एनबीएफसी कंपनियों पर 20 लाख करोड़ का बकाया, बदतर हो सकते हैं हालात
- उद्योगों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार और आरबीआई को सिस्टम में डालनी होगी और नकदी
- 20 लाख करोड़ रुपये का बकाया है एनबीएफसी पर
- 10,190 एनबीएफसी हैं देशभर में सितंबर 2018 के आंकड़ों के अनुसार
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छोटे कारोबारियों और उद्योगों को कर्ज मुहैया कराने में बड़ी भूमिका निभाने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) खुद भारी कर्ज के बोझ तले दबी जा रही हैं। आईएलएंडएफएस में डिफॉल्ट के बाद एनबीएफसी के लिए बाजार से नकदी जुटाना बेहद मुश्किल हो गया और स्थिति बदतर होती जा रही है। उद्योगों की वृद्धि के लिए सरकार और आरबीआई को जल्द सिस्टम में और नकदी डालनी होगी।
20 हजार करोड़ का बकाया
रिजर्व बैंक के अनुसार, देश में काम करने वाली 10 हजार से अधिक एनबीएफसी पर कुल बकाया 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। यह राशि बैंकों के कुल बकाया राशि 92 लाख करोड़ का करीब पांचवां हिस्सा बैठता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के विश्लेषक कार्तिक श्रीनिवास का कहना है कि एनबीएफसी में बढ़ते संकट ने म्यूचुअल फंड बाजार में निवेश पर भी असर डाला है।
करीब पौने दो लाख करोड़ रुपये के डिफाल्ट वाले आईएलएंडएफएस समूह के अलावा रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस, रिलायंस होम फाइनेंस, दीवान हाउसिंग फाइनेंस, पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस पर भी रेटिंग एजेंसियों की कड़ी निगाह है। इसमें से कुछ एनबीएफसी की रेटिंग में गिरावट भी आई है।
गलत नीतियों ने बढ़ाई मुश्किल
श्रीनिवास ने बताया कि एनबीएफसी के कर्ज बांटने और बाजार से पैसे जुटाने की नीतियों में बड़ा झोल है। हाल में कई एनबीएफसी ने निवेशकों से 1 लाख करोड़ रुपये जुटाने के लिए कॉमर्शियल पेपर (सीपी) जारी किए हैं। इस डेट इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल एक साल तक के लिए फंड जुटाने में किया जाता है, जबकि कंपनियां सिर्फ तीन या छह महीने के लिए सीपी से फंड उठाती हैं।
दूसरी ओर, एनबीएफसी सबसे ज्यादा कर्ज होम लोन, वाणिज्यिक क्षेत्र, वाहन लोन के क्षेत्र में देती हैं, जो लंबी अवधि के कर्ज माने जाते हैं। यह असंतुलन इन कंपनियों के सीपी में भी डिफाल्ट की आशंका पैदा करता है।
बाजार और कारोबार पर बुरा असर
विश्लेषकों का मानना है कि अगर एनबीएफसी में डिफॉल्ट बढ़ता है तो म्यूचुअल फंड और बैंक इसकी भरपाई करने में सक्षम नहीं होंगे और पूरी बाजार धारणा पर असर पड़ेगा। कारोबारियों के लिए भी बैंकों की अपेक्षा एनबीएफसी से कर्ज जुटाना ज्यादा आसान होता है। ऐसे में इस क्षेत्र का बढ़ता संकट कारोबार को भी प्रभावित करेगा और पहले से सुस्त चल रही भारतीय अर्थव्यवस्था की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
तेजी से घटेगी एनबीएफसी की संख्या
कोटक महिंद्रा के सीआईओ (डेट) लक्ष्मी अय्यर का कहना है कि भारत का नकदी घाटा 2016 से लगातार बढ़ता जा रहा है। अगले दो या तीन तिमाहियों में इस क्षेत्र में समेकन का जबरदस्त दौर आने वाला है। इससे एनबीएफसी की संख्या तेजी से घटेगी। सरकार भी सिस्टम में नकदी डालने को लेकर आरबीआई से लगातार बातचीत कर रही है।