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गेहूं के दाम 5% से ज्यादा बढ़े: पांच साल के उच्चतम स्तर पर सरकारी स्टॉक; फिर भी क्यों बढ़े भाव?

Fri, 16 Oct 2026 07:29 AM IST
निर्मल कांत बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 16 Oct 2026 07:29 AM IST
सार

भारत में गेहूं के निर्यात पर रोक हटने के बाद करीब डेढ़ महीने में कीमतें 5.24% बढ़ गई हैं। इससे आटा, मैदा, सूजी और ब्रेड महंगे होने की आशंका है। सरकारी गोदामों में गेहूं का स्टॉक पांच साल के उच्चतम स्तर पर है, फिर भी दाम क्यों बढ़ रहे हैं? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

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Wheat Prices Rise 5 Percent India Export Ban Lifted Flour Price Hike
गेहूं - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

भारत सरकार की ओर से 24 अगस्त को गेहूं और इसके उत्पादों (जैसे आटा, मैदा और सूजी) के निर्यात पर चार साल से जारी प्रतिबंध हटाए जाने के बाद गेहूं की कीमतों में 150 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। वैश्विक स्तर पर गेहूं की कीमतें तीन साल के उच्चतम स्तर के करीब चल रही हैं। 24 अगस्त को नई दिल्ली में गेहूं का दाम 2879 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 14 अक्तूबर को बढ़कर 3030 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। इस दौरान दिल्ली में गेहूं की कीमत में 151 रुपये प्रति क्विंटल या 5.24 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है।
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गेहूं की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर खुदरा बाजार में आटा, मैदा, सूजी और बिस्कुट-ब्रेड जैसे बेकरी उत्पादों की कीमतों पर पड़ेगा। इससे आम परिवारों के मासिक बजट पर थोड़ा अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। राहत की बात यह है कि सरकार के पास पर्याप्त खाद्य भंडार मौजूद है। यदि आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ती हैं, तो सरकार बाजार में हस्तक्षेप कर सकती है और दाम नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त गेहूं खुले बाजार में बेच सकती है।  
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1.5 महीने में 5% से ज्यादा बढ़े दाम 
मंडी  24 अगस्त   14 अक्तूबर
नई दिल्ली  2879   3030
कानपुर       2700  2740
राजकोट       2700       2875
कोटा  2725  2740
इंदौर       2725   2812 

भावः रुपये प्रति क्विंटल में
स्रोत: एनसीडीईएक्स 

5 साल का उच्चतम स्टॉकः भारतीय खाद्य निगम के आंकड़ों से पता चलता है कि एक सितंबर तक गेहूं का स्टॉक 479 लाख टन के 5 साल के उच्चतम स्तर पर है। पिछले वर्ष समान अवधि में यह 332.97 लाख टन था।  

बुआई पिछड़ने की आशंका, स्टॉक को लेकर बढ़ी सतर्कता
पृथ्वी फिनमार्ट के डायरेक्टर और कमोडिटी रिसर्च हेड मनोज कुमार जैन के मुताबिक, मौसम और अल-नीनो की आशंका के चलते इस बात की चर्चा है कि आगामी रबी सीजन में गेहूं की बुआई पिछड़ सकती है या उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसी डर से बाजार में स्टॉक को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। इसके अलावा त्योहारी सीजन की शुरुआत और आने वाले शादियों के सीजन के चलते उपभोक्ता मांग और मिलर्स की खरीदारी भी तेजी हुई है, जिससे कीमतों को समर्थन मिल रहा है।
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