सलाह: वित्तीय जरूरत के लिए एफडी तोड़ने से बेहतर है उस पर कर्ज लेना
- जोखिम नहीं होने के कारण एफडी पर आसानी से और कम ब्याज दर पर मिलता है कर्ज
- एसबीआई समेत कई बैंक ग्राहकों को दे रहे ऑनलाइन सुविधा
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कोरोना संकट के दौरान फिक्सड डिपॉजिट (एफडी) आपकी वित्तीय जरूरतें पूरी करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यह दो तरीके से वित्तीय संकट से निकाल सकता है।
पहला... एफडी पर कर्ज ले सकते हैं। दूसरा... प्री-मैच्योर निकासी कर सकते हैं। यानी समय से पहले इसे तोड़ सकते हैं। जानकारों का मानना है कि पहले विकल्प का चुनाव ज्यादा बेहतर है। जोखिम नहीं होने के कारण एफडी पर कर्ज आसानी से और कम ब्याज दर पर मिल जाता है। एसबीआ समेत कई बैंक इसके लिए ऑनलाइन सुविधा भी मुहैया करा रहे हैं। वहीं, दूसरे विकल्प का चयन कर भी आप वित्तीय समस्या को सुलझा सकते हैं। हालांकि, प्री-मैच्योर निकासी पर न सिर्फ आपको कम ब्याज मिलता है, बल्कि जुर्माना भी देना पड़ता है।
देना होगा दो फीसदी तक ज्यादा ब्याज
पहले विकल्प के तहत कर्ज लेने पर आपको एफडी पर मिलने वाले ब्याज से 1-2 फीसदी ज्यादा ब्याज चुकाना होगा। मान लीजिए, बैंक एफडी पर 6 फीसदी ब्याज दे रही है तो आपको 7-8 फीसदी ब्याज पर आसानी से कर्ज मिल सकता है। पैसाबाजार डॉट कॉम के मुताबिक, बैंक एफडी की रकम का 85-95 फीसदी तक कर्ज दे रहे हैं। अगर आपने एक लाख रुपये का एफडी कराया है तो आपको 85,000-95,000 रुपये तक कर्ज आसानी से मिल सकता है।
समय से पहले तोड़ा तो दोहरा झटका
- मिलेगा कम ब्याज: मान लीजिए, आपने अप्रैल 2019 में 7.5 फीसदी ब्याज पर पांच वर्ष के लिए एफडी किया था। दो साल बाद एफडी तोड़ना चाहते हैं, तो बैंक दो वर्ष की एफडी पर मिलने वाले ब्याज का ही भुगतान करेंगे।
- देना होगा जुर्माना: पहले एफडी तोड़ने पर बैंक 0.5 फीसदी से 1 फीसदी तक जुर्माना वसूलते हैं। कुछ बैंक बिना जुर्माने पर भी यह सुविधा दे रहे हैं।
निवेश सलाहकार मनोज जैन बताते हैं कि एफडी 1.5 लाख की है और आपको 75,000 रुपये चाहिए तो कर्ज लेना बेहतर होगा। एफडी की रकम से ज्यादा पैसों की जरूरत है, तो प्री-मैच्यर निकासी कर सकते हैं।