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2018-19 में विलफुल डिफॉल्टर्स का बैंकों पर था 1.5 लाख करोड़ रुपये बकाया

Tue, 02 Jul 2019 07:53 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Tue, 02 Jul 2019 07:53 PM IST
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wilful defaulters in india owns around 1.5 lakh crore rupees of psu banks

भारत के तमाम सरकारी बैंकों का वित्त वर्ष 2018-19 में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का बकाया है जोकि विलफुल डिफॉल्टर्स से लेना है। इस रकम में से एक-तिहाई हिस्सा केवल भारतीय स्टेट बैंक का है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में यह जानकारी मंगलवार को दी। 

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स्टेट बैंक पर इतना कर्ज

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले स्टेट बैंक पर 46,158 करोड़ रुपये विलफुल डिफॉल्टर के तौर पर बकाया है, जो उसे ऐसे लोगों से वसूलना है। इसके बाद दूसरे नंबर पर पंजाब नेशनल बैंक है, जिसका 25090 करोड़ रुपये फंसा हुआ है। तीसरे स्थान पर बैंक ऑफ इंडिया है, जिसका 9890 करोड़ रुपया फंसा हुआ है।   

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सरकारी बैंकों का इतना ग्रॉस लोन फंसा

भारतीय रिजर्व बैंक के डाटानुसार, सरकारी बैंकों का 31 मार्च 2019 तक 63820 करोड़ रुपये का ग्रॉस लोन फंसा हुआ है। इस कारण से बैंकों का एनपीए भी कम नहीं हो रहा है। 

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तीन बड़े विलफुल डिफॉल्टर

गौरतलब है कि इस वक्त तीन बड़े विलफुल डिफॉल्टर विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी हैं, जो देश के बाहर हैं। इनको भारत लाने के प्रयास जारी हैं। हालांकि इनके अलावा और भी कई लोग हैं, जिन पर कानून का शिंकजा कसा जा चुका है। 

बैंक जारी कर सकते हैं लुकआउट नोटिस

अब केंद्र सरकार ने बैंकों को भी अपनी तरफ से ऐसे लोगों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने का आदेश जारी कर दिया है। ऐसे में कोई भी बैंक संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एलओसी जारी करने के लिए जांच एजेंसियों को लिख सकता है। 

2014-15 में थे 5349 डिफॉल्टर

2014-15 में विलफुल डिफॉल्टर की संख्या 5,349 थी, जो मार्च 2019 में बढ़कर 8,582 हो गई। इसके साथ ही 2017-18 में 7,535 और 7,079 को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया गया। यह आंकड़ा केवल सरकारी बैंकों का है। इसमें निजी बैंकों का आंकड़ा शामिल नहीं है। 

इतनी वसूली गई राशि

मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंकों के आंकड़ों के मुताबिक विगत पांच वर्षों में 7,654 करोड़ रुपये की राशि इन डिफॉल्टर से वसूल की गई। लोकसभा में कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल और श्रीरंग अप्पा बारणे के प्रश्नों के लिखित उत्तर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि 31 मार्च, 2019 तक राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा 8,121 मामलों में वूसली के लिए मुकदमे दर्ज करवाए गए हैं। 

दिसंबर 2017 में यह था आंकड़ा

तत्कालीन वित्त राज्य मंत्री राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला के मुताबिक फ्रॉड में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का तकरीबन 11 हजार करोड़ रुपया फंसा था। शुक्ला ने कहा था कि पब्लिक बैंकों की रिपोर्ट के मुताबिक 31 दिसंबर 2017 तक 2,108 एफआईआर विलफुल डिफॉल्टरों के खिलाफ दायर की थीं। वहीं 8,462 मामलों में बैंकों ने कुर्की का मामला दायर किया था।


 

6251 केस में सरफेशी एक्ट के तहत शुरू हुई कार्रवाई

सरकारी बैंकों से मिले डाटा के मुताबिक, 31 मार्च 2019 तक 8,121 मामलों में रिकवरी के लिए मुकदमे दायर किए जा चुके हैं। सिक्योर्ड एसेट्स के मामले में 6251 केस में सरफेशी एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। भारत में 17 सरकारी बैंक हैं।

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