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पूंजी संरक्षण कवच के आखिरी हिस्से को पूरा करने के लिए बैंकों को मिला छह माह का अतिरिक्त समय
Fri, 05 Feb 2021 03:09 PM IST
डिंपल अलावाधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Fri, 05 Feb 2021 03:09 PM IST
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बैंक
- फोटो : iStock
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को पूंजी संरक्षण कवच (सीसीबी) के नियम के तहत न्यूनतम पूंजी कोष के प्रबंध के लिए आखिरी भाग की 0.625 फीसदी पूंजी की व्यवस्था करने को छह माह का समय और दिया है। रिजर्व बैंक के गवर्ननर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति की द्वैमासिक समीक्षा बैठक के निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि बैंकों को सीसीबी के लिए आखिरी हिस्से की 0.625 फीसदी टीयर1 (शेयर) पूंजी का प्रबंध करने की समय सीमा एक अप्रैल 2021 से बढ़ा कर एक अक्तूबर 2021 कर दी गई है।
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इसलिए दी गई मोहलत
कोविड-19 से पैदा परेशानियां अभी बनी हुई है। बैंकों को इसी करण यह मोहलत दी गई है। बैंकों को विवेकपूर्ण बैंकिंग के बारे में बेसल-तीन नियमों के तहत सीसीबी के लिए 2.5 फीसदी के बराबर पूंजी का प्रावधान करने का नियम तय किया गया है। इसके लिए प्रारंभ में 31 मार्च 2021 तक का समय दिया गया था।
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2008 में लागू हुआ था नियम
यह नियम 2008 के वैश्विक बैंकिंग संकट के बाद लागू किया गया था। इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने बैंकों के लिए अपने कारोबार के परिचालन हेतु शुद्ध स्वस्थ धन के अनुपात (एनएसएफआर) की व्यवस्था लागू करने की सीमा भी आगामी पहली अप्रैल से खिसका कर 21 अक्तूबर 2021 कर दी है।
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मौद्रिक नीति समिति की थी 27वीं बैठक
छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की यह 27वीं बैठक थी। आरबीआई ने प्रमुख नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया और रेपो को चार फीसदी पर बरकरार रखा। हालांकि केंद्रीय बैंक ने नीतिगत उदार रुख को बनाए रखा है। जिसका मतलब है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर कोविड-19 संकट से प्रभावित अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए नीतिगर दर में कटौती की जा सकती है। रिवर्स रेपो दर 3.35 फीसदी पर ही रखी गई। रेपो वह दर है जिसपर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को एक दिन का उधार देता है। रिवर्स रेपो दर वह दर है जिस पर बैंक अपना जमा राशि केंद्रीय बैंक के पास रखते हैं।
गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि, 'मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दर को यथवत रखने का निर्णय किया। साथ ही नरम रुख को बरकरार रखने का फैसला किया।' यह लगातार चौथी बार है जब एमपीसी ने नीतिगत दर को यथावत रखने का निर्णय किया है। इससे पहले 22 मई 2020 को नीतिगत दर को संशोधित किया गया था।