपयोगी साबित हो रहा है।