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चेन्नई का ज्वेलर 14 बैंकों से 824 करोड़ लेकर भाग गया मॉरीशस, CBI ने अब तक नहीं दर्ज की FIR

Thu, 22 Mar 2018 05:17 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 22 Mar 2018 05:17 AM IST
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banking fraud by gold company kanishk gold to sbi and other banks
bhupesh jain

घोटालों के मौसम में एक और बैंकिंग घोटाला सामने आया है। चेन्नई की ज्वेलरी चेन कनिष्क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्टेट बैंक सहित 14 बैंकों से 824 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। बैंकों की तमाम कोशिशों के बावजूद इस कंपनी के मालिक भूपेश कुमार जैन और उनकी पत्नी नीता जैन से संपर्क नहीं हो पाया। समझा जाता है कि यह दंपती मॉरीशस फरार हो गया है। 

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कनिष्क गोल्ड को लोन देने वाले सरकारी व निजी क्षेत्र के 14 बैंकों का लीड बैंक होने के नाते स्टेट बैंक ने इस साल जनवरी में सीबीआई से इस धोखाधड़ी की शिकायत की है लेकिन जांच एजेंसी ने अभी तक इस मामले में एफआईआर भी दर्ज नहीं की है। बैंकों के कंसोर्टियम द्वारा दिए गए 824 करोड़ के लोन पर ब्याज जोड़ने पर यह रकम 1000 करोड़ रुपये बैठती है।
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लिया था 842 करोड़ का लोन

स्टेट बैंक ने बताया है कि सबसे पहले कनिष्क गोल्ड ने कंसोर्टियम में शामिल आठ बैंकों को मार्च, 2017 में ब्याज भुगतान में चूक की। अप्रैल, 2017 आते-आते कंपनी ने सभी 14 बैंकों को भुगतान देना बंद कर दिया। बैंकों ने जब कंपनी का स्टॉक अडिट शुरू किया तो उसके मालिकों से संपर्क नहीं हो पाया। 25 मई, 2017 को जब बैंकों ने कंपनी के कॉरपोरेट ऑफिस, फैक्ट्री और शोरूम का दौरा किया तो सभी पर ताला लटका मिला। तब तक कंपनी का सारा स्टॉक खाली किया जा चुका था। 

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2007 से चल रहा था लोन

banking fraud by gold company kanishk gold to sbi and other banks
sbi

इस धोखाधड़ी के संबंध में सीबीआई को भेजे गए पत्र में स्टेट बैंक ने कहा है कि कनिष्क गोल्ड को 2007 में लोन दिया गया था। समय बीतने के साथ उसकी क्रेडिट लिमिट और वर्किंग कैपिटल लोन की लिमिट बढ़ती गई। वर्ष 2008 में स्टेट बैंक ने आईसीआईसीआई से कंपनी का लोन खरीदा था। तब कंपनी पर 50 करोड़ वर्किंग कैपिटल के मद में और 10 करोड़ मियादी लोन के रूप में बकाया था। इसके बाद मार्च, 2011 में पीएनबी और बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर स्टेट बैंक ने कंपनी को लोन दिया और 2012 में स्टेट बैंक की अगुवाई में बने कंसोर्टियम ने उसे मेटल गोल्ड लोन मंजूर किया।

मार्च 2017 में पहली बार कंपनी ने सभी 14 बैंकों की लोन की किश्त चुकाना बंद कर दिया था। इसके बाद एसबीआई ने 11 नवंबर 2017 को पहली बार आरबीआई को फ्रॉड होने की सूचना दी। इसके बाद जनवरी 2018 में अन्य बैंकों ने आरबीआई को फ्रॉड होने की सूचना देकर के आगे की कार्रवाई करने के लिए कहा। 

मई में बंद मिला ऑफिस, फैक्टरी और शोरूम
बैंकों ने 5 अप्रैल 2017 को सबसे पहले कंपनी का स्टॉक ऑडिट करना शुरू किया। लेकिन तब भी कंपनी के प्रमोटर से संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद 25 मई को जब बैंकों ने कनिष्क के ऑफिस, फैक्टरी और शोरूम का दौरा किया तो वहां पर ताला लटका मिला। 

krizz नाम से खोली थी फैक्टरी
भूपेश ने हाल ही क्रिज नाम से चेन्नई में ज्वेलरी बनाने की फैक्टरी खोली थी। यह फैक्टरी केवल व्यापारियों के लिए थी, जो कंपनी से सीधे गोल्ड ज्वैलरी खरीद सकते थे। 

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