चेन से पोते को बांधकर रखती है ये दादी, जानना नहीं चाहेंगे क्यों?
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मेट्रो के मुताबिक सालों पहले उनके बेटे की मौत हो चुकी थी। बेटे की मौत के बाद घर में बस उनकी बहू और छोटा सा मानसिक रूप से विक्षिप्त पोता ही बचा था।
दुख की घड़ी में साथ रहने के बजाय लखन की बहू उन्हें छोड़ कर चली गई। अब बूढ़ापे में बचा तो बस वो अकेला पोता जो चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता।
लेना पड़ा फैसला
लखन को अपना दिल कड़ा करके इतनी ज्यादा उम्र में काम करने जाना पड़ता है। खुद को और पोते के पेट को भरने के लिए उसे घर से दूर निकलना होता है।
वो हर जगह अपने पोते को लेकर नहीं जा सकती इसलिए रोज उसे मुंबई बस स्टेशन के पास ही एक लोहे के स्टैंड पर बांध कर चली जाती है।
रोज ही दिन भर वो पोता वहीं एक जगह बंधा रहता है। जब इस बात का पता मुंबई के एक सरकारी रेजिडेंशियल होम को पता चला तो वे चौंक गए।
सोशल वर्कर ने पहुंचाया सही जगह
इस बात का पता जब एक सोशल वर्कर का लगा तभी उसने फौरन बच्चे को ले जाकर सरकारी रेजिडेंशियल होम में पहुंचाया।
सोशल वर्कर मुथा का कहना है कि गरीबी की वजह से भारत में ऐसे लाखों लोग हैं जो रोटी कमाने के लिए अपने परिवार के विक्षिप्त लोगों को संभालने के लिए उन्हें ऐसे बंद कर के जाते हैं।
सरकारी मदद ने मिलने से उन्हें चेन से बांधकर जाना होता है। इसलिए इस मामले में लखन जैसी बूढ़ी महिला की कोई गलती नहीं हैं।
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