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चुनाव का चमत्कार, अच्छी होगी गेहूं की फसल

Wed, 29 Jan 2014 01:36 PM IST
जयप्रकाश पाराशर/अमर उजाला, भोपाल
जयप्रकाश पाराशर/अमर उजाला, भोपाल Updated Wed, 29 Jan 2014 01:36 PM IST
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miracle of elections, would be a good wheat crop

मध्य प्रदेश में चुनावों की वजह से किसानों को करीब 18 घंटे तक बिजली मिली। राज्य में भारी बरसात के कारण भूजल स्तर भी अच्छा है। अब अगर पाला और ओले नहीं पड़ते हैं, तो मध्य प्रदेश का किसान इस साल रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन करेगा।

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लोकसभा चुनावों के पहले समर्थन मूल्य में केंद्र के 100 रुपये के इजाफे और राज्य सरकार के 115 रुपये के बोनस से मध्य प्रदेश के खेतों में पैसों की फसलें खनकने वाली हैं।
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प्रदेश के ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि चुनाव में बिजली की उपलब्धता उनका अहम मुद्दा था। मध्य प्रदेश जैसे राज्य में किसानों के लिए यह बहुत बड़ी बात थी। जब ज्योतिरादित्य सिंधिया अटल ज्योति योजना को अटल कटौती योजना कहा करते थे, तब लोग उनकी बात सुनकर हंसा करते थे, क्योंकि सबको भरपूर बिजली मिल रही थी।
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रीवा से चुनाव जीतकर आए शुक्ल इसे चुनावी बिजली मानने से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि फीडर सेपरेशन के जरिए किसानों को उनकी जरूरत की बिजली उपलब्ध कराई गई। जहां यह नहीं हो पाया, वहां किसानों को और भी ज्यादा बिजली मिली।

शुक्ल का कहना है कि डिफाल्टरों को मुख्यधारा में लाने के लिए 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था ताकि जो लोग डिफाल्टर होने के कारण बिजली नहीं ले पा रहे हैं, उनके आधे बिल माफ कर दिए जाएं और वे भविष्य में बिजली का इस्तेमाल करें और नियमित बिल जमा करें।

केंद्र सरकार ने गेहूं पर पिछले साल 1385 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य घोषित किया था। राज्य सरकार ने 115 रुपये का बोनस दिया। किसानों को 1500 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदी का लाभ मिला।

विधानसभा चुनावों के कारण राज्य सरकार ने किसानों को भरपूर बिजली मुहैया कराई। भाजपा के विधायक जब भी भोपाल आते, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पास आकर कहा करते थे कि बिजली जरूर दे देना, नहीं तो कहीं के नहीं रहेंगे।


लिहाजा राज्य सरकार ने पड़ोसी राज्यों से बिजली खरीदकर भी किसानों को भरपूर बिजली उपलब्ध कराई। अनेक गांवों में तो 18 घंटे तक बिजली किसानों को मिली।

कांग्रेस नेता अवनीश भार्गव मानते हैं कि बिजली मिलने का फायदा किसानों को हुआ। ‘बिजली मिलने से नवंबर और दिसंबर के महीनों में किसान जरूरत के मुताबिक पानी फसलों को देने में सफल रहे। एक तरफ जहां उन्हें डीजल के मुकाबले सस्ती बिजली मिलने से लागत में कमी आई, वहीं उत्पादन में इजाफा होने की संभावना है।’

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