अटल जी ने दिया था इंडिया शाइनिंग का नारा, देश में पहली बार शुरू किए थे यह चार बड़े काम
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक ऐसा आर्थिक दृष्टा भी माना जाता है, जिन्होंने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में कई ऐसे फैसले लिए जो आज भी चल रहे हैं। वाजपेयी जी ने अपने पूर्ववर्ती पी वी नरसिम्हा राव के आर्थिक सुधारों को जारी रखा था।
उनके निर्देश पर पहली बार गांव और शहरों की सड़कों को प्रमुखता पर रखा गया था। 2004 में जब बाजपेयी ने मनमोहन सिंह को सत्ता सौंपी तब अर्थव्यवस्था की तस्वीर बेहद खूबसूरत थी। जीडीपी ग्रोथ रेट 8 फीसदी से अधिक था, महंगाई दर 4 फीसदी से कम थी और विदेशी मुद्रा भंडार लबालब था।
पहली बार रखी थी इसकी नींव
वाजपेयी सरकार ने पहली बार गांव की सड़कों और फोरलेन हाईवे के निर्माण पर जोर दिया था। उनके दिशा-निर्देश पर ही देश के चार महानगरों को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज व गांव को शहरों से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को शुरू किया था।
शुरू हुआ था नदियों को जोड़ने का प्रोजेक्ट
अटल जी ने ही सबसे पहले देश में स्थित नदियों को एक-दूसरे से जोड़ने का प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसका मकसद था कि मानसून सीजन में एक तो बाढ़ के वक्त पानी का फ्लो डायवर्ट किया जा सके। वहीं सूखे के वक्त उन नदियों में भी 12 महीने पानी रहेगा, जो भीषण गर्मी के मौसम में पूरी तरह से सूख जाती है। इससे देश के किसी भी हिस्से में सूखा नहीं पड़ेगा।
इन कंपनियों में किया था विनिवेश
सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी निजी कंपनियों को बेचने के लिए पहली बार एक विनिवेश मंत्रालय का गठन किया था। वाजपेयी जी के कार्यकाल में देश की कई कंपनियों को निजी हाथों में सौंपा गया था। इन कंपनियों में भारत ऐल्युमिनियम कंपनी (बाल्को) और हिंदुस्तान जिंक, इंडिया पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड और विदेश संचार निगम लिमिटेड (वीएसएनएल) में विनिवेश का था। वाजपेयी के इन पहलों से भविष्य में सरकार की भूमिका तय हो गई।
सरकारी खर्चों को किया था कम
कई सरकारी विभागों में मीटिंग व सम्मलेन के नाम काफी पैसा खर्च किया जाता था। इसके साथ ही राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए राजकोषीय जवाबदेही एक्ट को बनाया था। वित्त वर्ष 2000 में जीडीपी के -0.8 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2005 में 2.3 फीसदी तक पहुंच गई।
बीएसएनएल का किया था गठन
वाजपेयी जी के पास देश में टेलिकॉम क्रांति लाने का श्रेय भी है। पहली बार उन्होंने भारत संचार निगम लिमिटेड के नाम से एक अलग कंपनी का गठन किया था, जो पूरे देश में दूरसंचार सेवाएं देगी। इसके अलावा मोबाइल कंपनियों के लिए लाइसेंस फीस को फिक्स से हटाकर रेवेन्यू के आधार पर कर दिया था।
दिया गया था शाइनिंग इंडिया का नारा
वाजपेयी जी ने आर्थिक तौर पर सुधार करने के बाद शाइनिंग इंडिया का नारा दिया था। हालांकि यह नारा 2004 के चुनावों के दौरान दिया गया था। लेकिन उस चुनाव में यह नारा लोगों को रास नहीं आया, जिसके बाद चुनावों में भाजपा को करारी हार मिली और इसके बाद 10 साल तक यूपीए की सरकार रही।