फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Budget 2024 benefits for labours union finance minister nirmala sitharaman news in hindi

Budget 2024: देश के करोड़ों मजदूरों के लिए यह है बड़ी राहत की खबर, वित्त मंत्री के फैसले से होगा यह बड़ा फायदा

Tue, 23 Jul 2024 03:26 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 23 Jul 2024 03:26 PM IST
विज्ञापन
सार
दिल्ली के नरेला स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में मजदूर के लिए काम करने वाली संस्था "हम सब" के जुगल किशोर कनौजिया बताते हैं कि यहां पर भी काम करने वाले हजारों मजदूर आसपास के इलाके में किराये पर कमरा लेते हैं। उनकी संस्था की ओर से किए गए सालाना सर्वे में इस बात की पुष्टि हुई है कि एक कमरे में तीन से पांच लोग रहते हैं।
loader
Budget 2024 benefits for labours union finance minister nirmala sitharaman news in hindi
बजट 2024 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को पेश किए गए अपने बजट में देश के लाखों संगठित और असंगठित कामगारों के लिए किराए के घर की महत्वपूर्ण योजना की घोषणा की। इस योजना के तहत इन कामगारों को अब किराए के तौर पर ज्यादा खर्च नहीं करना होगा। अभी तक देश के अलग-अलग संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को अपने-अपने इंडस्ट्रियल एरिया समेत अन्य काम करने वाली जगह के आसपास किराये पर घर लेना पड़ता था। लेकिन नई योजना के तहत अब पीपीपी मोड पर ऐसे घर और डॉरमेट्री विकसित किए जाएंगे, जिसमें इन कामगारों को बहुत कम कीमत पर रहने की सुविधा उपलब्ध होगी। ऑल इंडिया वर्कर एसोसिएशन और इंडियन ट्रेड फॉर एंप्लाई यूनियन का कहना है कि इस योजना से देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले मजदूरों को बहुत फायदा देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले मजदूरों को बहुत वित्तीय फायदा होने वाला है।



केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने औद्योगिक कामगारों के लिए उनके ही इलाके में पीपीपी मोड पर डॉरमेट्री और किराये के मकान की सुविधा दिए जाने की घोषणा की है। इस सुविधा को लेकर ऑल इंडिया वर्कर एसोसिएशन के शांति स्वरूप मिश्रा कहते हैं कि इस योजना को जितनी जल्दी जमीन पर बड़े स्तर पर उतारा जाएगा, उसका उतना ज्यादा कामगारों को फायदा मिलेगा। मिश्रा के मुताबिक दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब समेत देश के अलग-अलग राज्यों में बने बड़े इंडस्ट्रियल हब में लाखों मजदूर काम करते हैं। अपना गृह राज्य छोड़कर जब यह मजदूर इन राज्यों में काम करने जाते हैं, तो उनको मिलने वाली पगार का एक बड़ा हिस्सा घर के किराए में खर्च हो जाता है। वह बताते हैं कि ऑल इंडिया वर्कर एसोसिएशन की ओर से किए गए सर्वे के मुताबिक औसतन दो से तीन हजार रुपये एक छोटे से कमरे के लिए किराये पर देना पड़ता है। इन कर्मचारियों को मिलने वाली पगार का यह एक बड़ा हिस्सा होता है। ऐसे में मजदूरी करने आए यह कर्मचारी बचत किए जाने वाले पैसे का बड़ा हिस्सा किराये में खर्च कर देते हैं।


