उर्जित पटेल ने आरबीआई को किया अलविदा, निजी कारणों का दिया हवाला
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पांच राज्यों के नतीजों से पहले भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर पद से उर्जित पटेल ने अपना इस्तीफा दे दिया है। इस अप्रत्याशित कदम की वजह को लेकर को लेकर पटेल ने कहा है कि उन्होंने निजी कारणों के चलते इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि आरबीआई में अपनी सेवाएं देकर मैं खुद को सम्मानित महसूस करता हूं। पटेल आरबीआई के 24वें गवर्नर थे।
Reuters: Reserve Bank of India (RBI) Governor Urjit Patel steps down pic.twitter.com/PxXQmWCzmN
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— ANI (@ANI) December 10, 2018
Urjit Patel: Support & hard work of RBI staff, officers & management has been proximate driver of Bank’s considerable accomplishments in recent years. I take this opportunity to express gratitude to my colleagues&Directors of RBI Central Board & wish them all the best for future
— ANI (@ANI) December 10, 2018
आरबीआई की स्वायत्ता पर क्या पड़ेगा असर?
पटेल के इस कदम से आरबीआई की स्वायत्ता पर असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि सरकार के पास एक तरह से केंद्रीय बैंक का पूरा नियंत्रण चला जाएगा। जिन कारणों से उर्जित पटेल को गवर्नर पद से इस्तीफा देना पड़ा उनमें सरकार द्वारा सेक्शन 7 का इस्तेमाल करने की बात कहना और छोटे उद्योगों के लिए लोन आसान बनाना, कर्ज और फंड की समस्या से जूझ रहे 11 सरकारी बैंकों को कर्ज देने से रोकने पर राहत और शैडो लेंडर्स को ज्यादा लिक्विडिटी देना शामिल है।
आरबीआई भी सरकार के रवैये को लेकर आक्रामक है। उसका कहना है कि क्या सरकार बैंक कि स्वायत्तता को खत्म करना चाहती है। इसके लिए उसने 2010 के अर्जेंटीना के वित्तीय बाजार का भी उदाहरण दिया है।
पीएम को करनी चाहिए थी बात
Subramanian Swamy on Urjit Patel's resignation as RBI Guv: His resignation will be bad for our economy, RBI & govt. He should at least stay till July, until the next govt comes to power. PM should call him & find out the reason&dissuade him from leaving in larger public interest pic.twitter.com/HutGRuuiob
— ANI (@ANI) December 10, 2018
हाल ही में सरकार ने संकेत दिए थे कि वह पटेल का इस्तीफा नहीं चाहती है लेकिन बैंक के साथ कुछ मुद्दों का समाधान जरूरी है। मोदी समर्थकों ने साफ कर दिया है कि नीति में बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत है।
जेटली, गडकरी ने दी थी चेतावनी
जेटली ने कहा कि तेज ग्रोथ के लिए सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी जरूरी है। वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि अगर क्रेडिट पर्याप्त भी है तो सभी सेक्टर की सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। वहीं गडकरी ने कहा कि आरबीआई की सख्त लोन प्रक्रिया के कारण बैंक देश भर में चल रहे तमाम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को वित्तीय मदद नहीं दे रहे हैं।
इसके चलते करीब 2 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट अटके हुए हैं। गडकरी का कहना है कि आरबीआई लोन की प्रक्रिया को मुश्किल बना रहा है जिससे इंफ्रा के लिए पैसे की किल्लत हो रही है।
बैकिंग व्यवस्था को सही दिशा मे ले गएः मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उर्जित पटेल बहुत ही अच्छे अर्थशास्त्री हैं। उन्होंने बैंकिंग व्यवस्था को सही दिशा में ले जाने के लिए काफी अच्छा कार्य किया है। आरबीआई हमेशा उनके कार्यों को याद करेगा।
PM Modi on Urjit Patel's resignation as RBI Governor: Dr Urjit Patel is an economist of a very high calibre with a deep&insightful understanding of macro-economic issues. He steered the banking system from chaos to order. He leaves behind a great legacy. We'll miss him immensely pic.twitter.com/sWHkfZh8v3
