फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Banking Beema ›   after aadhaar verdict postal payment bank and csc faces hurdles

गांवों में आसान बैंकिंग सेवा हुई कठिन, पोस्ट पेमेंट बैंक और सीएससी नहीं दे पाएंगे सशक्त बैंकिंग सेवा

Fri, 28 Sep 2018 10:50 AM IST
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली Updated Fri, 28 Sep 2018 10:50 AM IST
विज्ञापन
after aadhaar verdict postal payment bank and csc faces hurdles

आधार पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पोस्ट पेमेंट बैंक (पीपीबी) और सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) के लिए मुसीबत बन गया है। दोनों ही आधार के जरिए लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने को लाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवा मुहैया कराने का सरकार का लक्ष्य इस कारण प्रभावित होगा। ऐसी स्थिति में अभी देश के ढाई लाख से ज्यादा सीएससी और हाल ही में शुरू हुए पीपीबी की 650 शाखाओं में सवा तीन हजार केंद्र अपनी अहमियत की बाट जोह रहे हैं।

विज्ञापन


संचार मंत्रालय के तहत पीपीबी में खाता खुलवाने से लेकर पैसे जमा करने और निकालने के लिए फॉर्म भरने या अन्य कागजी कार्रवाई की जरूरत खत्म कर दी गई थी। इस पेपरलेस व्यवस्था में सिर्फ अंगूठे का निशान देकर यानी, आधार व मोबाइल नंबर देकर खाता खुलता है।
विज्ञापन


आधार पर दिए गए फैसले में बैंकिंग सेवाओं में आधार के प्रयोग पर पाबंदी लगाए जाने से यह व्यवस्था पूरी तरह से खत्म हो गई। ऐसे में पीपीबी द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सरल तरीके से बैंकिंग सेवाओं को पहुंचाना मुमकिन नहीं होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसी तरह सीएससी में बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट लोगों को बैंक सेवाएं मुहैया करा रहे थे। दोनों ही व्यवस्थाओं को देश के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों तक आसान बैंकिंग सेवाएं मुहैया कराने के मद्देनजर शुरू की गई थी। यह संभव है कि आधार के स्थान पर कोई विकल्प सरकार द्वारा पीपीबी और सीएससी के लिए लाया जाए। यह क्यूआर कोड और मोबाइल ओटीपी हो सकता है।

क्यूआर कोड व मोबाइल ओटीपी आसान विकल्प नहीं

बैंकिंग विशेषज्ञ अतुल सिंह के मुताबिक पीपीबी की सेवाएं पूरी तरह से आधार पर टिकी थीं। चिट्ठी पहुंचाने की तर्ज पर डाकिया बायोमिट्रिक मशीन पर आपके अंगूठे की छाप लेकर खाते में जमा धन में से पांच हजार रुपये तक ग्राहक को मुहैया करा सकता था। जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संभव नहीं है।

यह संभव है कि दूरसंचार मंत्रालय क्यूआर कोड या मोबाइल ओटीपी के माध्यम से यह सेवा मुहैया कराए, लेकिन ऐसा करने पर यह व्यवस्था पहले जैसी पुख्ता नहीं मानी जा सकेगी। साइबर विशेषज्ञ रामानुज के मुताबिक क्यूआर कोड और मोबाइल ओटीपी के जरिए बैंकिंग सेवा को तभी मजबूत माना जा सकता है, जब उपभोक्ता दोनों ही तरीकों से परिचित हो या उनके प्रति जागरूक हो। आधार की बायोमिट्रिक व्यवस्था में बिना पढ़े-लिखे व्यक्ति के साथ भी धोखाधड़ी करना मुमकिन नहीं था।

मनरेगा भुगतान में भी होगी दिक्कत

गौरतलब है कि मनरेगा समेत तमाम केंद्रीय योजनाओं में लाभार्थियों का सत्यापन आधार के जरिए करके उनके खातों में पैसा भेजा जाता रहा है। जबकि अब सुप्रीम कोर्ट ने बैंकिंग सेवाओं में आधार के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी है। परिणामस्वरूप लाभार्थी का आधार बैंक खाते से लिंक नहीं होने पर इस मामले में भी अन्य विकल्प का रुख सरकार को करना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Budget 2022 से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed