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माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में विकास की बेहतरीन संभावनाएं, 9000 करोड़ की जरूरत होगी अगले तीन साल में
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 02 Oct 2018 05:23 PM IST
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देश के माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र को अपने विकास की योजना को मूर्त रूप देने के लिए अगले तीन वर्षों में 6,000-9,000 करोड़ रुपये की जरूरत हो सकती है। पहली तिमाही में इस क्षेत्र में 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
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क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र के लिए विकास की संभावनाएं अच्छी हैं और चालू वित्त वर्ष में उद्योग में 20-22 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशकों ने उद्योग को अपना समर्थन बरकरार रखा है। उन्होंने वित्त वर्ष 2017-18 में इस क्षेत्र में 4,061 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2016-17 में लगभग 6,570 करोड़ रुपये) इक्विटी में निवेश किए, जबकि पोर्टफोलियो साइज के आधार पर उन्होंने 87 फीसदी पूंजी क्षेत्र की 10 शीर्ष कंपनियों में निवेश की।
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इक्रा के मुताबिक, विकास की योजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए क्षेत्र को वित्त वर्ष 2020-21 तक 6,000-9,000 करोड़ रुपये की बाहरी पूंजी की जरूरत होगी।
छोटी कंपनियों को होगी परेशानी
पूंजी जुटाने में बड़ी माइक्रोफाइनेंस कंपनियों/स्मॉलफाइनेंस बैंकों के समक्ष कोई बाधा नहीं आएगी, लेकिन छोटी कंपनियों को इसके लिए संघर्ष को जारी रखना पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके परिणामस्वरूप पूंजी संरक्षण के लिए बड़े कर्जदाताओं के साझेदार के रूप में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) मॉडल के जरिये अधिक पोर्टफोलियो पैदा करने वाले छोटे एमएफआई की भागीदारी बढ़ सकती है। इसके अलावा, छोटे एमएफआई का बड़े एनबीएफसी/बैंक द्वारा अधिग्रहण के साथ उद्योग में समेकन की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
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2.25 लाख करोड़ का हुआ क्षेत्र
इक्रा ने कहा कि प्रयासों की बेहतर प्रभावशीलता, क्षेत्र को निवेशकों का लगातार समर्थन, कोष की उपलब्धता तथा माइक्रोक्रेडिट की मांग की वजह से चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र सालाना आधार पर 25 फीसदी की वृद्धि के साथ 2.25 लाख करोड़ रुपये का हो गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पहली तिमाही में एमएफआई की संपत्ति की गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया। क्षेत्र के लिए कुल जीरो+डेज पास्ट ड्यू (डीपीडी) जून 2018 में घटकर आठ फीसदी पर आ गया, जो फरवरी 2017 में अपने उच्च स्तर 23.6 फीसदी पर था।
ऋण चूक में आई गिरावट
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि पोर्टफोलियो के विकास में वृद्धि, रिट-ऑफ तथा कुछ ऋणदाताओं द्वारा बकाये के भुगतान से 90+डीपीडी जून 2018 में घटकर 7.3 फीसदी पर आ गया, जो जून 2017 में 12.2 फीसदी पर था। उद्योग की एक बड़ी कंपनी को छोड़कर बाकी कंपनियों का 90+डीपीडी जून 2018 में घटकर 2.9 फीसदी रहा, जो जून 2017 में 8.1 फीसदी पर था।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात तथा उत्तराखंड में जून 2017 में सर्वाधिक डेलिक्वेंसी (ईएमआई में चूक) दर्ज की गई थी, जो आलोच्य तिमाही में घट गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि माइक्रोफाइनेंस द्वारा किए गए सौदों की संख्या तथा कर्ज की अवधि में वृद्धि हुई है। उद्योग के आगे बढ़ने के अवसरों पर कोई असर नहीं पड़ा है, हालांकि कर्जदाताओं के कर्ज के पुनर्भुगतान की क्षमता के आकलन तथा क्रेडिट के विस्तृत विश्लेषण की जरूरत है।