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मछली पालन के नाम पर IDBI बैंक में किया गया 772 करोड़ का घोटाला, फर्जी डॉक्यूमेंट्स से लिया गया लोन

Wed, 28 Mar 2018 05:09 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 28 Mar 2018 05:09 PM IST
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loan fraud of 772 crore rupees in idbi bank in the name of fish farming
idbi bank
घोटालों के महामौसम में एक और बैंक घोटाला सामने आया है। अबकी बार यह फ्रॉड आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मछली पालन को लेकर के किया गया। आईडीबीआई बैंक में फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर 5 ब्रांचों में 772 करोड़ का लोन दे दिया गया, जिसकी भरपाई अभी तक नहीं हुई है। 
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2009-13 के बीच हुआ घोटाला
बैंक की शिकायत पर फिलहाल सीबीआई ने केस को रजिस्टर्ड कर लिया है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को दी फाइलिंग में कहा कि यह फ्रॉड लोन के माध्यम से हुए और इनमें से कुछ लोन वर्ष 2009 से 2013 के दौरान फिश फार्मिंग के लिए दिए गए थे।
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बैंक ने कहा कि फिश फार्मिंग के नाम पर कुछ लोन फर्जी डॉक्यूमेंट्स पर दिए गए थे। इनमें तालाब के पट्टे के ऐसे डॉक्यूमेंट भी शामिल थे, जिनका वास्तव में कोई अस्तित्व ही नहीं था। इसके साथ ही कोलेटरल यानी गिरवी रखी गई एसेट की वैल्यू को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया था।
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घोटाले में शामिल थे दो बैंक अधिकारी

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कंपनी ने अपने दो अधिकारियों द्वारा लोन देने में और इस प्रक्रिया में बड़ी चूक पाई। बैंक ने इन अधिकारियों में से एक को बर्खास्त कर दिया है, जबकि अन्य अधिकारी पहले ही रिटायर हो चुका है। सीबीआई ने पांच शिकायतों में से दो पर मामला दर्ज कर लिया है, जो बशीरबाग और गुंटूर की ब्रांच में हुए थे।

1700 करोड़ का म्यूचुअल फंड घोटाला
स्टॉक मार्केट रेग्यूलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने भी इसी कड़ी में एक म्यूचुअल फंड में घोटाले का भंडाफोड़ किया है। सेबी ने अपनी तहकीकात में पाया कि कुछ असेट मैनेजमेंट कंपनियों ने निवेश करने के लिए 1700 करोड़ रुपये गलत तरीके से वसूलें।

अंग्रेजी अखबार मिंट के अनुसार, सेबी की एडवायजरी कमेटी ने एसेट मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा वसूले गए शुल्क को वापस म्यूचुअल फंड स्कीम में ही लगाने की सिफारिश की थी। इस योजना के अमल में आने के बाद निवेशकों से गलत तरीके से ज्यादा शुल्क वसूला जाने लगा।

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