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'महाराजा' का घाटे से हाल बुरा, लेकिन फिर भी इन कारणों से बना हुआ है यात्रियों की पसंद

Mon, 22 Jul 2019 06:15 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Mon, 22 Jul 2019 06:15 PM IST
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air india is bleeding with loss than also favorite with passengers due to this reason
air india - फोटो : PTI

सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया का घाटे से बुरा हाल हो चुका है। अब सरकार ने भी कंपनी से किसी भी तरह की नियुक्ति या फिर पदोन्नति रोकने को कहा है। कंपनी पर पहले से ही 55 हजार करोड़ रुपये का बकाया चल रहा है। पाक वायु क्षेत्र बंद होने से भी कंपनी को बड़ा घाटा हुआ था। बावजूद इसके फिलहाल यात्रियों के बीच एयर इंडिया की पसंद कम नहीं हुई है। एयर इंडिया से अपना सफर पूरा करने वाले, खासतौर पर विदेश जाने वाले यात्रियों के लिए आज भी यह एयरलाइन कंपनी सबसे पसंदीदा बनी हुई है।

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सरकार ने रोकी नई नियुक्तियां 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने कंपनी को सभी तरह की नई नियुक्ति या फिर पदोन्नति करने से रोक दिया है। सरकार ने एयर इंडिया से कहा है आगामी निजीकरण को देखते हुए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जाना है। इसके तहत नियुक्तियां और पदोन्नति भी रोक दी जाएं। 

पाक वायु क्षेत्र बंद होने से नुकसान

नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि पाक हवाई क्षेत्र के बंद होने से दो जुलाई तक भारतीय विमानन कंपनियों को हुआ 548 करोड़ का घाटा हुआ। जिसमें एयर इंडिया को 491 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। कंपनी को रोजाना 13 लाख रुपये का नुकसान हो रहा था। एयर इंडिया की सहयोगी कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस को 22 लाख रुपये का नुकसान हो रहा था।

बंद की न्यूयॉर्क तक की सीधी उड़ान

मई में कंपनी ने अपनी मुंबई-न्यूयॉर्क के बीच जारी उड़ान को बंद करने का निर्णय लिया था। विमानन कंपनी ने कहा था कि उसे इस उड़ान को चलाने में लगातार घाटा हो रहा है। एयर इंडिया इस उड़ान को हफ्ते में तीन दिन संचालित करती थी। कंपनी ने दिल्ली से भी अपनी एक सीधी उड़ान सेवा को बंद करने का निर्णय लिया था। सर्दियों में कंपनी न्यूयॉर्क के लिए अपनी उड़ान को संचालित नहीं करेगी। 

पहले से है इतना घाटा 

तीन सालों के दौरान एयर इंडिया का घाटा सबसे शीर्ष पर रहा। कंपनी की नेटवर्थ माइनस में 24,893 करोड़ रुपये रही, वहीं नुकसान 53,914 करोड़ रुपये का रहा। भारी उद्योग मंत्री अरविंद गणपत सावंत ने कहा कि पीएसयू विभाग ने रिवाइवल और रिस्ट्रक्चरिंग पर जोर दिया है। सरकार अपनी तरफ से ऐसी कंपनियों में फिर से पैसा कमाने के नए तरीकों पर काम कर रही है।

मांगा 2400 करोड़ रुपये का उधार

लगातार विनिवेश की कोशिश में नाकाम एकमात्र सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया अपना खर्च चलाने को 2,400 करोड़ रुपये कर्ज लेने की तैयारी में है। राष्ट्रीय लघु बचत कोष (एनएसएसएफ) से कर्ज लेने के लिए सरकार से अनुमति मांगी है।  एनएसएसएफ से कर्ज लेना सरकार से उधारी की तरह होता है, जो वाणिज्यिक बैंकों की अपेक्षा 0.5 फीसदी सस्ता पड़ता है। रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया को तेज करने के लिए फिलहाल कंपनी की विस्तार योजनाओं को रोक दिया गया है। इस दौरान न तो कोई नया एयरक्राफ्ट लीज पर लिया जाएगा और न ही कंपनी के नेटवर्क में विस्तार पर काम होगा। हालांकि, एयर इंडिया जमीन पर खड़े अपने कुछ एयरक्राफ्ट को वापस उड़ान के लिए तैयार कर सकता है।

