घटे रोजगार के मौके: त्योहारी सीजन में भी बढ़ रही बेरोजगारी, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में नौकरियों पर छाया संकट
संगठित क्षेत्रों में नौकरियों में लगातार हो रहा सुधार, लेकिन असंगठित क्षेत्रों में स्थिति बेहद खराब। राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी बढ़ने से त्योहारी सीजन में भी बाजार में एफएमसीजी उत्पादों की मांग में कमी बनी रहने की संभावना...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रक्षाबंधन के साथ ही त्योहारों के सीजन की शुरुआत हो चुकी है। इसके आगे गणेश चुतर्थी, नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहार आ रहे हैं। त्योहारों के दौरान बाजार तेजी पकड़ता है और आवश्यक वस्तुओं की मांग में बढ़ोतरी होती है। लेकिन इसी दौरान पूरे देश में बेरोजगारी दर की बढ़ोतरी ने चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि अगर रोजगार की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो बाजार में आवश्यक वस्तुओं की मांग में कमी बनी रह सकती है। इस समय पूरे देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.88 फीसदी हो गई है। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 9.52 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 7.13 फीसदी हो गई है।
सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार अगस्त महीने की शुरुआत में राष्ट्रीय बेरोजगारी दर सात फीसदी के करीब थी जो मध्य अगस्त तक बढ़कर 7.42 फीसदी के लगभग हो गई। बीते सप्ताह में 7.91 तक पहुंचने के बाद अब यह 7.88 फीसदी तक रह गई है। इसी प्रकार शहरी बेरोजगारी दर अगस्त महीने की शुरुआत में 8.29 फीसदी, मध्य में 9.08 फीसदी और अब 9.52 फीसदी हो गई है।
खेती के कामकाज का समय होने के कारण इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर अपेक्षाकृत कम रही। ग्रामीण क्षेत्रों में अगस्त महीने की शुरुआत में बेरोजगारी दर 6.45 फीसदी और मध्य में 6.68 फीसदी रही। अब यह बढ़कर 7.13 फीसदी हो गई है।
आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो इससे लोगों की जेब में पैसा नहीं जाएगा। इससे त्योहारों के सीजन में भी एफएमसीजी उत्पादों की खपत में बढ़ोतरी नहीं होगी।
उत्पादन सीमित, त्योहारों से उम्मीद
एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, नोएडा के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने अमर उजाला को बताया कि केंद्र सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी सूक्ष्म, लघु और मध्यम स्तर के उद्योगों की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। जबकि देश के लगभग 12 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में यही क्षेत्र सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। उद्योगों को लगभग 80 फीसदी श्रमिकों के सहारे काम करना पड़ रहा है, जबकि इसी दौरान मांग में बढ़ोतरी न होने से कंपनियां अपनी क्षमता से कम उत्पादन कर रही हैं।
मजे की बात है कि बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी के बाद भी सरकार का जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहा है। उत्पादन में कमी होने के बाद भी सकल जीएसटी संग्रह में वृद्धि के विरोधाभास के पीछे सरकार की 'वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी' बताई जा रही है। इस योजना में व्यापारी अपने पिछले दस वर्षों तक का टैक्स देय राशि बिना ब्याज चुकाए अदा कर मामला रफा-दफा कर सकते हैं। इससे बड़ी संख्या में व्यापारी अपना पुराना बकाया खत्म कर रहे हैं जिसके कारण सकल जीएसटी कलेक्शन बढ़ा हुआ दिख रहा है।
आंकड़े विश्वास के योग्य नहीं- भाजपा
भाजपा के प्रवक्ता राजीव जेटली ने कहा कि बेरोजगारी बढ़ने के इन आंकड़ों पर बहुत विश्वास नहीं किया जा सकता। सच्चाई यह है कि इसी दौरान देश के निर्यात में वृद्धि हो रही है, देश की वाहन निर्माता कंपनियां वाहनों-इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निर्यात में लगातार आगे बढ़ रही हैं। कृषि प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात में रिकॉर्ड स्तर की बढ़ोतरी हो रही है। इससे देश के किसानों से लेकर व्यापारियों तक को लाभ हुआ है। केंद्र सरकार उद्योगों को लगातार बढ़ावा दे रही है, उन्हें बैंकों के जरिए लगातार तरलता उपलब्ध कराई जा रही है, इसका असर उद्योगों पर हो रहा है।
राजीव जेटली ने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहित अनेक रेटिंग एजेंसियों के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कोरोना काल की विपरीत परिस्थितियों के बाद भी भारत नौ से 10 फीसदी तक की वृद्धि बरकरार रख सकता है। ऐसे में इस स्थिति को विश्व की आर्थिक परिस्थितियों में बुरा नहीं कहा जा सकता। संगठित क्षेत्र की नौकरियों में लगातार स्थिति बेहतर हो रही है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में स्थिति बेहतर रहेगी।