PNB फ्रॉडः विनोद राय के रिटायर के बाद खत्म होगा बैंक बोर्ड ब्यूरो, सरकार ने किया इशारा
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पंजाब नेशनल बैंक में हुए 114 अरब के महाघोटाले के बाद केंद्र सरकार पूर्व सीएजी विनोद राय की अगुवाई में बने बैंक बोर्ड ऑफ ब्यूरो (बीबीबी) को खत्म कर सकती है।
इसके ऊपर सरकार अगले महीने मार्च में फैसला ले सकती है।
मार्च में राय होंगे रिटायर
मार्च में विनोद राय भी बीबीबी के चेयरमैन पद से रिटायर होंगे। सरकार इसके बाद किसी और व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त करेगी, ऐसा होने की संभावना काफी मुश्किल है। बीबीबी को महाघोटाला पकड़ने में नाकाम रहने के बाद सरकार इस तरह का कदम उठा सकती है।
राय को सरकारी बैंकों में प्रबंधन स्तर के अधिकारियों में कार्यशैली विकसित करने के लिए सरकार को सलाह देने का जिम्मा सौंपा गया था। दरअसल ब्यूरो सरकारी बैंकों में कर्मचारियों की गुणवत्ता सुधारने की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाया।
पिछले हफ्ते के अंत में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने अपने जीएम (एचआर) को जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया था। उसके फौरन बाद ब्यूरो को समाप्त करने का फैसला दर्शाता है कि नीरव मोदी जैसे लोग बार-बार बैंकों में सेंध कैसे लगा जाते हैं।
राय ने किया निराश
सूत्रों ने कहा कि जिस काम के लिए राय को सरकार ने बीबीबी का चेयरमैन बनाया था, उसमें उन्होंने काफी निराश किया है। बीबीबी को पब्लिक सेक्टर बैंकों के एमडी और सीईओ को चुनने की जिम्मेदारी दी गई थी।
इसके अलावा अन्य सीनियर पदों पर भी सही लोगों को चुनने के लिए कहा गया था। वहीं उन पर सभी पीएसयू बैंकों में एचआर के द्वारा टेक्नीकल अपग्रेडेशन और स्टाफ की ट्रेनिंग को कराने के लिए कहा गया था, जिसमें वो पूरी तरह से फेल हो गए थे। माना जा रहा है कि वित्त मंत्रालय ने बोर्ड के साथ काम करने से इनकार कर दिया है।
प्रोबेशन अधिकारियों के लिए घटी ट्रेनिंग की अवधि
पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे सरकारी बैंकों ने प्रोबेशनरी अधिकारी के लिए सेवा में प्रशिक्षण की अवधि 24 महीने से घटाकर 1 वर्ष कर दी है। पीएनबी ने तो अपने ट्रेजरी और विदेशी मुद्रा परिचालन अधिकारियों को लंबे समय से रिफ्रेशर प्रशिक्षण के लिए ही नहीं भेजा है।
बैंक के एक उच्चाधिकारी ने कहा कि ऐसा नहीं है, ये अपना काम नहीं जानते हैं। लेकिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सूचना के आदान-प्रदान से बैकअप अधिकारी तैयार हो जाते हैं।