— ANI (@ANI) December 10, 2018
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि वो उर्जित पटेल द्वारा आरबीआई गवर्नर के पद पर रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से निर्वाह किया है। मैं अपनी तरफ से दोनों को आगे के जीवन की शुभकामनाएं देता हूं।
Finance Minister Arun Jaitley: Govt acknowledges with deep sense of appreciation the services rendered by Dr Urjit Patel to this country, both in his capacity as Governor & Deputy Governor of RBI. I wish Dr Patel all the very best and many more years of public service. (File pic) pic.twitter.com/o7W5OwG9Ah
— ANI (@ANI) December 10, 2018
आरबीआई बोर्ड के सदस्य एस गुरुमूर्ति ने कहा कि उर्जित द्वारा अपने पद से इस्तीफा देने की खबर ने उनको चौंकाया है। मुझे काफी आश्चर्य हुआ क्योंकि आरबीआई की पिछली बोर्ड बैठक काफी सौहादपूर्ण माहौल में हुई थी। मीडिया ने आरबीआई और सरकार के बीच तनातनी की खबरों को गलत ढंग से दिखाया। जबकि बोर्ड बैठक में माहौल काफी अच्छा था।
RBI central board member S Gurumurthy: Surprised at news that RBI Guv resigned. Previous meeting was held in such cordial atmosphere that it comes as a shock. All directors said media had created a wrong perception while inside it was different. That makes it even more surprising
— ANI (@ANI) December 10, 2018
उर्जित पटेल के इस्तीफे पर उद्धव ठाकरे ने कसा तंज
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे पर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि कई दिनों से उर्जित पटेल के इस्तीफा की चर्चा शुरू थी जो आज सामने आ गई। उद्धव ने तंज कसा कि सरकार को अब आरबीआई गवर्नर पद के लिए नए व्यक्ति की खोज करने की बजाए सभी मशीनरी अपने हाथ में ले लेनी चाहिए।
देश को अर्थशास्त्री पीएम से बेहतर चला रहा चायवाला
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, ‘मैं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आर्थिक ज्ञान का सम्मान करता हूं, लेकिन एक चायवाला उनसे बेहतर तरीके से देश को चला रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी के विरोधी दृढ़ता और निरंकुशता का फर्क नहीं जानते हैं। मनमोहन सिंह ने दस साल में देश की अर्थव्यवस्था को दुनिया में नौवें स्थान पर पहुंचा दिया था। हम इसे छठे पायदान तक ले आए हैं।’
पटेल के इस्तीफे के बाद भारतीयों को चिंतित होना चाहिए : रघुराम
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर उर्जित पटेल के अचानक इस्तीफे की खबर आने के बाद केंद्रीय बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि उनका फैसला हैरान करने वाला है। उनका इस्तीफा सभी भारतीयों के लिए चिंतित करने वाला है।
राजन ने कहा, इस्तीफे के बाद दिए उर्जित के बयान का आदर होना चाहिए। हमें उसमें विस्तार से जाना चाहिए कि आखिर क्या गतिरोध थे, जिसके चलते उन्हें यह फैसला लेना पड़ा। मैं मानता हूं कि ये ऐसा वाकया है जिस पर सभी भारतीयों को चिंतित होना चाहिए। हमारे संस्थानों का मजबूत होना वाकई विकास और अर्थव्यवस्था के सतत विकास व इक्विटी के लिए महत्वपूर्ण है।’
रघुराम ने कहा कि पटेल ने अपने इस निर्णय से सरकार को बड़ा संदेश दिया है। पटेल ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता से समझौता नहीं किया जा सकता। उनका इस्तीफा देना उनके विरोध को दर्शाता है। राजन पहले भी रिजर्व बैंक की स्वायत्तता को लेकर बयान देते रहे हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि सरकार अगर केंद्रीय बैंक पर लचीला रुख अपनाने का दबाव बना रही है, तो उसके (रिजर्व बैंक) पास ना कहने की आजादी है।
राजन के मुताबिक, केंद्र सरकार के लिए आरबीआई कार की सीट बेल्ट की तरह है और सरकार इसकी ड्राइवर है। सरकार चाहे तो सीट बेल्ट पहने या न पहने। अगर सीट बेल्ट नहीं पहनते हैं तो दुर्घटना के घातक नतीजे हो सकते हैं।