फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Banking Beema ›   bank union wants private banks to come under direct ambit of government

निजी बैंकों का सरकारीकरण चाहते हैं बैंक यूनियन, योग्यता पर उठे गंभीर सवाल

Fri, 13 Apr 2018 05:14 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 13 Apr 2018 05:14 PM IST
विज्ञापन
bank union wants private banks to come under direct ambit of government
icici bank

एक तरफ जहां औद्योगिक चैंबर सरकारी बैंकों का निजीकरण चाह रहे हैं वहीं, कारपोरेट गवर्नेंस में चूक और सूचना छुपाए जाने के आरोपों के बीच सरकारी बैंकों के श्रमिक संघों ने निजी बैंकों के सरकारीकरण की आवाज बुलंद की है। श्रमिक संघों ने कहा कि विभिन्न तरह के आरोप और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाए जाने से जनता के धन से निपटने की उनकी योग्यता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हाल की घटनाओं ने भी सबसे सक्षम बैंक होने के उनके दावे की हवा निकाल दी है।

विज्ञापन


ऑल इंडिया बैंक ऑफीशर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) के महासचिव डीटी फ्रांको ने एक बयान में कहा कि सरकार के प्रिय कई निजी बैंक संकट में हैं और आईसीआईसीआई बैंक तथा एक्सिस बैंक इनके उदाहरण हैं।
विज्ञापन


सरकार, आरबीआई को करना चाहिए हस्तक्षेप
एआईबीओसी के संयुक्त महासचिव रविंद्र गुप्ता ने कहा कि इसलिए यह इसका बिल्कुल सही वक्त है कि केंद्र सरकार और आरबीआई हस्तक्षेप करे तथा निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण करे, ताकि बैंकिंग क्षेत्र अर्थव्यवस्था के उच्च स्तर पर पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए और कृषि क्षेत्र तथा रोजगार सृजन में विकास हो।
विज्ञापन
विज्ञापन


गुप्ता ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि अधिकतर निजी बैंकों के मालिक विदेशी निवेशक हैं और वे शेयरों के ऊंचे मूल्य तथा लाभांश यील्ड का लाभ उठाते हैं। निवेशक लाभ का एक बड़ा हिस्सा ले लेते हैं। दूसरी ओर सरकारी बैंक लाभ का एक हिस्सा लाभांश के रूप में सरकार को देते हैं, जिसका उपयोग देश में विकास की गतिविधियों में होता है।

दक्ष माने जाने वाले निजी बैंकों की खुल गई पोल

bank union wants private banks to come under direct ambit of government
bank

ऑल इंडिया बैंक एंप्लाईज एसोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने भी इसी तरह के स्वर में कहा कि अब हर कोई इस बात से अवगत हो चुका है कि बैंकिंग सेक्टर में कथित रूप से दक्ष माने जाने वालों की असली हालत क्या है।

उन्होंने कहा कि जब से पंजाब नेशनल बैंक और नीरव मोदी का धोखाधड़ी मामला सामने आया है, तब से विभिन्न पक्षों के लोग सरकारी बैंकों के निजीकरण की मांग कर रहे हैं। पहले उद्योग संघ एसोचैम ने इसकी मांग की और इसके बाद फिक्की ने। इसके बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन और नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन ने भी इसमें सुर मिला दिया।

वेंकटचलम ने कहा कि वे यह भूल गए कि 1947 से 1969 (जब बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ) तक 736 निजी बैंक कुप्रबंधन के चलते बंद हो चुके थे। 1969 के बाद भी 36 निजी बैंक या तो असफल हो गए या उनका दूसरे बैंकों में विलय हो गया।

एक्सिस, आईसीआईसीआई में 9 लाख करोड़ जमा
उन्होंने कहा कि आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक दोनों के पास लोगों की नौ लाख करोड़ रुपये तक की राशि जमा है। इस धन को बचाने की जरूरत है। कई लोग निजी बैंकों में बेहतर गवर्नेंस की बात करते हैं। आईसीआईसीआई बैंक को रोल मॉडल के तौर पर पेश किया जा रहा था। अब देखिए उसमें क्या हुआ।

उन्होंने कहा कि इस बैंक में ऋण जारी करने में भ्रष्टाचार और मित्रवाद का गंभीर आरोप है। लंबे समय से अनैतिक काम चल रहे हैं। शीर्ष अधिकारियों को बदल देने भर से काम नहीं चलेगा। अब समय आ गया है कि सरकार आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक का राष्ट्रीयकरण कर दे। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Budget 2022 से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed