फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Bonus ›   no cost emi vs one time payment when is it beneficial

नो-कॉस्ट ईएमआई का ऑफर: कब है खरीदारी में समझदारी? पहले समझ लें ये गणित

Mon, 19 Oct 2026 04:26 AM IST
निर्मल कांत बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 19 Oct 2026 04:26 AM IST
सार

त्योहारी सीजन में नो-कॉस्ट ईएमआई के सहारे खरीदारी बढ़ रही है, लेकिन क्या ब्याज-मुक्त किस्तों का ऑफर वाकई आपकी जेब के लिए फायदेमंद है? प्रोसेसिंग फीस, छूट का नुकसान और छिपे शुल्क खरीदारी की लागत बढ़ा सकते हैं। ऐसे में कब ईएमआई चुनना समझदारी है और कब एकमुश्त भुगतान बेहतर विकल्प बन जाता है? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

विज्ञापन
no cost emi vs one time payment when is it beneficial
नो-कॉस्ट ईएमआई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

बढ़ती महंगाई और महंगे होते कर्ज के इस दौर में भी त्योहारी उत्साह अपने चरम पर है। यूनिकॉमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दिवाली की बिक्री के पहले ही सप्ताह में ई-कॉमर्स ऑर्डर वॉल्यूम में पिछले साल के मुकाबले 31% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें मुख्य योगदान क्विक कॉमर्स और टियर-3 शहरों की जबर्दस्त मांग का है।
विज्ञापन


लोग नो-कॉस्ट ईएमआई और आसान किस्तों के सहारे जमकर खरीदारी कर रहे हैं। क्रिसिल हाई मार्क की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 तक उपभोग ऋण बकाया 118.6 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसमें सालाना आधार पर 15.3% की वृद्धि दर्ज की गई।
विज्ञापन

 
सवाल ये है कि नो-कॉस्ट ईएमआई पर खरीदारी करना कब समझदारी है?
  • इसके लिए सिर्फ ईएमआई नहीं, प्रभावी लागत की तुलना पहले करनी चाहिए।
  • अक्सर लोग जीरो इंटरेस्ट या नो-कॉस्ट देखकर बिना सोचे-समझे सामान खरीद लेते हैं। लेकिन ऑनलाइन या बाजार से खरीदारी करते वक्त असली कीमत और ईएमआई की कुल लागत में अंतर होता है। रिटेलर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स अक्सर नो-कॉस्ट ईएमआई के लिए उस डिस्काउंट को खत्म कर देते हैं जो नकद भुगतान पर मिल रहा होता है।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन

इसे उदाहरण से समझिए
मान लीजिए कोई स्मार्टफोन 60,000 रुपये का है। यदि नो-कॉस्ट ईएमआई पर 500 रुपये प्रोसेसिंग फीस (+जीएसटी) लगती है और आप नकद भुगतान पर मिलने वाला 3,000 का डिस्काउंट छोड़ देते हैं, तो फोन आपको ईएमआई पर 60,590 रुपये का पड़ेगा, जबकि नकद में वही फोन 57,000 रुपये में मिल जाता है। यानी आपको 3,590 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़े।

कीमत में जुड़ती है ब्याज की रकम
इस स्कीम का दूसरा तरीका यह होता है कि बैंक या विक्रेता ब्याज की कुल राशि को सीधे उत्पाद के दाम में जोड़ देते हैं। मान लीजिए कि कोई सामान 15,000 रुपये का है, लेकिन नो-कॉस्ट ईएमआई प्लान के तहत वह आपको 17,250 रुपये का मिलता है। यानी 2,250 रुपये का ब्याज पहले ही उसकी कीमत में शामिल कर दिया जाता है, और फिर आपकी किस्तें तय की जाती हैं।

ये भी पढ़ें: बिजनेस डायरी: मेटा के एल्गोरिदम पर सरकार सख्त, भ्रामक सामग्री को बढ़ावा न देने की सलाह

