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मात्र 150 रुपये में मिलेगा 1 लाख रुपये का बीमा, एलआईसी लेकर आया नई पॉलिसी
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 12 Sep 2018 05:18 PM IST
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शेयर बाजार में कारोबार करने वालों को अब न्यूनतम प्रीमियम पर जीवन बीमा का कवर मिल सकेगा। इसके लिए देश की अग्रणी जीवन बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेस (सीडीएसएल) के साथ एक समझौता पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है।
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केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसे लेकर दोनों संगठनों के बीच पिछले सप्ताह ही समझौता हुआ है। इसके तहत, 18 से 59 साल की उम्र के व्यक्ति को समूह बीमा प्रदान किया जाएगा। इसमें समूह बीमा योजना के तहत इच्छुक खाताधारकों को एक लाख रुपये का कवर मिल सकेगा।
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यदि खाताधारक चाहेंगे, तो वैयक्तिक तौर पर अधिकतम पांच लाख रुपये का कवर ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि समूह बीमा योजना में एक लाख रुपये का वार्षिक प्रीमियम महज डेढ़ सौ रुपये के करीब होगा। यह बाजार में चल रहे प्रीमियम के मुकाबले काफी कम होगा। वैयक्तिक तौर पर जो पांच लाख रुपये का बीमा लिया जाएगा, उसके लिए अभी प्रीमियम तय नहीं हुआ है, लेकिन यह भी बाजार मूल्य के मुकाबले काफी कम होगा।
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सस्ता व सुविधानजक बीमा विकल्प
एलआईसी के पश्चिमी क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक विपिन आनंद के मुताबिक, यह समझौता एलआईसी और प्रतिभूति बाजार में निवेश करने वाले लाखों लोगों के बीच सस्ता और सुविधाजनक जीवन बीमा विकल्प उपलब्ध कराएगा। यह उनके संस्थान के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पहल एलआईसी के 62वें स्थापना वर्ष पर की गई है।
उनका कहना है कि दावों के निपटान के मामले में नंबर वन एलआईसी का सीडीएसएल से जो समझौता हुआ है, उससे उम्मीद है कि शेयर बाजार में निवेश करने वालों में एक विश्वास का रिश्ता कायम करने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि इस समय सीडीएसएल के पास 1.58 करोड़ डीमैट खाते हैं, जो कुल उद्योग का 48 फीसदी है।
बीमा में पिछले पायदान पर देश
भारत को दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले अंडर इंश्योर्ड (जरूरत से कम बीमा कवर लेने वाला) देश माना जाता है। भारत केे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बीमा प्रीमियम की हिस्सेदारी महज 3.9 फीसदी के करीब है, जबकि इस मामले में दुनियाभर का औसत 6.3 फीसदी है।
बीमा मूल्य के मामले में भी भारत दुनिया के अन्य देशों से काफी पीछे है। यहां के जीडीपी के मुकाबले बीमित राशि (सम एश्योर्ड) का प्रतिशत भी 55 फीसदी है, जबकि मलयेशिया में यह 160 फीसदी, जबकि कोरिया में 170 फीसदी है। अन्य देशों की भी स्थिति भारत से बेहतर है।