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विरल आचार्य की जगह इन चार नामों की चर्चा, रेस में सबसे आगे माइकल पात्रा
Tue, 25 Jun 2019 06:45 PM IST
paliwal पालीवाल
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: paliwal पालीवाल
Updated Tue, 25 Jun 2019 06:45 PM IST
सार
- नए डिप्टी गवर्नर की दौड़ में माइकल पात्रा सबसे आगे
- मौद्रिक नीति समिति के सदस्य व रिजर्व बैंक के मौजूदा कार्यकारी निदेशक हैं पात्रा
- 23 जुलाई से डिप्टी गवर्नर पद पर सेवाएं नहीं देंगे विरल आचार्य
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विस्तार
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर पद से विरल आचार्य के इस्तीफे के बाद सरकार ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू कर दी है। इस पद के लिए करीब आधा दर्जन नामों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन नए डिप्टी गवर्नर पद की दौड़ में आरबीआई के मौजूदा कार्यकारी निदेशक व मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य माइकल पात्रा सबसे आगे हैं।
ब्लूमबर्ग ने एक विश्लेषण रिपोर्ट में बताया है कि एमपीसी के सदस्य होने के नाते पात्रा डिप्टी गवर्नर पद के लिए पहली पसंद बन सकते हैं। दरअसल, विरल आचार्य के पास डिप्टी गवर्नर पद के साथ मौद्रिक नीति विभाग के भी प्रमुख हैं। ऐसे में उनकी जगह लेने वाले नए डिप्टी गवर्नर को आरबीआई की मौद्रिक नीति और शोध विभाग की जिम्मेदारी भी संभालनी होगी।
चयन समिति सभी आवेदनों को सूचीबद्ध करने के बाद अंतिम निर्णय के लिए सरकार के भेजेगी। परंपरागत रूप से अभी तक यह पद केंद्रीय बैंक के बाहर के किसी अर्थशास्त्री को मिलता रहा है। आचार्य से पहले उर्जित पटेल इस पद पर रहे थे। गौरतलब है कि डॉ. विरल आचार्य ने व्यक्तिगत कारणों से 23 जुलाई के बाद सेवाएं देने में असमर्थता जताते हुए पद से इस्तीफा दे दिया है।
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गवर्नर की तरह उनका भी मानना है कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नरम मौद्रिक नीति के साथ राजकोषीय स्तर पर मदद मिलता बहुत जरूरी है। फिलहाल वे अपने काम की रिपोर्ट आचार्य को करते हैं।
साजिद चिनॉय : वैश्विक निवेश सलाहकार फर्म जेपी मॉर्गन के मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री चिनॉय भी नए डिप्टी गवर्नर के आवेदकों में शामिल हो सकते हैं। चिनॉय को आरबीआई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रुपये पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण करने के लिए बनी समिति में शामिल किया था।
अजीत रानाडे : आदित्य बिड़ला समूह के मुख्य अर्थशास्त्री अजीत रानाडे भी आचार्य के उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में बताए जा रहे हैं। आरबीआई ने उन्हें घरेलू बाजार में तरलता की स्थिति और भारतीय मुद्रा पर वैश्विक कारकों के असर पर अध्ययन को बनाई समिति में शामिल किया था।
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ब्लूमबर्ग ने एक विश्लेषण रिपोर्ट में बताया है कि एमपीसी के सदस्य होने के नाते पात्रा डिप्टी गवर्नर पद के लिए पहली पसंद बन सकते हैं। दरअसल, विरल आचार्य के पास डिप्टी गवर्नर पद के साथ मौद्रिक नीति विभाग के भी प्रमुख हैं। ऐसे में उनकी जगह लेने वाले नए डिप्टी गवर्नर को आरबीआई की मौद्रिक नीति और शोध विभाग की जिम्मेदारी भी संभालनी होगी।
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चयन समिति सभी आवेदनों को सूचीबद्ध करने के बाद अंतिम निर्णय के लिए सरकार के भेजेगी। परंपरागत रूप से अभी तक यह पद केंद्रीय बैंक के बाहर के किसी अर्थशास्त्री को मिलता रहा है। आचार्य से पहले उर्जित पटेल इस पद पर रहे थे। गौरतलब है कि डॉ. विरल आचार्य ने व्यक्तिगत कारणों से 23 जुलाई के बाद सेवाएं देने में असमर्थता जताते हुए पद से इस्तीफा दे दिया है।
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गवर्नर के साथ बेहतर तालमेल
आरबीआई में 2017 से करियर शुरू करने वाले माइकल पात्रा की मौद्रिक नीति को लेकर सोच आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास से मेल खाती है। दास के दिसंबर 2018 में पद संभालने के बाद से रेपो रेट में लगातार तीन बार हुई कटौती में पात्रा ने हमेशा पक्ष में मतदान दिया है।गवर्नर की तरह उनका भी मानना है कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नरम मौद्रिक नीति के साथ राजकोषीय स्तर पर मदद मिलता बहुत जरूरी है। फिलहाल वे अपने काम की रिपोर्ट आचार्य को करते हैं।
इन पर भी हो सकता है विचार
संजीव सान्याल : वित्त मंत्रालय के प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल को भी नए डिप्टी गवर्नर की दौड़ में शामिल बताया जा रहा है। सान्याल वर्ष 2015 तक सिंगापुर में ड्यूश बैंक के वैश्विक रणनीतिकार रहे हैं। उन्होंने पिछले कुछ महीने से आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती का मुद्दा उठाया है।साजिद चिनॉय : वैश्विक निवेश सलाहकार फर्म जेपी मॉर्गन के मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री चिनॉय भी नए डिप्टी गवर्नर के आवेदकों में शामिल हो सकते हैं। चिनॉय को आरबीआई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रुपये पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण करने के लिए बनी समिति में शामिल किया था।
अजीत रानाडे : आदित्य बिड़ला समूह के मुख्य अर्थशास्त्री अजीत रानाडे भी आचार्य के उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में बताए जा रहे हैं। आरबीआई ने उन्हें घरेलू बाजार में तरलता की स्थिति और भारतीय मुद्रा पर वैश्विक कारकों के असर पर अध्ययन को बनाई समिति में शामिल किया था।