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आरबीआई: एहतियातन नकदी रोक रहे हैं लोग, चलन में मौजूद 500 रुपये के नोटों का हिस्सा सबसे अधिक
Fri, 28 May 2021 01:58 PM IST
डिंपल अलावाधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Fri, 28 May 2021 01:58 PM IST
सार
आरबीआई वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया कि 2020-21 में लोगों ने एहतियातन नकदी को अपने पास रोका। 31 मार्च 2021 तक चलन में मौजूद कुल बैंक नोटों में 500 और 2,000 रुपये के नोटों का हिस्सा 85.7 फीसदी था।
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आरबीआई वार्षिक रिपोर्ट
- फोटो : pixabay
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विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया कि बीते वित्त वर्ष 2020-21 में कोरोना वायरस महामारी के बीच लोगों ने एहतियातन नकदी को अपने पास रोका। चलन में मौजूद बैंक नोटों में औसत से अधिक बढ़ोतरी देखने को मिली। बीते वित्त वर्ष में मूल्य के हिसाब से चलन में नोट 16.8 फीसदी तथा मात्रा के हिसाब से 7.2 फीसदी बढ़े। जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में यह आंकड़ा क्रमश 14.7 फीसदी और 6.6 फीसदी रहा था।
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85.7 फीसदी रहा 500 और 2,000 रुपये के नोटों का हिस्सा
रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2021 तक चलन में मौजूद कुल बैंक नोटों में 500 और 2,000 रुपये के नोटों का हिस्सा 85.7 फीसदी था। वहीं, 31 मार्च, 2020 के अंत तक यह आंकड़ा 83.4 फीसदी था।
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चलन में मौजूद 500 रुपये के नोट का हिस्सा सबसे अधिक
रिजर्व बैंक ने कहा कि अर्थव्यवस्था में नकदी की एहतियाती मांग बढ़ने के बीच उसने बैंक नोटों की बढ़ी मांग को पूरा करने का प्रयास किया। इस बात के समन्वित प्रयास किए गए कि करेंसी चेस्ट में सभी मूल्य के नोट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहें जिससे देशभर में समय पर नए नोटों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। मात्रा के हिसाब से 31 मार्च 2021 तक चलन में मौजूद नोटों में 500 रुपये के नोट का हिस्सा सबसे अधिक 31.1 फीसदी था। उसके बाद 10 रुपये के नोट का नंबर आता है। इसका हिस्सा 23.6 फीसदी था।
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चलन में मौजूद मुद्रा में नोट और सिक्के
चलन में मौजूद मुद्रा में नोट और सिक्के आते हैं। अभी रिजर्व बैंक 2, 5, 10, 20, 50, 100, 200, 500 और 2,000 रुपये के नोट जारी करता है। साथ ही केंद्रीय बैंक 50 पैसे, 1, 2, 5, 10 और 20 रुपये के सिक्के भी जारी करता है।
9.7 फीसदी कम रहे बैंक नोटों के लिए ऑर्डर
रिपोर्ट के अनुसार, 2020-21 में बैंक नोटों के लिए ऑर्डर एक साल पहले की तुलना में 9.7 फीसदी कम रहे। आपूर्ति भी एक साल पहले की तुलना में 0.3 फीसदी कम रही। रिजर्व बैंक ने अपना वित्त वर्ष पहले के जुलाई से जून से बदलकर अप्रैल- मार्च कर दिया है। वर्तमान सालाना रिपोर्ट जुलाई 2020 से मार्च 2021 की नौ माह की अवधि के लिए जारी की गई है।
नोटों की सिक्योरिटी प्रिंटिंग पर एक जुलाई 2020 से 31 मार्च 2021 के बीच 4,012.1 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो इससे पिछले वर्ष में समान अवधि के दौरान खर्च हुई रकम की तुलना में 9.11 फीसदी कम है। देश में नए नोटों की सप्लाई बनाए रखने के लिए सभी मूल्यवर्ग के बैंक नोटों का करेंसी चेस्ट में स्टॉक सुनिश्चित किया गया। एक दशक में देश में बैंक नोट की मात्रा दोगुनी हुई है। वर्ष 2009-10 में 5,654.9 करोड़ नोट चलन में थे। वर्ष 2019-20 में इनकी संख्या बढ़कर 11,597.7 करोड़ और 31 मार्च को खत्म वित्त वर्ष 2020-21 में इसका आंकड़ा बढ़कर 12,436.7 करोड़ नोट तक पहुंच गया।