PNB Scam: 2017 में ही पता चल जाता मेहुल चोकसी का फ्रॉड, चकाचौंध में आ गए थे बैंक
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गीतांजलि जेम्स के मालिक मेहुल चोकसी के फ्रॉड का खुलासा शायद मई 2017 में ही हो जाता, अगर देशभर के बैंक एक गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही कर लेते।
लेकिन बैंक हीरे-जवाहरात की चमक और चोकसी के रुतबे से इतने अधिक प्रभावित हो गए थे, कि इस बात का पता चलने के बाद भी आंख पर पट्टी बांधे रहे।
बैंकों ने बाहर से तैयार कराई थी गोपनीय रिपोर्ट
देश भर के सभी बैंकों ने मई 2017 में गीतांजलि जेम्स और उसकी सहायोगी कंपनियों के मालिक मेहुल चोकसी के बारे में बाहर की कंपनी से एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार कराई थी। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कंपनी और चौकसी के कारोबार करने के तरीकों पर सवालिया निशान उठाए गए थे।
इस गोपनीय रिपोर्ट का नाम प्रोजेक्ट ज्वेल्स है और इसे कंसल्टेंसी फर्म अर्नेस्ट एंड यंग (ईवाई) ने सौंपा था। इसमें गीतांजलि जेम्स और ग्रुप कंपनियों की डीलिंग, लिस्टेड कंपनी के जरूरी रिकॉर्ड्स नहीं रखने, डूबने की आशंका वाले कर्ज के लिए पर्याप्त प्रोविजनिंग नहीं करने और बकाया रकम वसूल करने में देरी का जिक्र है।
गीतांजलि ग्रुप पर 7 हजार करोड़ का बकाया
गीतांजलि ग्रुप पर देश की 35 बैंकों का करीब 7 हजार करोड़ रुपये बकाया है। इसमें पब्लिक सेक्टर बैंकों के अलावा देश की बड़ी प्राइवेट सेक्टर बैंक भी शामिल हैं। यह बकाया पंजाब नेशनल बैंक द्वारा दिए गए लेटर ऑफ अंडरटेकिंग से प्राप्त की गई लोन की रकम के अलावा है।
पीएनबी, ICICI ने मांगा था पत्नी का नेट वर्थ
ईवाई द्वारा रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पीएनबी और आईसीआईसीआई बैंक ने मेहुल चोकसी से उनकी पत्नी प्रीति चोकसी के नेटवर्थ पूछा था। पीएनबी की मुंबई स्थित ब्राडी हाउस स्थित ब्रांच के एक सीनियर मैनेजर ने पत्र लिखकर गीतांजलि से इसके बारे में जानकारी में मांगी थी।
यह पत्र बैंक की तरफ से गीतांजलि के ज्वाइंट प्रेसीडेंट (बैंकिंग व वित्त) कपिल खंडेलवाल को भेजा गया था। प्रीति चौकसी की तरफ से बैंक में लोन लेने के लिए गारंटर थी।
2016 में दो कंपनियों पर था 2081 करोड़ का बकाया
गीतांजलि की दो सहायक कंपनियों ट्रांस एक्जिम और क्राउन ऐम जो कि एक्सपोर्ट के कारोबार में थी, उन पर 2016 में 2081 करोड़ रुपये का बकाया था। इन दोनों कंपनियों को गीतांजलि के प्रमोटर के रिश्तेदारों ने बनाया था।
गीतांजलि जेम्स ने लिया था सबसे अधिक कर्ज
गीतांजलि के कुल रिसीवेबल्स में ग्रुप रिसीवेबल की हिस्सेदारी 33 पर्सेंट है। गीतांजलि जेम्स ग्रुप की वह कंपनी है, जिसने बैंकों से सबसे अधिक कर्ज लिया है। ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी डमेस्टिक कलेक्शन के लिए इनवॉइस डेटा नहीं मेंटेन कर रही थी।
पिछले तीन साल में वह जो पैसा रिकवर नहीं कर पाई थी, उसके लिए कंपनी ने प्रोविजनिंग भी नहीं की थी। गीतांजलि जेम्स ने ईवाई के साथ कन्फर्मेशन लेटर का सैंपल शेयर नहीं किया। कंपनियां अकाउंटिंग पीरियड खत्म होने के बाद आमतौर पर इसे शेयर करती हैं।