दोबारा से शुरू हुई विनिवेश की प्रक्रिया

सरकार ने पहले ही एयर इंडिया विनिवेश पर मंत्री समूह पुनर्गठित किया है। गृह मंत्री अमित शाह इस समूह की अगुवाई करेंगे। यह मंत्री समूह एयर इंडिया की बिक्री के तौर तरीके तय करेगा। शाह के अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य और रेल मंत्री पीयूष गोयल और नागर विमानन मंत्री हरदीप पुरी शामिल हैं। 

अपने पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने 2018 में एअर इंडिया की 76 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री और एयरलाइन के प्रबंधन नियंत्रण के लिए निवेशकों से बोलियां आमंत्रित की थीं। ये प्रक्रिया विफल हो गई थी और निवेशकों ने एयर इंडिया के अधिग्रहण के लिए बोलियां नहीं दी थीं। जिसके बाद सौदे को नियुक्त सलाहकार ईवाई ने इस बारे में रिपोर्ट तैयार की थी कि बिक्री की प्रक्रिया क्यों विफल रही। 

ईवाई ने अपनी रिपोर्ट में इसकी कुछ वजहें बताई थीं। जैसे सरकार द्वारा 24 फीसदी हिस्सेदारी अपने पास रखना, ऊंचा कर्ज, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विनियम दरों में उतार-चढ़ाव, वृहद वातावरण में बदलाव तथा लोगों के बोली लगाने पर अंकुश आदि। 

तेल कंपनियां दे चुकी हैं ईंधन सप्लाई रोकने की कई बार धमकी

एयर इंडिया पर पेट्रोलियम कंपनियों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) समेत अन्य का काफी पैसा बकाया है। तेल कंपनी को रोजाना 15 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। अक्टूबर के बाद से एयर इंडिया के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के भी पैसे नहीं होंगे। 

सरकार ने एयर इंडिया को सात हजार करोड़ रुपये की सॉवरन गारंटी दी थी, जिसमें से कंपनी के पास अब सिर्फ 2,500 करोड़ रुपये ही बचे हैं। इस राशि का इस्तेमाल वह जल्द कर लेगी। 2,500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी तेल कंपनियों और हवाईअड्डों के संचालकों सहित विक्रेताओं का बकाया चुकाने और कुछ महीनों के लिए वेतन का भुगतान करने के लिए करेगी। 

प्रति माह वेतन पर खर्च होते हैं 300 करोड़ रुपये 

बता दें कि एयर इंडिया को एक महीने में 300 करोड़ रुपये कर्मचारियों को वेतन के रूप में देने होते हैं। इतना ही नहीं, मई माह में भी एयर इंडिया के कर्मचारियों को वेतन 10 दिनों की देरी से मिला था। 

कंपनी को करना है 9,000 करोड़ रुपये के कर्ज का भुगतान

दरअसल इस वित्त वर्ष एयर इंडिया 9,000 करोड़ रुपये के कर्ज का भुगतान करने पर काम कर रही है। इसके लिए कंपनी ने सरकार से मदद मांगी है। हालांकि उसके स्वीकार होने की संभावना कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार इस कंपनी में 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है।

यात्रियों की इसलिए है पसंद

भारत आने और जाने वाले यात्रियों की पहली पसंद एयर इंडिया होती है, यानी यह अधिकांश यात्रियों को लेकर उड़ान भरती है। यात्रियों को इसमें उनके पसंद के हिसाब से भोजन मिलता है। इसके अलावा केबिन क्रू से भी बात करने में समस्या नहीं आती है, क्योंकि वो हिंदी और अंग्रेजी में बात करने के पूरी तरह से पारंगत होते हैं। 

निवेशकों को मिलेंगे यह फायदे

अगर कोई निवेशक इस विमानन कंपनी को खरीदता है तो उसे बना बनाया बाजार मिलेगा। साथ ही उसे घरेलू स्तर पर उड़ान के लिए जरूरतों की पूर्ति भी आसानी से पूरी हो जाएगी। 118 एयरक्राफ्ट के साथ एयर इंडिया का बेड़ा इंडिगो के बाद दूसरे नंबर पर है। एयर इंडिया निवेशकों को मौका दे रही है कि वो इसे दुनिया के सबसे बड़े बाजार के रुप में विस्तार दे पाए।

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