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कोयला संकट ने रोकी ट्रेनों की रफ्तार: रेलवे ने 24 मई तक रद्द कीं 1000 से ज्यादा ट्रेनें, जानें क्यों लिया ये बड़ा फैसला

Thu, 05 May 2022 12:13 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीपक चतुर्वेदी Updated Thu, 05 May 2022 12:13 PM IST
सार

रिपोर्ट के अनुसार, कोयला आपूर्ति करने के मकसद से एक्सप्रेस मेल ट्रेनों के लगभग 500 ट्रिप और पैसेंजर ट्रेनों के 580 ट्रिप रद्द कर दिए गए हैं। इससे पहले भारतीय रेलवे ने 29 अप्रैल को देशभर में कम से कम 400 कोयला रेक की आवाजाही के लिए 240 यात्री ट्रेनों को रद्द करने की घोषणा की थी। 

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coal crisis indian railway Cancelled more than 1000 trains till 24 may know big reason here
कोयला संकट के चलते ट्रेनें रद्द। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के विभिन्न राज्यों में गहराए कोयला संकट के निपटने के लिए केंद्र सरकार की ओर से लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। इस क्रम में सरकार ने राज्यों में कोयला रैक के परिवहन के लिए बड़ी संख्या में ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया है। इसके तहत 24 मई तक लगभग 1100 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। ये बड़ी कवायद कोयले की कमी को तत्काल पूरा करने की कवायद है। 

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ऊर्जा मंत्री ने भी मानी कोयले की कमी
थर्मल पावर प्लांटों पर कोयले की कमी के चलते देश के कई राज्यों यूपी से पंजाब तक और जम्मू कश्मीर से चेन्नई तक हर ओर बिजली संकट गहरा गया है। जबकि गर्मी लगातार अपने रिकॉर्ड तोड़ रही है। बिजली का मांग में जोरदार इजाफा हुआ है, लेकिन आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसके लिए बड़ी वजह कोयले की कमी को बताया जा रहा है। बीते दिनों केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने भी कहा था कि कई राज्यों में कोयले की कमी है, उन्होंने इसके लिए रूस-यूक्रेन युद्ध को कारण बताया था। 
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रद्द की गई ट्रेनों में एक्सप्रेस, मेल और पैसेंजर
गौरतलब है कि 24 मई तक रद्द की गईं ट्रेनों में एक्सप्रेसव, मेल और पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं। हालांकि, सरकार के इस कदम से यात्रियों को परेशानी हो सकती है। लेकिन, देश में गहराए गंभीर बिजली संकट से निपटने में सरकार का यह कदम राहत देने वाला साबित हो सकता है। यहां बता दें कि बीते दिनों भी सरकार ने राज्यों में कोयले की रैक पहुंचाने के लिए कई ट्रेनों को रद्द किया था। 
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29 अप्रैल को भी रद्द की गई थीं ट्रेनें
इस संबंध में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, कोयला आपूर्ति करने के मकसद से एक्सप्रेस मेल ट्रेनों के लगभग 500 ट्रिप और पैसेंजर ट्रेनों के 580 ट्रिप रद्द कर दिए गए हैं। इससे पहले भारतीय रेलवे ने 29 अप्रैल को देशभर में कम से कम 400 कोयला रेक की आवाजाही के लिए 240 यात्री ट्रेनों को रद्द करने की घोषणा की थी। इसमें कहा गया कि देश के विभिन्न थर्मल पावर प्लांटों पर कोयले से लदी ट्रेनों को असानी से रास्ता दिया जा सके, ताकि समय पर कोयला पहुंच सके और बिजली संकट से निपटा जा सके, इसलिए विभिन्न रूटों पर इतनी बड़ी संख्या में ट्रेनों को रद्द किया गया है।

चिदंबरम ने कसा था पीएम मोदी पर तंज
बता दें कि बीते दिनों जब कोयले की कमी और बिजली संकट के मद्देनजर सरकार ने ट्रेनों को रद्द किया था, तो पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि 'प्रचुर मात्रा में कोयला, बड़े रेल नेटवर्क, ताप संयंत्रों में अप्रयुक्त क्षमता, फिर भी बिजली की भारी किल्लत है। लेकिन केंद्र सरकार को दोष नहीं दिया जा सकता है। यह हालात कांग्रेस के 60 साल के शासन के कारण पैदा हुए हैं!' उन्होंने कहा कि सरकार ने समाधान ढूंढ़ लिया है, यात्री ट्रेनें रद्द करो और कोयला लदी ट्रेनें चलाओ! मोदी है, मुमकिन है। 

छह साल में सबसे ज्यादा बिजली कटौती
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में भीषण गर्मी के दौरान इस समय जो बिजली कटौती हो रही है, वो पिछले छह साल से अधिक समय में सबसे ज्यादा है। बिजली उत्पादन में अहम भूमिका निभाने वाले कोयले की भारी कमी के चलते ये हालात पैदा हुए हैं। कोयले का भंडार तकरीबन नौ वर्षों में सबसे कम प्री-ग्रीष्मकालीन स्तर पर आ गया है। बीते गुरुवार को बिजली मंत्रालय ने खुद कहा था कि भारत में पीक-पावर की मांग रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई। एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के पहले 27 दिनों के दौरान ही बिजली की आपूर्ति 1.88 अरब यूनिट या 1.6 फीसदी तक कम हो गई।


कई राज्यों में जनता का हाल-बेहाल
पहले देश में बिजली कटौती के हालातों पर एक नजर डाल लेते हैं। हालात ये हैं कि देश के 16 राज्यों में कोयले की कमी के कारण हो रही बिजली कटौती से बुरा हाल है। उत्तर और मध्य भारत में अभूतपूर्व गर्मी के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड 2.14 लाख मेगावाट के करीब पहुंच गई है। इस बीच बिजली उत्पादन संयंत्रों में कोयले की कमी के कारण मांग के मुकाबले आपूर्ति में जोरदार कमी दर्ज की गई है। यूपी, दिल्ली, बिहार, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान के अलावा जम्मू-कश्मीर से लेकर आंध्र प्रदेश तक उपभोक्ताओं को 2 से लेकर 10 घंटे तक की अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। 

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