उर्जित पटेल के बारे में 10 बातें जो शायद आप नहीं जानते होंगे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उर्जित पटेल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में 6 साल के लिए डिप्टी गवर्नर के पद पर कार्यरत रहे हैं। 28 अक्टूबर 1963 को जन्मे उर्जित ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से बीए किया है। उन्होंने आरबीआई के गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया है।
आइये जानते हैं उर्जित पटेल के बारे में दस प्रमुख बातें...
- 8 नवंबर, 2016 में उनके कार्यकाल में ही नोटबंदी का ऐलान सरकार ने किया था।
- उन्हें 7 जुलाई 2013 को आरबीआई का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया था।
- वह वर्ष 1998 से 2001 तक भारत सरकार के ऊर्जा, आर्थिक मामले विभाग में बतौर कंसल्टेंट कार्य कर चुके हैं।
- उनके पास दो दशक का ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्त क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव है।
- वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (इंटरनेशनल मोनेट्री फंड) में 1990 से 1995 तक कार्य कर चुके हैं।
- 1995 से 1997 के बीच वह आईएमएफ की तरफ से प्रतिनियुक्ति पर भारतीय रिजर्व बैंक में काम कर चुके हैं।
- साल 2000 से 2004 के बीच राज्य और केंद्र सरकारों की उच्च स्तरीय समितियों में काम कर चुके हैं।
- वित्त मंत्रालय के प्रत्यक्ष कर को लेकर बने टास्क फोर्स, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग आदि में कार्य कर चुके हैं।
- अर्जित पटेल 1990 में अर्थशास्त्र में येल युनिवर्सिटी से पीएचडी की है। 1986 में ऑक्सफोर्ड विश्व विद्यालय से एम फिल की डिग्री प्राप्त की है।
- वह वर्ष 2009 से ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के सीनियर नॉन रेजिडेंट फेलो पद पर कार्यरत हैं।
- रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिडेट के अध्यक्ष रह चुके हैं।
- मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया के नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रह चुके हैं।
इन पूर्व दिग्गज गवर्नर के चलते जनता करती है भरोसा
स्थापना
भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल, 1935 को हुई। रिजर्व बैंक का केंद्रीय कार्यालय प्रारंभ में कोलकाता में स्थपित किया गया था जिसे 1937 में स्थायी रूप से मुंबई में स्थानांतरित किया गया।
केंद्रीय कार्यालय वह कार्यालय है जहां गवर्नर बैठते हैं और जहां नीतियां निर्धारित की जाती हैं। हालांकि प्रारंभ में यह निजी स्वमित्व वाला था, 1949 में राष्ट्रीयकरण के बाद से इस पर भारत सरकार का पूर्ण स्वमित्व है।
सर जेम्स टेलर
सर जेम्स ब्रैड टेलर का भारतीय रिजर्व बैंक अध्यादेश कराने में बड़ा योगदान रहा। यह केंद्रीय बैंक के दूसरे गवर्नर बने थे। इन्होंने ही देश में चांदी के सिक्कों का चलन बंद करके करेंसी नोटों का प्रचलन शुरू कराया था। पहली बार इन्हीं के हस्ताक्षर नोट पर छपे थे।
इनके जाते थे पाकिस्तानी नोट पर हस्ताक्षर
आरबीआई के तीसरे गवर्नर सीडी देशमुख थे जो पूरी तरह से भारतीय थे। 11 अगस्त, 1943 से 30 जून, 1949 तक इस पद को संभाला था। भारत विभाजन के वक्त वे ही रिजर्व बैंक के गवर्नर थे। तब भारत और पाकिस्तान के केंद्रीय बैंकों को अलग-अलग किया गया था। हालांकि पाकिस्तान में चलने वाले नोटों पर उनके ही हस्ताक्षर जाते थे।
छोटा हुआ था नोटों का आकार
आजादी से पहले और उसके बाद भी नोटों का आकार पहले काफी बड़ा हुआ करता था। आरबीआई के सातवें गवर्नर बने पीसी भट्टाचार्य ने अपने 1 मार्च 1962 से लेकर 30 जून 1967 तक के कार्यकाल में छोटे आकार के नोटों को शुरू कराया था।
5,10 और 100 रुपये के नोट का साइज कम हुआ था। वहीं आईडीबीआई, यूटीआई और एग्रीकल्चरल रीफाइनेंस कारपोरेशन का गठन भी इनके कार्यकाल में हुआ था। आईडीबीआई दुनिया का दसवां सबसे बड़ा बैंक हैं।
14 बैंकों का हुआ था राष्ट्रीयकरण
आरबीआई के 8वें गवर्नर रहे लक्ष्मीकांत झा 1 जुलाई, 1967 से 3 मई, 1970 तक पद पर रहे थे। इन्हीं के कार्यकाल में देश के 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।