दिल्ली के नरेला स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में मजदूर के लिए काम करने वाली संस्था "हम सब" के जुगल किशोर कनौजिया बताते हैं कि यहां पर भी काम करने वाले हजारों मजदूर आसपास के इलाके में किराये पर कमरा लेते हैं। उनकी संस्था की ओर से किए गए सालाना सर्वे में इस बात की पुष्टि हुई है कि एक कमरे में तीन से पांच लोग रहते हैं। इसके लिए यह मजदूर डेढ़ से दो हजार रुपये प्रतिमाह खर्च करते हैं। जुगल किशोर बताते हैं कि इन लोगों के रहने वाले घरों की जब परिस्थितियों का जायजा लिया गया, तो पता चला की बहुत ही बदहाल दशाओं में रहते हैं। बावजूद इसके एक कमरे का किराया 8 से दस हजार रुपया देना पड़ता है। जुगल किशोर कहते हैं कि अगर केंद्र सरकार की योजना को जल्द से जल्द जमीन पर उतर गया, तो इन कामगारों के लिए इस योजना से एक साथ कई फायदे नजर आएंगे। इसमें पहले तो यह होगा कि रहने के लिए कम से कम व्यवस्थित घर या डॉरमेट्री मिलेगा, जो कि कम कीमत पर होगा। ऐसी दिशाओं में यह लोग अपनी मिलने वाली पगार का एक बड़ा हिस्सा बचा सकेंगे। दूसरा और महत्वपूर्ण फायदा यह होगा कि केंद्र सरकार की योजना से बनने वाले किराए के घर या डॉरमेट्री में कम से कम साफ सफाई और हाइजीन का बेहतर बंदोबस्त होगा।

नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया के मजदूर कामगार एसोसिएशन से जुड़े मुकुंद कहते हैं कि कई बार-बार लोग अपने घर परिवार के लोगों को भी अपने साथ रखते हैं। बदहाल दशाओं में रहने के चलते बीमारी पर भी अच्छा खर्च करना पड़ता है। उनका कहना है अगर केंद्र सरकार की इस योजना को जमीन पर उतारा जाता है, तो निश्चित तौर पर कम कीमत में किराये पर अच्छा घर भी मिलेगा। और गंदगी में रहने को मजबूर घरों से मुक्ति भी मिलेगी। उस वजह से बीमारियों पर खर्च होने वाले पैसे की भी बचत होगी। जुगल किशोर कनौजिया का कहना है कि वह पहले भी कुछ इंडस्ट्रियलिस्ट के साथ इस तरीके के मुद्दों पर काम कर आवासीय परिसर बनवाने की मांग करते रहे हैं। कुछ संगठित जगहों पर तो यह व्यवस्थाएं हैं लेकिन पूरे देश में असंगठित मजदूरों के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है। वह कहते हैं कि केंद्र सरकार की ओर से लागू किए जाने वाले इस प्रस्ताव से लाखों करोड़ों मजदूर को बड़ा फायदा होने वाला है।

हालांकि संगठित मजदूरों के लिए काम करने वाले संगठन इंडियन ट्रेड फॉर एंप्लाई यूनियन के स्वामित्र बनर्जी कहते हैं कि 2020 में भी इसी तरह की एक योजना की शुरुआत करने की बात की गई थी। बनर्जी कहते हैं कि योजना के तहत केंद्र सरकार में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों और छात्रों के लिए कम कीमत पर किराए के मकान उपलब्ध कराने को कहा था। शुरुआती दौर में यह कहा गया था कि 1000 से डेढ़ हजार रुपये में कम कीमत पर किराये के मकान उपलब्ध होंगे। बनर्जी कहते हैं कि शुरुआत में जानकारी यही थी कि केंद्र सरकार सरकार जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूवल मिशन और राजीव आवास योजना के खाली पड़े हजारों घरों को इस नई व्यवस्था के तहत इस्तेमाल करेगी। इसके अलावा रेंट प्रोजेक्ट के तहत पीपीपी मोड पर इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की भी बात 2020 में कही गई थी। बनर्जी कहते हैं कि उसे स्कीम का देश के असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों को कितना फायदा हुआ यह तो फिलहाल नहीं दिख रहा है। लेकिन इस बजट में जिस तरीके से इसके लिए बाकायदा फंड दिया गया है। उससे उम्मीद है कि अब इसको निश्चित तौर पर मजबूती के साथ जमीन पर उतारा जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed