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नए साल में अप्रैल तक ब्याज दरें घटा सकता है आरबीआई
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 25 Oct 2016 08:04 AM IST
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- फोटो : Getty
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भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अगले कुछ महीने में नीतिगत दरों में आधी फीसदी और कटौती की गुंजाइश है। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफाएमएल) की रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी और अप्रैल में केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों में चौथाई-चौथाई फीसदी की कटौती कर सकता है।
बोफाएमएल के रिसर्च नोट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक 7 दिसंबर की मौद्रिक समीक्षा में यथास्थिति कायम रखेगा। वैश्विक वित्तीय सेवा क्षेत्र की कंपनी ने कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के पिछले सप्ताह आए बैठक के विवरण यानी मिनट्स के हिसाब से केंद्रीय बैंक के आगामी महीनों में नरम रुख अपनाने का संकेत मिलता है। नोट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक अप्रैल में नीतिगत दरों में चौथाई फीसदी की कटौती कर सकता है। उससे पहले वह 7 फरवरी की मौद्रिक बैठक में भी ब्याज दरों में चौथाई फीसदी की कटौती कर सकता है।
नोट में नीतिगत दरों में आधा प्रतिशत कटौती के लिए पांच वजहें गिनाई गई हैं। उसके मुताबिक, मुद्रास्फीति के नीचे आने की संभावना है। 2017 की शुरुआत में आधा प्रतिशत की कटौती से बैंकों को यह संकेत जाएगा कि उन्हें अपना कर्ज सस्ता करना है, इससे रुपये को समर्थन मिलेगा और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का प्रवाह बढ़ेगा। दिवालिया कानून तथा जीएसटी कानून से एमपीसी को यह भरोसा होगा कि सरकार सुधारों को आगे बढ़ाने को प्रतिबद्ध है।
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बोफाएमएल के रिसर्च नोट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक 7 दिसंबर की मौद्रिक समीक्षा में यथास्थिति कायम रखेगा। वैश्विक वित्तीय सेवा क्षेत्र की कंपनी ने कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के पिछले सप्ताह आए बैठक के विवरण यानी मिनट्स के हिसाब से केंद्रीय बैंक के आगामी महीनों में नरम रुख अपनाने का संकेत मिलता है। नोट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक अप्रैल में नीतिगत दरों में चौथाई फीसदी की कटौती कर सकता है। उससे पहले वह 7 फरवरी की मौद्रिक बैठक में भी ब्याज दरों में चौथाई फीसदी की कटौती कर सकता है।
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नोट में नीतिगत दरों में आधा प्रतिशत कटौती के लिए पांच वजहें गिनाई गई हैं। उसके मुताबिक, मुद्रास्फीति के नीचे आने की संभावना है। 2017 की शुरुआत में आधा प्रतिशत की कटौती से बैंकों को यह संकेत जाएगा कि उन्हें अपना कर्ज सस्ता करना है, इससे रुपये को समर्थन मिलेगा और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का प्रवाह बढ़ेगा। दिवालिया कानून तथा जीएसटी कानून से एमपीसी को यह भरोसा होगा कि सरकार सुधारों को आगे बढ़ाने को प्रतिबद्ध है।
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