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RBI वार्षिक रिपोर्ट: बैंकों में हर चुनौती से निपटने की पर्याप्त पूंजी, पहली तिमाही तक सीमित रहेगा कोविड की दूसरी लहर का असर

Thu, 27 May 2021 02:38 PM IST
‌डिंपल अलावाधी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Thu, 27 May 2021 02:38 PM IST
सार

  • आरबीआई की सालाना रिपोर्ट में दावा...पहली तिमाही तक सीमित रहेगा कोविड की दूसरी लहर का असर
  • महामारी में घटी बैंकिंग धोखाधड़ी, 25 फीसदी गिरावट आई 2020-21 में बैंकों के साथ फर्जीवाड़े में

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RBI Annual Report: RBI Growth Rate Estimates Amid Second Wave Of Coronavirus Pandemic
RBI - फोटो : पीटीआई

विस्तार

रिजर्व बैंक ने दावा किया है कि महामारी के दबाव में भी भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती बनी हुई है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए बैंकों में पर्याप्त पूंजी है। आरबीआई ने बृहस्पतिवार को जारी सालाना रिपोर्ट में कहा कि कोविड संक्रमण की दूसरी लहर असर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही तक ही सीमित रहेगा। बताया किबीते वित्त वर्ष में बैंकों के साथ धोखाधड़ी में गिरावट आई और उनकी संपत्ति की गुणवत्ता में इजाफा हुआ।

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आरबीआई ने कहा, स्ट्रेस टेस्ट से पता चला है कि बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है और वे तनाव के मौजूदा माहौल का मुकाबला कर सकते हैं। आगे भी वह बैंक की संपत्ति गुणवत्ता पर नजर रखेगा। लोन मोरेटोरियम के दौरान ब्याज पर ब्याज यानी चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने से बैंकों को नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन वे अपने बहीखातों पर दबाव का प्रबंधन करने की बेहतर स्थिति में हैं। 2020-21 में बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ फर्जीवाड़े में भी बड़ी गिरावट आई, जिससे उनकी संपत्ति गुणवत्ता में इजाफा हुआ।
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इस दौरान फर्जीवाड़े के कुल 7,363 मामले सामने आए, जबकि 2019-20 में 8,303 मामले थे। मूल्य के लिहाज से महामारी के दौरान 1.38 लाख करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ, जो इससे पहले के वित्त वर्ष में 1.83 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह संख्या के हिसाब से 15 फीसदी और मूल्य के हिसाब से 25 फीसदी कमी आई है। फर्जीवाड़े के ये सभी मामले एक लाख रुपये से ज्यादा के हैं।
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गिरती अर्थव्यवस्था और चढ़ता बाजार जोखिम का संकेत
आरबीआई ने शेयर बाजार के निवेशकों को सावधान करते हुए कहा है कि एक तरफ अर्थव्यवस्था में गिरावट आ रही है, तो दूसरी और बाजार नई ऊंचाईयां छू रहा है। यह स्थिति बड़े जोखिम का संकेत हो सकती है। कंपनियों का बाजार पूंजीकरण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, जो मौजूदा हालात के हिसाब से ओवर वैल्यूएशन को दर्शाता है। बीते वित्त वर्ष के दौरान विकास दर में 8 फीसदी गिरावट का अनुमान है, लेकिन पूंजी प्रवाह और विदेशी निवेशकों के बूते शेयर बाजार रिकॉर्ड बनाता जा रहा है। कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार में लगातार उछाल का कारण बन रहे हैं। इसके बावजूद अर्थव्यवस्था पर दबाव को देखते हुए बाजार जोखिमों को नकारा नहीं जा सकता। ऐसे में निवेशकों को बाजार में पैसे लगाते समय सावधानी बरतनी चाहिए और मुनाफे के लिए स्थिरता का इंतजार करना चाहिए।

आरबीआई की बैलेंस शीट 57 लाख करोड़, 7 फीसदी इजाफा
रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट 31 मार्च 2021 तक 7 फीसदी बढ़कर 57.08 लाख करोड़ रुपये हो गई है। एक साल पहले यह 53.55 लाख करोड़ थी। पिछले 9 महीनों यानी जून से मार्च तक में ही बैलेंस शीट 7 फीसदी बढ़ी है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसकी बैलेंस शीट में इस दौरान 3.73 लाख करोड़ की बढ़त हुई है। इजाफे का कारण विदेशी और घरेलू निवेश रहा है। विदेशी निवेश में 11.48 फीसदी और घरेलू निवेश में 13.75 फीसदी इजाफा हुआ है। इस दौरान जमाओं में 26.85 फीसदी और नोट जारी करने में 7.26 फीसदी की वृद्धि हुई है। अन्य देनदारियों में भी 43.05 फीसदी की बढ़त देखी गई है। घरेलू संपत्तियों में 26.42 फीसदी बढ़त रही। सबसे ज्यादा उछाल विदेशी मुद्रा में आया, जो कुल संपत्ति का 73.58 फीसदी पहुंच गया। इसी कारण, आरबीआई पिछले सप्ताह करीब 1 लाख करोड़ का लाभांश देने में सफल रहा।

सुधार के लिए निजी निवेश और खपत अहम
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 का प्रकोप समाप्त होने के बाद अर्थव्यवस्था में सतत सुधार के लिए निजी निवेश और खपत का बढ़ना सबसे जरूरी है। जीडीपी में इसकी कुल हिस्सेदारी 85 फीसदी के आसपास होती है। आरबीआई ने कहा, किसी भी आर्थिक संकट के बाद निवेश के मुकाबले खपत में बढ़ोतरी ही सुधार की अगुवाई करती है। इसी के जरिए रोजगार में भी तेजी लाई जा सकती है।

दूसरी लहर ने विकास दर अनुमान बदलने पर मजबूर किया
रिपोर्ट में आरबीआई के हवाले से कहा गया कि कोरोना की दूसरी लहर का असर वैसे तो पहली तिमाही पर ही ज्यादा दिखेगा और जुलाई में थोड़ा असर पड़ सकता है। इसके बावजूद महामारी ने विकास दर अनुमान को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया। ऐसा लगता है कि 2021-22 के लिए पूर्व में लगाए 10.5 फीसदी के विकास दर अनुमान को प्राप्त करना अब मुश्किल हो जाएगा और इसमें बदलाव पर विचार करना पड़ेगा। लोगों की जान जाने, रोजगार और उत्पादन को नुकसान के मामले में काफी विपरीत और लंबे समय तक असर रह सकता है। हालांकि, फार्मा क्षेत्र के आकार और गुणवत्ता को देखते हुए निश्चित रूप से इस बात की उम्मीद है कि भारत अपनी ताकत पर टिका रह सकता है और भविष्य की किसी भी लहर का मुकाबला कर सकता है।


महामारी में नोटों का चलन 16.8 फीसदी बढ़ा
आरबीआई ने कहा, महामारी के दौरान नोटों का चलन मूल्य के हिसाब से 16.8 फीसदी बढ़ा, जबकि नोटों की संख्या में 7.2 फीसदी की वृद्धि हुई है। कुल चलन में 500 और 2000 के नोटों की हिस्सेदारी 85.7 फीसदी पहुंच गई, जो एक वित्त वर्ष पहले 83.4 फीसदी थी। रिपोर्ट में बढ़ती महंगाई पर भी चिंता जताई है और कहा गया कि दाल, तेल व अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतें बढ़ने से खपत पर दबाव आएगा, जो अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।

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