सिंडिंकेट बैंक: तीन शाखाओं में हजार करोड़ की धोखाधड़ी,पड़े छापे
- सिंडिंकेट बैंक की तीन शाखाओं में हजार करोड़ की धोखाधड़ी
- 10 ठिकानों पर सीबीआई ने की छापेमारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सिंडिकेट बैंक में धोखाधड़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने फ्रॉड के लिए कुख्यात नटवरलाल को भी पीछे छोड़ दिया है। कथित तौर पर चार व्यापारियों ने राजस्थान के सिंडिकेट बैंक की तीन शाखाओं के पांच एक्जीक्यूटिव की सांठगांठ के जरिए 386 खाते खुलवाए। फिर जाली चेक, लेटर ऑफ क्रेडिट और एलआईसी पॉलिसियों के माध्यम से हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
इस मामले में सीबीआई ने मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर, जयपुर और उदयपुर में 10 ठिकानों पर छापेमारी की और बैंक के इन कर्मचारियों और व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में सिंडिकेट बैंक जयपुर के महाप्रबंधक सतीश कुमार गोयल, डीजीएम (क्षेत्रीय कार्यालय) संजीव कुमार, एमआई रोड शाखा के मुख्य प्रबंधक देशराज मीना, मालवीय नगर शाखा के आदर्श मनचंदा और उदयपुर के एजीएम अवधेश तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
सिंडिकेट बैंक ने इन सभी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। मालूम हो कि इस मामले की शिकायत सिंडिकेट बैंक ने ही सीबीआई के पास दर्ज करवाई थी जिसके आधार पर जांच एजेंसी ने मामला दर्ज किया। जिन लोगों के खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है उनमें उदयपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट भारत बांब, कारोबारी पियूष जैन और विनीत जैन और जयपुर के व्यापारी शंकर खंडेलवाल शामिल हैं।
ऐसे करते थे खेल
सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर यह धोखाधड़ी तमाम केवाईसी नियमों और ऑडिट को धता बताते हुए 2011 से 2016 तक जारी रही।
ये चारों व्यापारी कथित तौर पर जाली चेक जमा करवाते थे और बदले में उन्हें चेक की तुलना में कुछ कम राशि तत्काल दे दी जाती थी। उदाहरण के तौर पर 100 रुपये का चेक करवाने पर उन्हें 90 रुपये तत्काल मिल जाते थे।
सीबीआई के प्रवक्ता के अनुसार, जाली चेक 40 लाख रुपये से लेकर पांच करोड़ रुपये तक के थे। इनमें से ज्यादातर ढाई से चार करोड़ रुपये के थे। ये चारों व्यापारी कथित तौर पर जाली एलआईसी पॉलिसियों और लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत भी कर्ज उठा कर बैंक को चूना लगे रहे थे।