{"_id":"3041180bb9f8fc5082018fbedb2e2911","slug":"now-bin-reaped-wheat-crop-water","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब बिन पानी भी लहलहाएगी गेहूं की फसल","category":{"title":"Agriculture","title_hn":"कृषि","slug":"agriculture"}}
अब बिन पानी भी लहलहाएगी गेहूं की फसल
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 29 Jan 2014 01:29 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
'बिन पानी सब सून' वाली कहावत कम से कम गेहूं पर तो लागू नहीं होगी। अब बहुत कम पानी में गेहूं की फसल लहलहाएगी।
विज्ञापन
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद और रूसी वैज्ञानिकों ने गेहूं की नई प्रजाति का जिंस तैयार किया है। इससे तैयार पौधे से खेती में सिंचाई की जरूरत ना के बराबर होगी। वैज्ञानिकों का यह भी दावा है कि फसल कीटाणुओं के हमले से बर्बाद भी नहीं होगी।
गेहूं रूस और भारत दोनों ही देश की प्रमुख फसल है। कीटाणुओं के हमले से फसल बर्बाद होने की समस्या भी दोनों देश में है। कई कीटाणु तो गेहूं का मूल तत्व ही चट कर जाते हैं। इसको देखते ट्रिपलआईटी और रशियन एकेडमी ऑफ साइंसेज ने चार साल पहले मिलकर शोध का फैसला लिया। इसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ चुके हैं।
विज्ञापन
इस प्रोजेक्ट में शामिल ट्रिपलआईटी के बायोइंफार्मेटिक्स के डॉ. सीवीएस शिवा प्रसाद ने बताया कि गेहूं का नया जिंस तैयार किया गया है। टीश्यू कल्चर विधि से पौधे तैयार करने के लिए इसे रशिया के लैब को भेज दिया गया है। इससे तैयार फसल पर जीवाणुओं का कोई असर नहीं होगा। खास बात यह है कि सिंचाई में इतने कम पानी की जरूरत होगी कि राजस्थान के मरूस्थलीय इलाके में भी खेती संभव हो सकेगी।
विज्ञापन