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Amit Shah: कृषि व संबद्ध क्षेत्रों का GDP में अंशदान बढ़ाने में FPO की भूमिका अहम, सहकारिता मंत्री ने ये कहा

Fri, 14 Jul 2023 06:51 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 14 Jul 2023 06:51 PM IST
सार

Amit Shah: शाह ने एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक प्रौद्योगिकी और विपणन पद्धतियों को अपनाने से कृषि एक लाभदायक उद्यम बन सकता है। इस लक्ष्य को हासिल करने में प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पैक्स) और एफपीओ मददगार बन सकते हैं।

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Agri & allied sector contribution to GDP can further rise by strengthening marketing; FPOs are key: Shah
अमित शाह। - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश में किसान उत्पादक संगठनों और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) की भूमिका को अर्थव्यवस्था के लिहाज महत्वपूर्ण बताया है। इस दौरान उन्होंने एफपीओ को पैक्स समितियों के साथ 'हाइब्रिड मॉडल' में काम करने का भी सुझाव दिया। शुक्रवार को केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री ने कहा कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों का योगदान विपणन गतिविधियों को मजबूती देकर बढ़ाया जा सकता है और इसमें किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की अहम भूमिका होगी।

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शाह ने एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक प्रौद्योगिकी और विपणन पद्धतियों को अपनाने से कृषि एक लाभदायक उद्यम बन सकता है। इस लक्ष्य को हासिल करने में प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पैक्स) और एफपीओ मददगार बन सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि पैक्स सहकारी समितियों की तरफ से गठित एफपीओ व्यक्तियों, कंपनियों एवं साझेदारियों में बने एफपीओ की तुलना में किसानों को लाभ पहुंचाने में अधिक सक्षम हैं। शाह ने पहले से सक्रिय एफपीओ को पैक्स समितियों के साथ 'हाइब्रिड मॉडल' में काम करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पहले से गठित करीब 11,770 एफपीओ सहकारी समिति के सदस्यों को सेवाएं देने का करार कर खुद को पैक्स समितियों से जोड़ सकती हैं। ऐसा होने पर 65,000 से अधिक पैक्स समितियां एफपीओ के तौर पर काम कर सकती हैं।
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सहकारिता मंत्री ने कहा कि कृषि, पशुपालन एवं मत्स्यपालन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इन क्षेत्रों में वृद्धि होने से न केवल देश की जीडीपी बढ़ेगी बल्कि नए रोजगार अवसर भी सृजित होंगे।उन्होंने कहा कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र देश की जीडीपी में 17.5-18 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं जो अन्य क्षेत्रों से अधिक है। लेकिन सेवा क्षेत्रों में कार्यरत लोगों की तुलना में किसानों की हालत उतनी अच्छी नहीं है।

शाह ने कहा, "किसानों के आजीविका स्तर को सुधारकर सेवा क्षेत्र में कार्यरत लोगों की तरह बनाने के लिए हमें एफपीओ को स्वीकार करने की जरूरत है।" सरकार ने वर्ष 2027-28 तक कृषि मंत्रालय के तहत 10,000 नए एफपीओ गठित करने का लक्ष्य रखा है। एफपीओ छोटे किसानों को खेती में बीज से लेकर प्रसंस्करण एवं विपणन जैसे सभी क्षेत्रों में मदद मुहैया कराते हैं।


उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के नौ वर्षों के कार्यकाल में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। शाह ने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में कृषि क्षेत्र के लिए 1.15 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में यह 22,000 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि सरकार ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में खासी बढ़ोतरी की है और कृषि उपज की खरीद व्यवस्था को भी सशक्त किया है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और सहकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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