आधुनिक तकनीक से बीमा लेना व समझना हुआ आसान
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अभूतपूर्व बदलाव के दौर में आए दिन कारोबार के कायदे बदलने वाले नए विचार और नई तकनीक सामने आ रही हैं। इससे कारोबारी संगठनों के लिए सभी पहलुओं को एकजुट कर कारोबार के पुराने तौर-तरीकों में बदलाव लाना आसान हो गया है। कंपनियां ग्राहकों की जरूरतों को बेहतर पूरा करने के लिए निरंतर खुद को बदल रही हैं। कभी अत्यंत नियंत्रित, जटिल और अभेद्य माना गया बीमा क्षेत्र भी अब जटिल नहीं है। बीमा कंपनियां जन-जन की जरूरतों को बखूबी समझकर हर प्रकार के ग्राहकों के लिए उपयुक्त बीमा के विकल्प पेश कर रही हैं। आज बीमा के ग्राहकों के लिए सेवा का सही अनुभव लेने या निजी जरूरतें पूरी करने के लिए आकर्षक विकल्प हैं।
तकनीक से बदला बाजार
पिछले कुछ दशकों तक बीमा क्षेत्र में मैन्युअल काम होते थे और कार्य शैली ऐनालॉग पर आधारित थी। कुछ नया करने की बहुत कम गुंजाइश थी। लेकिन आज ग्राहकों की जरूरतें तेजी से बदल रही हैं। नई पीढ़ी तकनीक का बखूबी उपयोग करना जानती और पसंद करती है। इनके लिए जानकारी का मुख्य स्रोत इंटरनेट है। इससे उद्योग जगत की चाल बदल गई है और बीमा उद्योग में भी यह आधुनिकता दिखती है। आधुनिक तकनीक आने से नए प्रोडक्ट और फीचर्स लांच करने में बहुत कम समय लगता है, जिसका कारोबार को बड़ा लाभ होता है। साथ ही, बीमा कंपनियां निरंतर ग्राहकों के संपर्क में बनी रहती हैं। संभावित ग्राहकों को बहुत कम समय में सारी जानकारियां उपलब्ध करा देने से उनके पक्के ग्राहक बन जाने की दर में भी बहुत सुधार हुआ है।
सोच-समझकर निर्णय लेना सभी के हित में
तकनीक किसी बीमा उत्पाद की निर्माण प्रक्रिया को भी प्रभावित करती है। हर ग्राहक को उसके हिसाब से बीमा उत्पाद देने के लिए मूल्य निर्धारण, जोखिम एवं पूंजी प्रबंधन संबंधी कोई निर्णय (आंकड़ों के साथ) सोच-समझ कर लेना होता है। यह ग्राहकों के साथ-साथ बीमा कंपनियों के भी हित में होता है। कंप्यूटर की सीमित तकनीक की वजह से हाल तक यह काम बीमा कर्मी खुद करते थे, जिसमें समय बहुत ज्यादा लगता और सटीक निर्णय लेना कठिन होता था। लेकिन अत्याधुनिक तकनीक आने के बाद आज हमारे पास सटीक विश्लेषण के साधन हैं।
400 अरब डॉलर का होगा बीमा उद्योग
आईआरडीए के आंकड़े बताते हैं कि 2020 तक भारतीय बीमा कारोबार 350 अरब डॉलर से 400 अरब डॉलर का होगा, जो वर्तमान में केवल 60 अरब डॉलर का है। देश में स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा दोनों में तेजी आने वाली है। 2020 तक भारत के 75 करोड़ लोग किसी-न-किसी रूप में बीमित होंगे और कुल जमा-पूंजी का 35 फीसदी बीमा क्षेत्र का हिस्सा होगा। इतनी बड़ी तादाद में संभावित ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए बीमा कंपनियां मानती हैं कि तकनीक-पंसद युवा पीढ़ी के लिए बीमा उत्पाद लेना आसान बनाने के लिए इनोवेशन और डिजिटाइजेशन सफलता का मंत्र होगा। ग्राहकों के लिए चौबीस घंटे सहायता और तत्काल सेवाओं को आज बीमा कंपनियां चैटबॉट और वॉयस सर्च प्लैटफार्म की सुविधा दे रही हैं।
वेब चैट या अन्य साधनों का बढ़ रहा है चलन
ग्राहकों में बीमा कंपनी से जुड़ने के लिए वेब चैट, ई-मेल, मोबाइल एप आदि का चलन बढ़ रहा है। वे ब्रोकर या एजेंट से बात करने से बेहतर सीधे बीमा कंपनी से जुड़ने के अनुभव और संवाद की गुणवत्ता के आधार पर निर्णय लेना पसंद करते हैं। वॉयस आधारित सर्च प्लैटफॉर्म एलेक्सा ने तो बीमा उद्योग की दुनिया ही बदल दी है। आज लोग बीमा उत्पाद के बारे में जान सकते हैं और अपने लिए सही बीमा खरीद सकते हैं। वह बस वॉयस कमांड देकर किसी बीमा प्लान की जानकारी ले सकते हैं या उसकी जटिलता आसान शब्दों में समझने के साथ खरीद भी सकते हैं। ऐसी तकनीक आने से बीमा उद्योग के भारी-भरकम शब्दों को समझना आसान हो गया है। साथ ही, उपभोक्ताओं तक फटाफट बीमा उत्पाद पहुंच रहे हैं।