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9 घंटे बाद समाप्त हुई आरबीआई की मैराथन बैठक, छोटे उद्योगों को ज्यादा कर्ज देने पर बनी सहमति

Tue, 20 Nov 2018 04:52 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 20 Nov 2018 04:52 AM IST
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rbi marathon meeting concludes after 9 hours
Reserve Bank of India - फोटो : PTI

केंद्र के साथ टकराव की खबरों के बीच नौ घंटे तक चली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बोर्ड की बैठक में वित्तीय क्षेत्र के लिए नकदी बढ़ाने और छोटे उद्योगों को ज्यादा कर्ज देने पर सहमति बनी। बैठक के बाद आरबीआई ने कहा कि केंद्रीय बैंक के निदेशक मंडल ने आरबीआई को 25 करोड़ रुपये की कुल कर्ज सुविधा के साथ छोटे व मझोले उद्योगों की संकटग्रस्त परिसंपत्तियों का पुनर्गठन करने की योजना पर विचार करने को कहा है। 

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बैठक के दौरान बोर्ड ने नकद आरक्षी अनुपात यानी सीआरएआर को 9 फीसदी रखने का फैसला लिया। हालांकि, कैपिटल कंजर्वेशन बफर के तहत 0.625 फीसदी के आखिरी चरण को लागू करने के लिए ट्रांजिशन पीरियड को एक साल बढ़ाने पर सहमति बन गई। यह अवधि 31 मार्च, 2019 तक होगी। ऐसी अटकलें भी थीं कि बैठक के दौरान आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। 
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बोर्ड की अगली बैठक 14 दिसंबर को होगी। लोकसभा चुनाव, 2019 को देखते हुए सरकार छोटे व मझोले उद्योगों को राहत देने के लिए आरबीआई से कर्ज बढ़ाने और उन्हें राहत देने की मांग कर रही थी। हालांकि, केंद्रीय बैंक अपने सख्त नियमों में ढील देने को तैयार नहीं था। इस मुद्दे पर भी सरकार और आरबीआई के बीच मतभेद उभरकर सामने आए थे। 

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अतिरिक्त पूंजी सरकार को देने पर विचार के लिए बनेगी विशेषज्ञ समिति

बैठक में फैसला हुआ कि आरबीआई के पास मौजूद अतिरिक्त पूंजी सरकार को देने पर विचार के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई जाएगी। समिति तय करेगी कि आरबीआई अपने पास कितना अतिरिक्त फंड रखेगा। समिति बैंक की आर्थिक पूंजी रूपरेखा ढांचे (ईसीएफ) की समीक्षा करेगी। इसके सदस्यों और संदर्भ शर्तों को केंद्र-आरबीआई संयुक्त रूप से तय करेंगे।

दरअसल, फिलहाल आरबीआई का बेस कैपिटल 9.69 लाख करोड़ रुपये है। कई आर्थिक विशेषज्ञ और वित्त मंत्रालय इसे 9 लाख करोड़ करने की मांग कर रहे हैं। खबरें थीं कि सरकार ने आरबीआई से इसी फंड से 3.6 करोड़ करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन बाद में इसका खंडन किया था।   

खस्ताहाल बैंकों की जांच करेगा निगरानी बोर्ड 
आरबीआई का वित्तीय निगरानी बोर्ड (बीएफएस) उन बैंकों से जुड़े मामलों की जांच करेगा, जिन्हें त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) की रूपरेखा के तहत रखा गया है। वित्तीय रूप से कमजोर 11 बैंकों के हालात का जायजा लेने पर भी सहमति बनी है। गौरतलब है कि ज्यादा एनपीए वाले बैंकों को आरबीआई ने कर्ज बांटने से रोक दिया है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने भी कुछ वर्गों का दबाव होने के बावजूद इस्तीफा देने के बजाय केंद्रीय बैंक की नीतियों का पक्ष मजबूती से रखा। एनपीए को लेकर केंद्रीय बैंक बैंक ने अपनी कड़ी नीतियों का बचाव किया।

आमने-सामने हुई चर्चा, वोटिंग की नहीं आई नौबत

बैठक में आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल और उनके चार डिप्टी ने चार नामित निदेशकों, आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग, वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार और स्वतंत्र निदेशक एस. गुरुमूर्ति के साथ विवादास्पद मुद्दों पर आमने-सामने चर्चा की और आम राय पर पहुंचे। सूत्रों का कहना है कि किसी भी मुद्दे पर वोटिंग की नौबत नहीं आई।  

आरबीआई अर्थव्यवस्था में डालेगा 8,000 करोड़
आरबीआई ने सोमवार को कहा कि वह सरकारी प्रतिभूतियां की खरीद के जरिये 22 नवंबर को अर्थव्यवस्था में 8,000 करोड़ रुपये डालेगा। इससे देश में एनबीएफसी (गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) के नकदी संकट को दूर किया जा सकेगा और कारोबारी तेजी के लिए नया कर्ज देने का काम शुरू किया जा सकेगा। 

आरबीआई और सरकार के बीच कोई टकराव नहीं : गोयल

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि सरकार और आरबीआई के बीच किसी तरह का टकराव नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के प्रति केंद्रीय बैंक की जिम्मेदारियों को लेकर आरबीआई के निदेशक मंडल के सदस्यों के बीच चर्चा होने में कुछ भी गलत नहीं है। सरकार ने आरबीआई के 9.69 लाख करोड़ के अतिरिक्त कोष से एक पैसा भी नहीं मांगा है। 

आखिर सरकार ने आरबीआई की स्वायत्तता को माना : चिदंबरम
पूर्व वित्तमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि यह जानकार कर खुशी हुई कि सरकार ने अपने कदम पीछे खींचे और आरबीआई की स्वायत्तता को स्वीकार कर लिया। विशेषज्ञ समिति द्वारा अतिरिक्त पूंजी की समीक्षा किए जाने में कोई हर्ज नहीं है। अब कम से कम मई 2019 तक यह पूंजी पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी।

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