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बजट 2019: पांच साल में ऐसे बदला रेलवे का स्वरूप, इतिहास बना रेल बजट

Sat, 19 Jan 2019 03:50 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Sat, 19 Jan 2019 03:50 PM IST
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budget 2019 this is how railway transformed in five years

पिछले पांच सालों के एनडीए शासनकाल में भारतीय रेलवे का स्वरूप काफी बदल गया है। जहां यात्रियों के लिए कई सारी नई सुविधाओं से लैस ट्रेनें शुरू हुईं, वहीं रेल बजट भी इतिहास बन गया। रेलवे के इतिहास में जितना बदलाव इन पांच सालों में देखने को मिला है, उतना कभी नहीं हुआ। आइये जानते हैं कि 2014 से 2019 के बीच रेलवे ने  बुलेट व टी 18 जैसी सुपरफास्ट हाई स्पीड ट्रेन के अलावा क्या कुछ नया तोहफा भारतीयों को दिया है।

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बनने लगे एयरपोर्ट जैसे रेलवे स्टेशन

इन पांच सालों में देश के अंदर एयरपोर्ट जैसे रेलवे स्टेशन बनने लगे हैं। सूरत, गांधीनगर, हबीबगंज (भोपाल) जैसे स्टेशनों का कायाकल्प शुरू हो गया है, वहीं वैष्णो देवी कटरा स्टेशन को इसी तर्ज पर बनाया गया है। इसके अलावा भी देश के अन्य रेलवे स्टेशनों को इसी तर्ज पर बनाया जाएगा। 

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एफडीआई की हुई शुरुआत

2014 के अपने पहले रेल बजट में तत्कालीन रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने अपने बजट भाषण में रेलवे में एफडीआई लाने की वकालत की थी। उसी दौरान मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणा की गई थी। बुलेट ट्रेन के लिए बहुत ज्यादा निवेश चाहिए था। इसके बाद ही सरकार को जापान से बुलेट ट्रेन नेटवर्क बनाने के लिए लोन मिल गया। 

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2015-16 में संरक्षा, विद्युतीकरण पर जोर

2015-16 के बजट में तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने जहां यात्री किरायों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया, वहीं दूसरी तरफ उनका फोकस पूरी तरह से यात्रियों की सुरक्षा, रेलवे ट्रैक की संरक्षा व विद्युतीकरण पर जोर रहा।

इसके साथ ही पुरानी पटरियों पर नई सुपरफास्ट गाड़ियां चलाने का एलान किया था। तब इसके लिए 8.5 लाख करोड़ रुपये अगले पांच सालों में निवेश करने का प्लान किया गया था। तब बजट में 52 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी। 

2016-17 में शुरू की गई नई ट्रेनें

2016-17 के बजट में 21 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 1,21,000 करोड़ रुपये की घोषणा की थी। इस दौरान प्रभु ने तीन नई ट्रेनें चलाने की घोषणा की थी। इन नई ट्रेनों को हमसफर, तेजस और उदय नाम दिया था। इसके अलावा उत्कृष्ट नाम से डबल डेकर ट्रेन को चलाने की घोषणा की थी। तेजस 130 किमी पर चलने वाले पहली थर्ड एसी ट्रेन थी, जिसमें वाई-फाई और अन्य सुविधाओं को शुरू किया गया था। 

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400 स्टेशनों पर शुरू की गई वाई-फाई सुविधा

इस दौरान 400 स्टेशनों पर गूगल के सहयोग से वाई-फाई की सुविधा देने की भी घोषणा इस दौरान की गई थी। वहीं इन स्टेशनों को पीपीपी मॉडल पर दोबारा से विकसित करने की घोषणा भी हुई थी। इस बजट में पहली बार मालभाड़ा दरों को भी कम किया गया था, जिससे रेलवे को फिर से ज्यादा कमाई हो सके। 

2017 में बंद हुई रेल बजट पेश करने की परंपरा

2017 में 92 साल से चली आ रही रेल बजट को अलग से पेश करने की परंपरा को बंद कर दिया गया। इसके बजट की आम बजट में ही घोषणा की जाने लगी। 2017-18 के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 131000 करोड़ रुपये का प्लान रखा।

वित्त मंत्री ने तब 1 लाख करोड़ का रेल संरक्षा फंड बनाने का एलान किया। इसके साथ ही 500 स्टेशनों पर दिव्यांग व वृद्ध जनों की सुविधा के लिए लिफ्ट व एस्केलेटर लगाने की घोषणा की गई थी। 

2018 में मिली ट्रेन 18 की सौगात

2018 में देश की पहली बिना इंजन की रेलगाड़ी टी18 की सौगात देशवासियों को मिली। यह भारत की सबसे तेज गति की ट्रेन है, जो शताब्दी ट्रेन की जगह चलाई जाएगी। हालांकि अभी इस ट्रेन का ट्रायल रन चल रहा है और जल्द ही इसे दिल्ली-वाराणसी सेक्शन पर शुरू कर दिया जाएगा। इस ट्रेन की अधिकतम गति 180 किमी प्रति घंटा है।

2018-19 के बजट में वित्त मंत्री ने मानव रहित रेलवे क्रांसिंग को बंद करने एवं मीटर गेज लाइन को खत्म करके ब्रॉडगेज किया जा रहा है। उस वक्त 36 हजार किमी लाइन को बदलने व 18 हजार किमी की लाइन का दोहरीकरण करने का प्लान किया गया था। इसके साथ ही कई रेलवे लाइन का विद्युतीकरण भी किया जा रहा है। 

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