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दूरसंचार कंपनियों को राहत पर बोले विश्लेषक, स्पेक्ट्रम भुगतान पर हों और उपाय
Fri, 22 Nov 2019 06:49 AM IST
गौरव पाण्डेय
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 22 Nov 2019 06:49 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
सरकार की तरफ से स्पेक्ट्रम के भुगतान पर दो साल की मोहलत से दूरसंचार कंपनियों विशेषकर वोडाफोन आइडिया को निकट भविष्य में नकदी प्रवाह पर राहत मिलेगी, लेकिन संकट में फंसी दूरसंचार कंपनियों के लिए यह राहत पर्याप्त नहीं होगी। दूरसंचार कंपनियों के मसले पर अग्रणी विश्लेषकों ने कुछ ऐसे ही विचार व्यक्त किए।
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सिटी ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा, ‘हम यह साफ होने का इंतजार कर रहे हैं कि क्या सरकार यही पेशकश करना चाहती है या आगे कुछ और उपाय भी कर सकती है।’ रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही स्पेक्ट्रम नीलामी के भुगतान को 2020-21 और 2021-22 के लिए टाल दिया गया है जिससे विशेषकर वोडाफोन आइडिया को नकदी प्रवाह के मसले पर राहत मिलेगी, लेकिन ‘सिर्फ यही कंपनियों की चिंता का हल निकालने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।’
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क्रेडिट सुइस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि स्पेक्ट्रम नीलामी का भुगतान टालने का फैसला उम्मीदों के अनुरूप रहा, लेकिन ‘लाइसेंस शुल्क में कमी पर कोई फैसला नहीं लिया गया, जो सेक्टर के लिए नकारात्मक है।’ क्रेडिट सुईस ने कहा, ‘हमारा मानना है कि एजीआर पर दूरसंचार कंपनियों को राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट से संपर्क करना चाहिए।’
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गोल्डमैन सैक्स इक्विटी रिसर्च का अनुमान है कि ऐसे भुगतान पर दो साल की राहत से भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को इस अवधि के दौरान 2 अरब डॉलर (लगभग 14,200 करोड़ रुपये) और 3.3 अरब डॉलर (23,400 करोड़ रुपये) की बचत हो सकती है, जो एजीआर से संबंधित देनदारी की तुलना में क्रमश: 41 फीसदी और 52 फीसदी के बराबर है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘भले ही इस राहत से निकट भविष्य में वोडाफोन आइडिया के लिए तरलता में सुधार में मदद मिलेगी, लेकिन हम कंपनी की बैलेंसशीट में सुधार की उम्मीद नहीं करते हैं। भारती एयरटेल के लिए इस संभावित एजीआर संबंधी देनदारी को पूरा करने में मदद मिलेगी।’