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Hindi News ›   Business ›   15th Finance Commission gets a long wish list from different political leaders

15वें वित्त आयोग को कई राजनेताओं से मिले सुझाव, एनके सिंह ने राहुल से मांगे आइडिया

Mon, 02 Apr 2018 10:37 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 02 Apr 2018 10:37 AM IST
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15th Finance Commission gets a long wish list from different political leaders
एनके सिंह

केंद्र सरकार ने पिछले साल 15वें वित्त आयोग बनाया था। इसका अध्यक्ष पूर्व योजना आयोग के सदस्य रहे एन के सिंह को बनाया गया था। आयोग को केंद्र व राज्य सरकारों के वित्तीय घाटे, कर्ज स्तर और राजकोषीय अनुशासन प्रयासों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने के लिए बनाया गया था। इसका काम मजबूत राजकोषीय प्रबंधन के लिए राजकोषीय स्थिति मजबूत करने की व्यवस्था पर सुझाव देना भी था। इस आयोग की सिफारिशें एक अप्रैल 2020 से शुरू होने वाले पांच साल की अवधि के लिए होंगी। अब इस आयोग पर आरोप लग रहे हैं कि यह दक्षिण की बजाए उत्तर के राज्यों के पक्ष में काम करता है।

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राजकोषीय घाटे का लक्ष्य, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बाढ़ से निपटने के लिए फंड का आवंटन करने की वजह से अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। आयोग के अध्यक्ष एन के सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को और व्यापक विचार देने के लिए लिखा है। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार उन शख्सों में से एक हैं जिन्होंने आयोग को पत्र लिखा है। उन्होंने आयोग को अपनी चिंता से अवगत कराया जैसे कि आयोग ने विभिन्न राज्यों को वित्तीय भत्ते का निर्णय लेने का काम शुरू कर दिया है। अपने पत्र में पवार ने यह भी कहा है कि एक वित्तीय बफर बनाया जाना चाहिए जिससे अर्थव्यवस्था को बढ़ते कच्चे तेलों के दामों की वजह से आने वाली अनिश्चितताओं से बचाया जा सके।
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पवार ने सिंह को लिखा- जहां तक केंद्र सरकार की बात है अतंर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ते कच्चे तेल के दामों का मतलब केवल इतना नहीं है कि ग्राहकों को ज्यादा पैसे चुकाने होंगे बल्कि इससे विदेशी मुद्रा में कमी आएगी और मुद्रास्फीति तेज होगी। पवार के अलावा बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू नेता नीतीश कुमार ने आयोग को घरेलू चिंताओं के बारे में पत्र लिखा है।
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नीतीश ने अपने पत्र में लिखा है- राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत राजकोषीय घाटे के लिए 3 प्रतिशत का लक्ष्य "अन्यायपूर्ण" है और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्यों के विशिष्ट संदर्भ में इसकी समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि राज्य बिहार राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के अंतर्गत वादे के अनुसार मिलने वाले विशेष वित्तीय आवंटन का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पहाड़ी राज्यों से संबंधित विशेष मुद्दों और उनके लिए होने वाले वित्तीय आवंटन को लेकर आयोग का ध्यान आकृष्ट किया है।

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