डार्विन के सिद्धांत का पालन कर रहा है वित्तीय सेक्टर, केवल मजबूत बैंक ही टिकेंगेः उदय कोटक
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जाने-माने बैंकर उदय कोटक ने कहा है कि फिलहाल देश की बैंकिंग व्यवस्था डॉर्विन के सिद्धांतों का पालन कर रही है, जिसके चलते आने वाले वक्त में केवल मजबूत बैंक ही टिकेंगे। कोटक महिंद्रा बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कोटक ने एक मीडिया समूह द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि निजी बैंकों के दिवालिया होने की कगार पर पहुंचने के बाद उनको सरकारी बैंकों में विलय कर दिया जाता है।
हर सेक्टर में खत्म हो रही हैं छोटी कंपनियां
उदय कोटक ने कहा कि हर सेक्टर में आज के समय में छोटी कंपनियां बंद होने की कगार पर खड़ी हैं। ऐसे में अपने को बंदी से बचाने के लिए वो बड़ी कंपनियों में विलय हो रही हैं। उदय कोटक ने कहा कि सरकार को फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (एफआरडीआई) पर फिर से काम करना होगा। यह बिल अब खत्म हो चुका है और सरकार को नया बिल लेकर के आना है।
बैंकों, वित्तीय कंपनियों के पास नहीं है बाहर निकलने का विकल्प
कोटक ने कहा कि किसी भी व्यक्ति या फिर कंपनी के पास बैंकिंग अथवा वित्तीय सेक्टर में आने का तो रास्ता है, लेकिन उनके पास बाहर निकलने का कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में कई बैंक जैसे कि पीएमसी, आईएलएंडएफएस, डीएचएफएल आदि पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आईएलएंडएफएस में 340 कंपनियां है जो पिछले दो दशक में बनी है। इस वजह से इसका घोटाला समझने में नए बोर्ड को काफी समय लगा है।
आईएलएंडएफएस, 24 सहायक कंपनियां और 135 अप्रत्यक्ष सहायक कंपनियां, आधे दर्जन संबंधित कंपनियों के माध्यम से संचालित होती है जिसके कारण आईएलएंडएफएस की समस्याएं हाथ से बाहर हो गई है। ये सभी समस्याएं कंपनी के लिए आंतरिक थीं।
हालांकि बाजारों को पहला संकेत जून में मिला कि शायद आईएलएंडएफएस में कुछ गड़बड़ है जब कंपनी 400 करोड़ रुपये के कुछ इंटर-कॉरपोरेट डिपॉजिट और कमर्शियल पेपर ऋण को समय पर चुकाने में असफल रही, इसके पश्चात आईएलएंडएफएस के बकाया ऋण को प्रमुख रेटिंग एजेंसियों द्वारा डिफॉल्ट कैटेगरी में डाल दिया गया।
उदय कोटक के नेतृत्व में एक नया छह सदस्यीय बोर्ड ने कंपनी के प्रभार को संभाला है। नया बोर्ड कंपनी को फिर से स्वस्थ बनाने की दिशा में कार्य करेगा और कंपनी के लांग टर्म रोड मैप को निर्धारित करेगा। इन प्रयासों से कंपनी की समस्याओं का तुरंत निवारण तो नहीं होगा परंतु इस कदम से सरकार ने बाजारों को एक सकारात्मक संदेश दिया है।