प्रोसेसिंग फीस और छुपे हुए शुल्क
भले ही विज्ञापन में ब्याज-मुक्त का दावा किया जाए, पर वास्तविकता अलग हो सकती है। लोन देने वाले संस्थान या बैंक आपसे प्रोसेसिंग फीस, उस पर जीएसटी और फाइल चार्ज वसूल सकते हैं, जिससे आपकी खरीद का खर्च बढ़ जाता है।

क्रेडिट कार्ड की लिमिट ब्लॉक
जब आप क्रेडिट कार्ड से नो-कॉस्ट ईएमआई की सुविधा लेते हैं, तो उत्पाद की पूरी कीमत आपके कार्ड की कुल क्रेडिट लिमिट में से एक साथ ब्लॉक हो जाती है। इसके चलते किसी आपातकालीन जरूरत के समय आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। 


नो-कॉस्ट ईएमआई V/s एकमुश्त भुगतान

मुख्य कारक

नो-कॉस्ट ईएमआई

एकमुश्त भुगतान

खरीद लागत

इसमें प्रोसेसिंग फीस और लागू टैक्स शामिल होते हैं।

अग्रिम छूट मिलने की संभावना होती है।

कैश फ्लो

भुगतान कई महीनों में विभाजित हो जाता है।

पूरी राशि का भुगतान तुरंत करना होता है।

आपातकालीन बचत

यह नकदी सुरक्षित रखने में मदद करता है।

उपलब्ध बचत को कम कर सकता है।

निवेश रिटर्न

बचाया गया पैसा निवेश किया जाए, तो उस पर रिटर्न मिल सकता है।

पैसा निवेश के लिए उपलब्ध नहीं रहता है।

छिपी हुई लागतें

इसमें छूटी हुई छूट, फीस और फोरक्लोजर चार्ज हो सकते हैं।

फाइनेंस से जुड़े चार्ज आमतौर पर कम या नगण्य होते हैं।

क्रेडिट प्रोफाइल

कई ईएमआई होने से उधार लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। भुगतान चूकने पर सिबिल स्कोर खराब हो सकता है।

नई ईएमआई के बोझ से बचा जा सकता है।

किसके लिए उपयुक्त

जिन्हें नकदी बनाए रखनी है और जो किस्तों का प्रबंधन आसानी से कर सकते हैं।

जिन्हें भारी छूट मिल रही है और जो आपातकालीन बचत को प्रभावित किए बिना भुगतान कर सकते हैं।


सिबिल पर पड़ सकता है असर
यह बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि नो-कॉस्ट ईएमआई भी आखिरकार एक लोन ही होती है। यदि आप किसी महीने समय पर ईएमआई चुकाने से चूक जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर आपके क्रेडिट स्कोर को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए, इस रास्ते को चुनने से पहले अपने वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान रखें। 
-प्रभात पाण्डेय
को-फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर, इंक वेल्थ 

नो-कॉस्ट ईएमआई पर खरीदारी कब सही है?

यह तब फायदेमंद हो सकता है जब:
  • जब उत्पाद की कीमत नकद और ईएमआई दोनों विकल्पों में बिल्कुल समान हो और कोई अतिरिक्त डिस्काउंट न छोड़ा जा रहा हो।
  • यदि आपके पास पर्याप्त बचत है, लेकिन आप एकमुश्त पैसा खर्च करके इमरजेंसी फंड को खतरे में नहीं डालना चाहते। ऐसी स्थिति में आप अपने पैसे को बैंक खाते या निवेश में रखकर ईएमआई चुका सकते हैं। बशर्ते, आपके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न ईएमआई के अतिरिक्त खर्च से ज्यादा हो। 

खरीदने से पहले इन बातों की करें जांच:
  • कुल देय राशि कितनी है?
  • क्या कोई प्रोसेसिंग फीस या छिपा हुआ टैक्स लग रहा है?
  • क्या ऑफर के चक्कर में बड़ा नकद डिस्काउंट तो नहीं छूट रहा?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed