मंगल ग्रह की सतह पर 82 किमी. चौड़ा बर्फ का गड्ढा दिखा, यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने जारी की तस्वीर
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यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने मंगल ग्रह की ऐसी तस्वीर जारी की है जिसने एक बार फिर वहां पर जिंदगी की उम्मीद जगा दी है। मार्स एक्सप्रेस मिशन की तस्वीर देखने में भले ही थोड़ी अजीब लगे लेकिन इसे देखने से लगता है कि मंगल ग्रह पर एक बड़ा गड्ढा है और उसमें बर्फ जमी हुई है।
एजेंसी ने बताया कि धूल भरे लाल ग्रह पर उत्तर में मिला कोरोलेव क्रेटर करीब 82 किलोमीटर चौड़ा और गहराई 5,905 फीट है और इसमें साल भर बर्फ भरे होने का अनुमान है। ये दर्शाता है कि लाल ग्रह पर चीजें किस तरह से संरक्षित हैं।
एजेंसी के मुताबिक मंगल पर हिमपात तो नहीं हुआ, पर ये बर्फ है। गड्ढे के केंद्र पर बर्फ की मोटाई 1.8 किमी हो सकती है, जो सालभर कायम रह सकती है। यह बताता है कि मंगल पर ग्लेशियर के बिना भी बर्फ जम सकती है।
For those of you asking - yes it is water ice.
— ESA (@esa) December 21, 2018
Mars Express first detected water on #Mars in 2004, see our release at the time https://t.co/oAY2Qj0U5N. More recently, the spacecraft detected liquid water under the planet’s south pole, see: https://t.co/JnglOBBt3o https://t.co/J0h3ZfYpXF
बता दें कि इसी साल मंगल ग्रह पर चट्टान, पानी, बर्फ और हवा के चलते बिखरी सतह दिखने की पुष्टि वैज्ञानिकों ने की थी। यूरोपियन स्पेस एजेंसी के मिशन मार्स एक्सप्रेस की ओर से भेजी गई तस्वीरों में यह खुलासा हुआ था। बर्फ से भरे इस बार इतने बड़े गड्ढे की तस्वीर ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक किसी दूसरे ग्रह पर अब तक मिला इतना बड़ा बर्फ से जमा गड्ढा नहीं पाया गया है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि तापमान बढ़ने पर हवा चलने के साथ सतह पर कुछ हलचल जरूर होती है। जानकारों का कहना है कि पिछली कुछ तस्वीरों से मंगल पर काफी तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। मंगल की तस्वीरें देखने के बाद इसका स्वरूप पृथ्वी से काफी मिलता जुलता दिख रहा है।
आपको बात दें कि 15 साल पहले लॉन्च किए गए मार्स एक्सप्रेस के जरिए अक्सर ही मंगल ग्रह पर बर्फ और ग्लेशियर की खोज की तस्वीरें जारी की जाती हैं। अंतरिक्ष अभियान के जानकारों का कहना है कि यह मंगल ग्रह पर बीते दौर में कुछ ऐक्टिविटीज होने का संकेत है। दरअसल, मंगल ग्रह दो गोलार्ध में बंटा हुआ है। मंगल का उत्तरी गोलार्ध दक्षिणी हिस्से के मुकाबले कुछ नीचे स्थित है।