खुलासे से पहले पीएमसी बैंक से निकाले गए थे करोड़ों रुपये, जांच में आया सामने
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पंजाब एवं महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक पर आरबीआई की कार्रवाई से पहले कई जमाकर्ताओं के खाते से बड़ी धनराशि की निकासी हुई है। सितंबर के तीसरे सप्ताह में व्हिसलब्लोअर की शिकायत करने के ठीक कुछ दिन पहले ही पीएमसी बैंक के कई खातों से पैसे निकाले गए, जिसके बाद 23 सितंबर को आरबीआई ने छह महीने का प्रतिबंध लगा दिया।
सूत्रों के अनुसार, रिजर्व बैंक ने अपनी शुरुआती जांच में पाया है कि कुछ निश्चित खातों से थोड़े ही समय में बड़ी धनराशि निकाली गई है। इसी कारण बैंक पर प्रतिबंध लगाना जरूरी हो गया है। आरबीआई का यह कदम इसलिए भी जरूरी था, क्योंकि बैंक के दो तिहाई खाते छोटे जमाकर्ताओं के हैं।
सूत्रों का कहना है कि पिछले महीने बैंक के बोर्ड सदस्यों में से ही किसी ने वित्तीय अनियमितता के मामले को आरबीआई के सामने उजागर कर दिया था। व्हिसलब्लोअर ने अपनी शिकायत में कहा था कि बैंक ने एनपीए हो चुके कई खातों की गलत जानकारी उपलब्ध कराई है।
उसकी कुल लोन बुक का 73 फीसदी कर्ज सिर्फ एचडीआईएल डेवलपर्स को दिया गया है। बैंक की लोन बुक में कुल 8,880 करोड़ का कर्ज बांटा गया है, जिसमें से एचडीआईएल को 6,500 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है। यह बात बैंक के निलंबित एमडी जॉय थॉमस भी स्वीकार कर चुके हैं।
इसके बाद आरबीआई ने बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के फ्रेमवर्क में डाल दिया और छह महीने तक नया कर्ज बांटने पर रोक लगा दी। साथ ही जमाकर्ताओं के लिए छह महीने में सिर्फ 10 हजार रुपये निकासी की सीमा तय कर दी।
पूरी गारंटी के बाद लिया कर्ज : एचडीआईएल
पीएमसी बैंक संकट के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे एचडीआईएल डेवलपर्स ने जमाकर्ताओं के हित में बैंक के साथ बातचीत की पेशकश की है। साथ ही सफाई दी कि बैंक को पर्याप्त गारंटी उपलब्ध कराने के बाद ही कर्ज उठाया गया था और यह सामान्य कारोबारी कर्ज की तरह ही था।
एक दिन पहले ही मुंबई पुलिस ने एचडीआईएल के पूर्व प्रबंधन और प्रवर्तकों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। एचडीआईएल के वाइस चेयरमैन व एमडी सारांग वाधवान ने कहा कि कंपनी कारोबार के लिए समय-समय पर पीएमसी सहित कई बैंकों से कर्ज लेती रही है। इसके बदले में बैंक को पर्याप्त गारंटी दी जाती है। पीएमसी ने भी आरबीआई की गाइडलाइन के तहत ही कंपनी विशेष कर्ज मुहैया कराया था।