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नए साल में बैंकिंग सुधार पर रहेगा मुख्य ध्यान, सरकार करेगी 2.11 लाख करोड़ का निवेश

Thu, 28 Dec 2017 04:41 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 28 Dec 2017 04:41 PM IST
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government to focus on banking sector reforms, will infuse 2.11 lakh crore rupees
भारतीय रिजर्व बैंक

बैंकों को गैर निष्पादित परिसंत्ति (एनपीए) के दलदल से बाहर निकालने के लिए और ऋण विकास दर को 25 साल के निचले स्तर से ऊपर उठाने की कोशिश के तहत सरकार नए साल में बैंकिंग सेक्टर में सुधार के पथ पर तेजी से आगे बढ़ेगी और सरकारी बैंकों में नई पूंजी का निवेश करेगी।

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पूंजी निवेश
सरकार ने अक्तूबर में घोषणा की थी कि वह अगले दो साल में एनपीए से जूझ रहे सरकारी बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपये का पूंजी निवेश करेगी। इसमें से 1.35 लाख करोड़ रुपये रिकैपिटलाइजेशन बांड के जरिए निवेश किए जाएंगे।
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वित्तीय मंत्रालय जल्द ही इस बांड की बारीकियों और निवेश की जाने वाली रकम की घोषणा कर सकता है। सरकारी बैंकों का एनपीए जून 2017 तक बढ़कर 7.33 लाख करोड़ रुपये का हो चुका है, जो मार्च 2015 में महज 2.75 लाख करोड़ रुपये था।
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बैंकिंग सुधार
पूंजी निवेश के साथ बैंकों में कई सुधार भी करने होंगे। इनमें बैंकों के बोर्ड का सशक्तीकरण, एनपीए का समाधान और मानव संसाधन का मुद्दा शामिल है। वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने कहा कि सुधार शीर्ष प्राथमिकता है। इस दिशा में सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), वित्तीय समावेशीकरण और रोजगार सृजन पर विशेष जोड़ रहेगा।

सरकारी बैंकों का विलय

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इस साल बैंकिंग सुधार के लिए उठाए गए बड़े कदमों के तहत सरकारी बैंकों में विलय की गुंजाइश बढ़ाने के लिए कैबिनेट ने अगस्त में वैकल्पिक प्रणाली के जरिए सरकारी बैंकों के विलय को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

गत महीने वित्त और कंपनी मामलों के मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गाया, जो बैंकों की ओर से आने वाले प्रस्तावों की समीक्षा करेगी। समिति द्वारा मंजूर किए गए प्रस्तावों पर एक रिपोर्ट हर तीन महीने पर कैबिनेट को भेजा जाएगा।

एनपीए समाधान
सरकार ने इस वर्ष एनपीए समाधान की दिशा में दो अध्यादेश लाए हैं- बैंकिंग नियमन (संशोधन) अध्यादेश 2017 और दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2017। बैंकिंग नियमन (संशोधन) अध्यादेश 2017 कानून की शक्ल ले चुका है, जो आरबीआई को किसी भी बैंक को दिवाला प्रक्रिया शुरू करने और किसी भी एनपीए का समाधान करने का निर्देश देने की अनुमति देता है।

कर्ज नहीं चुकाने वाले पर सख्ती
सरकार ने गत माह एक अध्यादेश के जरिए जानबूझ कर बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने वालों और एनपीए खाताधारकों को उनके बकाए कर्ज की वसूली के लिए दिवालियापन प्रक्रिया के तहत उनकी कंपनी की होने वाली नीलामी में उन्हें बोली लगाने से रोक लगा दी। इस अध्यादेश पर हालांकि अब भी संसद की मुहर लगनी बाकी है।

सहयोगी बैंकों का एसबीआई में विलय
2017 की एक अन्य महत्वपूर्ण घटना है पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में विलय, जिससे एसबीआई संपत्ति के मामले में दुनिया के 50 सबसे बड़े बैंकों के समूह में शामिल हो गया।

इस विलय के बाद एसबीआई का कुल ग्राहक आधार 37 करोड़ हो गया। बैंकों की शाखाओं की संख्या 24,000 हो गई और देशभर में उसके करीब 59,000 एटीएम हो गए। विलय के बाद एसबीआई का कुल जमा आधार 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक और कुल ऋण आधार 18.50 लाख करोड़ रुपये का हो गया है। 

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