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#नोटबंदी: कार्रवाई के लिए आयकर विभाग के पास नहीं हैं कर्मचारी

Sat, 03 Dec 2016 12:58 AM IST
शिशिर चौरसिया/ अमर उजाला, दिल्ली
शिशिर चौरसिया/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 03 Dec 2016 12:58 AM IST
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IT Dept lacks in officials for taking action on black money hoarders
income tax department

नोटबंदी के बाद बैंकों में कालाधन जमा कराने वालों पर तुरंत कड़ी कार्रवाई शायद ही हो क्योंकि आयकर विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी है। यही नहीं, विभाग में तैनात कर्मचारी और अधिकारी पहले से काम के बोझ तले दबे हैं। ऐसे में वे नई सूचना पर कितना ध्यान दे पायेंगे, इसका जवाब ठीक-ठीक नहीं मिल पा रहा है।

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आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि नोटबंदी के बाद पुराने नोटों के रूप में सरकार द्वारा तय की गई सीमा से अधिक धनराशि बैंकों में जमा करने वालों की जानकारी मिलने लगी है। लेकिन दिक्कत यह है कि उस पर होमवर्क कर संबंधित व्यक्ति के परिसर में सर्वे करने के लिए पर्याप्त संख्या में टीम ही नहीं है। जो कुछ टीम उपलब्ध है, उसके सहारे बड़ी मछलियों के यहां पहले सर्वे किया जा रहा है।
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शेष सूचनाओं को संभाल कर रखा जा रहा है कि उस पर बाद में कार्रवाई होगी। अखिल भारतीय आयकर कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अशोक कनौजिया का कहना है कि उनके महकमे में मुखिया से लेकर निचले स्तर तक कर्मचारियों की संख्या देखी जाए तो करीब 76,000 पद स्वीकृत हैं। लेकिन अभी करीब 55,000 अधिकारी और कर्मचारी ही कार्यरत हैं। ऐसे में काम तो प्रभावित होगा ही। उनका कहना है कि कालाधन जमा करने वालों को पकड़ने की जिम्मेदारी जिस आयकर विभाग पर है, वो पहले से ही काम के बोझ से परेशान है। अभी आलम ये है कि विभाग के पास जितनी जानकारी आती है, उनमें से बमुश्किल एक या दो फीसदी मामलों की ही छानबीन हो पाती है। इनमें भी सभी मामलों को अंतिम नतीजे तक पहुंचाना मुश्किल होता है।

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बैंकों से मिलने वाली जानकारी में 100 गुना बढ़ोत्तरी

IT Dept lacks in officials for taking action on black money hoarders
income tax - फोटो : income tax

विभाग के एक अन्य अधिकारी का कहना है कि नोटबंदी के बाद खासतौर से बैंकों से मिलने वाली जानकारी 100 गुना तक बढ़ गई है। इस समय विभाग में जितने अधिकारी एवं कर्मचारी तैनात हैं, उनके बूते हर जानकारी की जांच कर पाना मुश्किल होगा।

उनका कहना है कि यहां दिल्ली में तो हर वार्ड और सर्किल में लोगों की पूरी संख्या है, लेकिन अन्य जगह फील्ड में काम करने वाले अधिकारियों की पोस्ट खाली पड़ी हैं। अभी असिस्टेंट कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर के 2,294 स्वीकृत पद हैं लेकिन इनमें से करीब 500 पद खाली पड़े हैं।

एडिशनल कमिश्नर और ज्वॉइंट कमिश्नर के 1,575 पद हैं लेकिन इनमें से 525 खाली पड़े हैं। इसी तरह आईटीओ के 5,900 पदों में से करीब 900 पद खाली हैं। कन्नोजिया का कहना है कि विभाग के पास ढांचागत संरचना की भी बेहद कमी है। छोटे शहरों में तो महज कुछ कमरों में पूरा कमिश्नरेट चल रहा है। अशोक कनौजिया ने बताया कि अभी उनके पास केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी), वित्त मंत्रालय या वित्त मंत्री से रिटायर कर्मचारियों से काम लेने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। इस तरह की खबरें सिर्फ सोशल मीडिया में ही चल रही हैं।

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