नोटबंदी: जनधन खातों में जमा राशि 87,000 करोड़ के पार, निकाले 3285 करोड़
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नोटबंदी के बाद बैंक खातों में काफी मात्रा में धनराशि जमा हुई। चौंकाने वाली बात यह रही कि जनधन खातों में उनकी लिमिट से ज्यादा धनराशि जमा कराई गई। मीडिया खबरों के मुताबिक एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया है कि नोटबंदी के बाद जनधन खातों में जमा राशि दोगुनी होकर 87,000 करोड़ के पार पहुंच गई है। अब कर विभाग की जनधन खातों पर नजर है। कर विभाग ऐसे खातों पर भी नजर बनाए हुए है जिनमें कम मात्रा में धनराशि जमा कराई गई है। कर विभाग के पास 4.86 लाख खातों में की गई छोटी 30,000 से 50,000 रुपये की जमा राशि के आंकड़े हैं। इन खाताें में कुल जमा 2,000 करोड़ रुपये हैं। वहीं, 15 दिन में जनधन खातों से 3285 करोड़ रुपयों की निकासी भी हुई हैं।
10 दिसंबर से 23 दिसंबर के बीच 48 लाख जनधन खातों में कुल जमा राशि 41,523 करोड़ पाई गई। नोटबंदी से पहले इन खातों में 45,637 करोड़ रुपये जमा थे। इन दोनों को मिलाकर कुल जमा राशि तकरीबन 87,160 करोड़ हो जाती है।
सरकारी निर्देशों के मुताबिक जनधन खातों में 50,000 रुपये जमा किए जा सकते हैं। लेकिन इनमें इस सीमा से कहीं ज्यादा धनराशि जमा की गई। इस पर आयकर विभाग आईटी कानून के तहत खाताधारकों पूछताछ करेगा।
'कालेधन वालों को बख्शा नहीं जाएगा'
12 दिसंबर तक 12.10 लाख करोड़ की रकम 500 और 1000 के पुराने नोटों के जरिए बैंकिंग सिस्टम में आई। बैंकिंग सिस्टम में जमा हुए पुराने नोटों की रकम देश में चल रहे कुल पुराने 15.45 लाख करोड़ की 86 फीसदी है।
बैंकों में पुराने नोट जमा कराने की तारीख निकल गई है। सरकार ने 30 दिसंबर तक बैंकों में पुराने नोट जमा कराने का निर्देश दिया था। अब केवल रिजर्व बैंक में ही 31 मार्च तक कुछ जरूरी शर्तों के साथ पुराने नोट जमा कराए जा सकते हैं।
ऐसे में उन लोगों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं, जिन्होंने कालाधन रख रखा है। पीएम मोदी ने नव वर्ष की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में भी इस बात का जिक्र किया कि कालेधन वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
15 दिन में जनधन खातों से निकाले 3285 करोड़
जनधन खाताधारकाें ने पिछले पखवाड़े 3285 करोड़ रुपये की निकासी की है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ाें के अनुसार 8 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में जनधन खातों में जमा 74,610 करोड़ रुपये के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई। उसके बाद यह नीचे आने लगी। नोटबंदी प्रक्रिया समाप्त होने से दो दिन पहले यानी 28 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में यह घटकर 71,037 करोड़ रुपये रह गई।