Banking: निजी बैंकों में बढ़ी नौकरी छोड़ने की रफ्तार, दावा- हर तीन में एक फ्रंटलाइन कर्मचारी दे रहा इस्तीफा
Banking: युवा और फ्रंटलाइन कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने का चलन बढ़ा है। खबरों के मुताबिक, निजी क्षेत्र के बैंकों में एंट्री लेवल के तीन कर्मचारियों में से एक अपनी नौकरी छोड़ रहा है। निजी बैंकों में तेज विकास का खामियाजा उसके फ्रंटलाइन कर्मचारियों को उठाना पड़ता है इससे उनपर दबाव बढ़ता है।
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भारत के निजी बैंकों में नौकरी छोड़ने की दर में वृद्धि देखी जा रही है, विशेष रूप से युवा और फ्रंटलाइन कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने का चलन बढ़ा है। खबरों के मुताबिक, निजी क्षेत्र के बैंकों में एंट्री लेवल के तीन कर्मचारियों में से एक अपनी नौकरी छोड़ रहा है। भीड़-भाड़ वाले बाजार के एक बड़े हिस्से पर कब्जा करने की होड़ में बैंकों में ऋण की मजबूत मांग देखी जा रही है। पिछले वित्त वर्ष में ऋण की मांग 15% बढ़ी है और खुदरा ऋणों की मांग में वृद्धि के कारण इस वर्ष में इसमें 10-12% का इजाफा होने का अनुमान है। निजी बैंकों में तेज विकास का खामियाजा उसके फ्रंटलाइन कर्मचारियों को उठाना पड़ता है, इससे उनपर दबाव बढ़ता है। देश के सबसे बड़े निजी ऋणदाता एचडीएफसी बैंक ने पिछले साल की तुलना में कर्मचारी कारोबार की दर बढ़कर 34% हो गई, जबकि एक्सिस बैंक में यह लगभग 35% पर था। कोटक महिंद्रा बैंक में नौकरी छोड़ने वालों की संख्या बढ़कर करीब 50 फीसदी हो गई, जबकि यस बैंक में नौकरी छोड़ने की दर 43 फीसदी रही।
इंट्री लेवल कर्मियों के नौकरी छोड़ने की समस्या से पूरी बैंकिंग इंडस्ट्री जूझ रही
रिपोर्ट्स के अनुसार एक्सिस बैंक के सीईओ अमिताभ चौधरी ने बुधवार को कहा, "यह एक ऐसी समस्या है जिससे पूरा उद्योग जूझ रहा है। चौधरी ने कहा कि बैंक कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए करियर की प्रगति और प्रशिक्षण सहित विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है।" स्टाफिंग फर्म टीमलीज सर्विसेज की को-फाउंडर रितुपर्णा चक्रवर्ती ने कहा, 'फाइनैंशल सर्विसेज के मामले में एट्रिशन (नौकरी छोड़ने के चलन की स्थिति) तब होता है जब इंडस्ट्री की सर्विसेज की डिमांड ज्यादा होती है और कंपनियां प्रॉडक्टिविटी बढ़ा रही होती हैं। यस बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्रशांत कुमार ने बीते सप्ताहांत पर एक बयान में कहा, "सेल्स साइड के ज्यादातर लोग नौकरी छोड़कर जा रहे हैं, और यह रुझान पूरी बैंकिंग इंडस्ट्री में है। उन्होंने कहा कि बैंक इस स्थिति को नियंत्रित करने की दिशा में काम कर रहा है और वह नहीं चाहता कि कुल मिलाकर 25-30 प्रतिशत से अधिक नौकरी छोड़कर चले जाएं।"
अधिकतम लाभ हासिल करने की चाहत में युवा बदल रहे नौकरी
एंट्री-लेवल रिलेशनशिप मैनेजर्स की कमाई 30,000 रुपये से 35,000 रुपये होने के कारण उनके लिए स्विच करना आसान है। टीमलीज के चक्रवर्ती ने कहा कि पिछले एक साल में इस श्रेणी में सालाना पारिश्रमिक 8-10 फीसदी बढ़ा है। उन्होंने कहा, 'कर्मचारी अवसर मिलने पर नौकरी बदलकर बढ़ते बाजार में अधिकतम लाभ हासिल करने की कोशिश में नौकरी छोड़ने में हिचकिचाते नहीं हैं। लेकिन सिर्फ पैसा ही नौकरी छोड़कर जाने की दर बढ़ने का एकमात्र कारण नहीं है, बल्कि काम करने की बेहतर स्थित और काम में लचीलापन मिलने के आकर्षण में भी युवा नौकरी छोड़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में एक बैंक के हवाले से बताया गया है कि नौकरी छोड़ने के ज्यादातर मामले ज्वाइनिंग के छह महीने के भीतर होते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोटक महिंद्रा बैंक में जूनियर लेवल के कर्मचारियों ने सबसे ज्यादा नौकरियां छोड़ी।
जूनियर लेवल पर लगभग 50% कर्मी नौकरी छोड़ने में दिखा रहे दिलचस्पी
कोटक महिंद्रा बैंक की होल-टाइम डायरेक्टर शांति एकंबरम के अनुसार बैंक में सीनियर लेवल पर 10 प्रतिशत और मिड लेवल पर 20 प्रतिशत लोग नौकरी छोड़ रहे हैं, जबकि जूनियर लेवल पर 50 प्रतिशत कर्मी इस्तीफा देने लगे हैं। एकंबरम ने बैंक के तिमाही नतीजों के बाद विश्लेषकों से बातचीत में कहा, "बैंक एट्रिब्यूशन को नियंत्रित करने के लिए सहभागिता, प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी तथा स्वचालन जैसे क्षेत्रों पर काम कर रहा है।"