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PNB घोटाले से बैंकों ने लिया सबक, 3 महीने में सॉफ्टवेयर होगा दुरुस्त, ग्राहकों को किया आश्वस्त

Thu, 15 Mar 2018 05:45 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 15 Mar 2018 05:45 PM IST
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psu banks system to be upgraded in next three months
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पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के पिछले महीने उजागर हुए लेटर ऑफ अंटरटेकिंग (एलओयू) घोटाले से सबक लेते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों ने अगले तीन महीने में अपने सिस्टम को दुरुस्त करने का संकल्प जताया है। इसके साथ ही, बैंकों ने ग्राहकों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि पीएनबी की एक शाखा को छोड़कर कहीं भी एलओयू जारी करने में कोई घोटाला नहीं हुआ और सब जगह काम सही चल रहा है।

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चेक होंगे एलओयू के सभी रिकॉर्ड
बीते 12 से 14 मार्च को गुरुग्राम स्थित भारतीय स्टेट बैंक एकेडमी में सभी सरकारी बैंकों के कार्यकारी निदेशकों, चीफ रिस्क ऑफिसरों एवं चीफ टेक्निकल आफिसरों की हुई कार्यशाला में एक कार्यसूची बनाई गई है, जिसे अगले तीन महीने में अमल में लाया जाएगा। 
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बृहस्पतिवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के उप प्रबंध निदेशक एवं चीफ रिस्क ऑफिसर एमएस शास्त्री ने बताया कि पिछले कुछ सप्ताह के दौरान सभी बैंक की शाखाओं में एलओयू से संबंधित रिकार्ड चेक किए गए। 
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SWIFT को सीबीएस से जाएगा जोड़ा
इस बारे में जो घोटाला सामने आ चुका है, उसके अलावा कहीं भी कोई खामी नहीं पाई गई। पहले हुई गलती से सबक लेते हुए अब बैंकों ने तय किया है कि 30 अप्रैल, 2018 तक देश सभी बैंकों में स्विफ्ट सिस्टम को कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) से जोड़ दिया जाएगा।

यह भी तय हुआ कि स्विफ्ट और कोर बैंकिंग सिस्टम के पासवर्ड को अलग किया जाएगा, ताकि एक ही व्यक्ति इस तरह की धांधली नहीं कर सके। उन्होंने बताया कि अब स्विफ्ट पर संदेश सुबह नौ बजे से रात के आठ बजे तक ही भेजे जा सकेंगे। पूरी दुनिया में इसी तरह इसे नियंत्रित किया जाता है।

सभी बैंकों में बनेगा सी-सोक

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शास्त्री ने बताया कि अब सभी बैंकों में साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (सी-सोक) बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे साइबर हमलों या इंटरनेट के जरिये तंत्र में सेंध लगाने की घटना पर तो बेहतर तरीके से लगाम लगाया ही जा सकेगा, साथ ही आंतरिक सुरक्षा तंत्र भी मजबूत होगा। यही नहीं, कहीं कोई अनहोनी हो भी जाती है, तो इसके लिए साइबर इंश्योरेंस लिया जाएगा, जिसमें क्रेडिट कार्ड में होने वाली धोखाधड़ी को भी कवर किया जाएगा।

शुरू में ही मिल जाएगा सिगनल
कामकाज के दौरान कहीं कोई गलती होती है या किसी घोटाले के लिए पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है, तो अब उसका भी शीघ्र ही पता लिया जाएगा। इसके लिए अर्ली वॉर्निंग सिगनल तंत्र तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही ऋण देने की प्रक्रिया को भी दुरुस्त किया जाएगा। वैसे ग्राहक, जिनका 250 करोड़ रुपये या इससे ज्यादा का बैंक एक्सपोजर है, उनके मल्टी बैंकिंग सिस्टम को हतोत्साहित किया जाएगा।

कर्मचारियों की भी निगरानी
इसी बैठक के दौरान सभी बैंकों में कर्मचारियों की भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए नो योर इम्पलॉई (केवाईई) प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा। बैंकों का कहना है कि जब किसी कर्मचारी या अधिकारी की भर्ती होती है, उस समय तो गहन जांच की ही जाती है, लेकिन बाद में उनके कामकाज पर नजर नहीं रखा जाता है। इसी बीच कोई कर्मचारी गलत कार्य में लिप्त हो जाते हैं और बैंक को नुकसान पहुंचाते हैं। अब ऐसा नहीं हो पाएगा, क्योंकि दागी कर्मचारियों को पहचान कर उसे किनारा किया जाएगा।
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